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IDFC First Bank फ्रॉड केस में बड़ी राहत, हरियाणा सरकार को ब्याज समेत वापस मिले ₹578 करोड़

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 24, 2026, 15:55 IST

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सारांश

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में हरियाणा सरकार को ₹556 करोड़ की मूल राशि और ₹22 करोड़ का ब्याज वापस मिल गया है। कल बैंक के एमडी वी वैद्यनाथन ने साफ किया था कि यह कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत थी।

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हरियाणा सरकार के खातों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने फ्रॉड की रकम ब्याज समेत वापस कर दी है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी इस धांधली में बैंक ने न केवल मूल रकम, बल्कि उसका पूरा ब्याज भी लौटा दिया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद विधानसभा में इस बात की पुष्टि की है कि सरकार का पैसा अब पूरी तरह सुरक्षित है। बैंक की तरफ से भी एमडी वी वैद्यनाथन ने निवेशकों और जनता के सामने स्थिति साफ की है कि यह कोई सॉफ्टवेयर की गलती नहीं थी, बल्कि आपसी मिलीभगत का मामला था। बैंक अब इस मामले में रिकवरी और जांच की प्रक्रिया को और तेज कर रहा है।

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24 घंटे में लौटा पैसा और ब्याज

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बयान देते हुए बताया कि सरकार का पैसा पूरी तरह वापस आ चुका है। बैंक ने ₹556 करोड़ की पूरी मूल रकम महज 24 घंटे के भीतर सरकार को वापस लौटा दी है। इतना ही नहीं, इस रकम पर बनने वाला ₹22 करोड़ का ब्याज भी बैंक ने सरकारी खाते में जमा करा दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरे मामले में चंडीगढ़ ब्रांच के 4-5 कर्मचारियों की संलिप्तता यानी मिलीभगत सामने आई है। इन कर्मचारियों की पहचान कर ली गई है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।

जाली चेक का हुआ इस्तेमाल

बैंक के एमडी वी वैद्यनाथन ने 23 फरवरी को दिए अपने बयान में इस घोटाले की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह धोखाधड़ी फिजिकल चेक के जरिए अंजाम दी गई थी। एमडी ने साफ किया कि यह बैंक के किसी सॉफ्टवेयर या सिस्टम की खराबी यानी सिस्टम रिपोर्टिंग एरर नहीं थी। कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने मिलकर जाली चेक का इस्तेमाल किया और बैंक के साथ यह खेल खेला। यह गड़बड़ी सिर्फ एक खास क्लाइंट ग्रुप यानी हरियाणा सरकार और एक ही ब्रांच तक सीमित पाई गई है। बैंक ने अब तक कुल ₹590 करोड़ की गड़बड़ी का आकलन किया है। इसमें से ₹490 करोड़ की पहचान शुरुआत में हुई थी और ₹100 करोड़ बैंक ने खुद अपनी इंटरनल जांच के जरिए पकड़े हैं।

नेट प्रॉफिट पर असर और रिकवरी का प्लान

निवेशकों की चिंता को दूर करते हुए वैद्यनाथन ने कहा कि इस फ्रॉड का बैंक के नेट प्रॉफिट यानी शुद्ध मुनाफे पर कोई बहुत बड़ा असर होने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि बैंक के पास बेहतर नेट इंटरेस्ट मार्जिन और कम क्रेडिट कॉस्ट है, जो इस नुकसान की भरपाई करने में मदद करेंगे। स्टैंडअलोन आधार पर बैंक को चौथे क्वार्टर में बहुत ठोस मुनाफे की उम्मीद है। इसके अलावा, बैंक के पास 35 करोड़ रुपये का कर्मचारी बेईमानी इंश्योरेंस कवर भी मौजूद है। यह इंश्योरेंस इस वित्तीय नुकसान के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देगा।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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