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  1. भारतीय सेना खरीदेगी ₹80Cr का ACADA सिस्टम, केमिकल, रेडियॉलजिकल, न्यूक्लियर खतरों से निपटने की तैयारी

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भारतीय सेना खरीदेगी ₹80Cr का ACADA सिस्टम, केमिकल, रेडियॉलजिकल, न्यूक्लियर खतरों से निपटने की तैयारी

Upstox

2 min read | अपडेटेड February 26, 2025, 13:34 IST

सारांश

CBRN Defence: DRDO के मुताबिक CBRN खतरों को लेकर चिंता स्टेट के साथ-साथ नॉन-स्टेट ऐक्टर्स के कारण भी रही है। इसलिए दशकों से इससे निपटने के लिए रिसर्च जारी है।

भारतीय सेना की फील्ड यूनिट्स के ACADA से लैस होने पर हमारी क्षमता बहुत बढ़ जाएगी।

भारतीय सेना की फील्ड यूनिट्स के ACADA से लैस होने पर हमारी क्षमता बहुत बढ़ जाएगी।

तेज रफ्तार से बदलती दुनिया में सुरक्षा पर खतरे भी नई शक्लें लेने लगे हैं। गोली-बारूद के साथ-साथ अब केमिकल से लेकर जैविक हथियार के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ने लगा है। ऐसी चुनौतियों के लिए मुस्तैद रहने को भारतीय सेना ने कमर कस ली है।

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भारतीय सेना ने 223 ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्शन ऐंड अलार्म (ACADA) सिस्टम खरीदने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 25 फरवरी को ₹80.43 करोड़ का यह कॉन्ट्रैक्ट L&T Ltd के साथ Buy Indian (IDDM) कैटिगिरी के तहत किया गया है। इससे भारत सरकार के आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के अभियान को भी बल मिलेगा। इस सिस्टम के 80% हिस्से स्थानीय बाजार से ही लिए जाएंगे।

क्या है ACADA?

ACADA एक डिटेक्शन सिस्टम है जिसे डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के ग्वालियर स्थित डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट इस्टैबलिशमेंट ने डिजाइन और डिवेलप किया है। यह भारत को CBRN (केमिकल, बायॉलजिकल, रेडियॉलजिकल और न्यूक्लियर) क्षेत्र में सुरक्षा पुख्ता करने में मदद करेगा।

ACADA ऐसा सिस्टम है जिसका इस्तेमाल केमिकल वॉरफेयर एजेंट्स और प्रोग्राम किए गए टॉक्सिक इंडस्ट्रियल केमिकल्स (TICs) को डिटेक्ट करने में होता है। यह सिस्टम पर्यावरण की हवा के सैंपल लेकर उसमें मौजूद केमिकल्स को डिटेक्ट करता है।

यह आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (Ion Mobility Spectrometry, IMS) पर आधारित है। इसमें दो बेहद संवेनशील IMS सेल लगे हैं जो लगातार डिटेक्शन करते हैं और साथ-ही साथ खतरनाक और जहरीले तत्वों को मॉनिटर करते हैं।

भारतीय सेना की फील्ड यूनिट्स के ACADA से लैस होने पर हमारी क्षमता बहुत बढ़ जाएगी। यह सिर्फ केमिकल, बायॉलजिकल, रेडियॉलजिकल और न्यूक्लियर हमले के खतरे से नहीं, बल्कि उद्योगों में होने वाली आपदा की स्थिति से निपटने के भी काम आएगा।

DRDO कर रहा रिसर्च

DRDO के मुताबिक CBRN खतरों को लेकर चिंता स्टेट के साथ-साथ नॉन-स्टेट ऐक्टर्स के कारण भी रही है। इसलिए दशकों से इससे निपटने के लिए रिसर्च जारी है।

इनमें बायोमेडिकल इमेजिंग और सेंसिंग का इस्तेमाल करते हुए ब्लास्ट के कारण होने वाली ब्रेन इंजरी के बायोमार्कर (प्रोटीन/छोटे मॉलिक्यूल) को आइडेंटिफाई करने के लिए ब्लास्ट बायोडोजिमेट्री डिवेलप करने से लेकर इमारजों को CBRN का सामना करने के लिए मजबूत बनाने तक पर रिसर्च जारी है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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