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3 min read | अपडेटेड January 13, 2026, 13:45 IST
सारांश
भारत जल्द ही अमेरिका की अगुवाई वाले 'पैक्स सिलिका अलायंस' का पूर्ण सदस्य बनने जा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि अगले महीने भारत को औपचारिक आमंत्रण दिया जाएगा। यह संगठन दुनिया भर में सिलिकॉन सप्लाई चेन, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।

'पैक्स सिलिका अलायंस' का हिस्सा बनेगा भारत
भारत अब दुनिया की सबसे ताकतवर तकनीकी मंडली में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका के नेतृत्व वाले 'पैक्स सिलिका अलायंस' में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को यह बड़ी जानकारी शेयर की है। उन्होंने बताया कि अगले महीने भारत को औपचारिक रूप से इस अलायंस का हिस्सा बनने के लिए न्योता दिया जाएगा। यह कदम भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम माना जा रहा है। इस अलायंस में शामिल होने के बाद भारत की गिनती उन देशों में होगी जो दुनिया की तकनीकी दिशा तय करते हैं।
पैक्स सिलिका एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय पहल है जिसका सीधा संबंध भविष्य की तकनीक और सुरक्षा से है। यहां 'पैक्स' शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका मतलब शांति और स्थिरता होता है, जबकि 'सिलिका' का मतलब सिलिकॉन से है। आज के दौर में स्मार्टफोन से लेकर मिसाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक हर जगह सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल होता है। इस अलायंस का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी सप्लाई चेन बनाना है जिस पर दुनिया भरोसा कर सके और जो किसी एक देश की मर्जी पर निर्भर न हो। भारत के जुड़ने से जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन, इजरायल, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ मिलकर काम करने के नए मौके खुलेंगे।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के रिश्तों पर भी बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि उन्होंने ट्रंप के साथ दुनिया के कई देशों की यात्रा की है और वे इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि दोनों नेताओं के बीच एक सच्ची और गहरी दोस्ती है। यही वजह है कि अमेरिका भारत को नई तकनीक की शुरुआत से ही अपने साथ लेकर चलना चाहता है। राजदूत गोर ने कहा कि जब दुनिया नई और एडवांस टेक्नोलॉजी अपना रही है, तो भारत और अमेरिका का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। यह दोस्ती केवल कागजों तक सीमित नहीं है बल्कि अब यह बड़े रणनीतिक फैसलों में भी साफ दिखाई दे रही है।
इस नए अलायंस को 'जबरदस्ती की निर्भरता' कम करने के एक हथियार के रूप में भी देखा जा रहा है। वर्तमान में दुनिया के कई देश सेमीकंडक्टर और जरूरी खनिजों के लिए कुछ खास देशों पर निर्भर हैं। पैक्स सिलिका का मकसद इसी निर्भरता को खत्म करना और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी चीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के इस ग्रुप में शामिल होने से वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाएगा। इससे न केवल भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। यह गठबंधन सुनिश्चित करेगा कि भविष्य की तकनीक सुरक्षित हाथों में रहे।
इस अलायंस का हिस्सा बनने के बाद भारत को सेमीकंडक्टर और एआई के क्षेत्र में इनोवेशन करने में काफी मदद मिलेगी। अब तक भारत इन तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर काफी हद तक निर्भर रहा है, लेकिन अब भारत खुद इन तकनीकों को बनाने और दुनिया भर में पहुंचाने में अपना योगदान दे सकेगा। पिछले साल ताइवान, यूरोपीय संघ और कनाडा जैसे देशों ने इसमें गेस्ट के तौर पर हिस्सा लिया था, लेकिन भारत को सीधे पूर्ण सदस्य के रूप में आमंत्रित करना यह दिखाता है कि दुनिया अब भारत को एक बड़ी तकनीकी शक्ति के रूप में देख रही है।
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