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4 min read | अपडेटेड February 24, 2026, 15:43 IST
सारांश
सरकारी बैंकों के मर्जर की खबरों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल विलय का कोई रोडमैप नहीं है, लेकिन विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक नई कमेटी बैंकिंग सेक्टर का पूरा रिव्यू करेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में क्या एक बार फिर से बड़े बदलाव होने वाले हैं? यह सवाल पिछले कुछ दिनों से निवेशकों और आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकारी बैंकों के मर्जर यानी विलय की खबरों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास फिलहाल सरकारी बैंकों के मर्जर के लिए कोई निश्चित रोडमैप तैयार नहीं है। यह बयान उन्होंने बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड को संबोधित करने के बाद आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में दिया। इस खबर से उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार जल्द ही बैंकों की संख्या और कम करने जा रही है।
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि भले ही फिलहाल कोई रोडमैप नहीं है, लेकिन बजट 2026-27 में एक 'हाई लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत' बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कमेटी भारतीय बैंकिंग सेक्टर का बारीकी से रिव्यू करेगी। इस कमेटी का मुख्य काम भारतीय बैंकों को देश के बड़े विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ना है। वित्त मंत्री के मुताबिक, एक बार जब इस कमेटी को काम करने के निर्देश मिल जाएंगे, तो यह हर उस पहलू पर गौर करेगी जिससे भारतीय बैंकिंग को मजबूत बनाया जा सके। इसमें बैंकों का आकार बढ़ाना और ग्लोबल लेवल के बड़े बैंक तैयार करना भी शामिल हो सकता है ताकि एक विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इसी कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में भारतीय बैंक काफी मजबूत स्थिति में हैं और उनके पास पर्याप्त पैसा यानी कैपिटल है। गवर्नर के मुताबिक, बैंक अगले 4 से 5 साल तक क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन देने की रफ़्तार को बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम हैं। यह देश की आर्थिक जरूरतों के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। उन्होंने यह भी बताया कि अब डिपॉजिट बढ़ने की रफ़्तार भी लोन बढ़ने की रफ़्तार के साथ तालमेल बिठा रही है, जो पिछले कुछ समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
बैंकिंग के अलावा सरकार सरकारी एनबीएफसी (NBFC) को और बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। बजट में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) को रिस्ट्रक्चर करने का प्रस्ताव दिया गया है। ये दोनों कंपनियां पावर सेक्टर को फंड देने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। वहीं, विदेशी निवेश यानी एफडीआई (FDI) के मुद्दे पर आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ग्रॉस एफडीआई में बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, नेट एफडीआई में थोड़ी कमी आई है क्योंकि कई लोग अपना निवेश वापस ले रहे हैं या भारतीय अब विदेश में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब पहले से ज्यादा बोल्ड और मजबूत महसूस कर रहे हैं।
सरकारी बैंकों के मर्जर की शुरुआत 2017 से हुई थी जब देश में 27 सरकारी बैंक हुआ करते थे। अगस्त 2019 में सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कई बैंकों का विलय कर दिया था। इसके तहत पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक और इंडियन बैंक जैसे बड़े संस्थान उभरे थे। उस समय ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का मर्जर पीएनबी में किया गया था। इस बड़े बदलाव के बाद आज देश में केवल 12 सरकारी बैंक ही काम कर रहे हैं। सरकार का मकसद बैंकों को और ज्यादा प्रोफेशनल और ग्लोबल लेवल का बनाना है ताकि वे दुनिया के बड़े बैंकों से मुकाबला कर सकें। फिलहाल, नई कमेटी की रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि भविष्य में बैंकों की संख्या और कम होगी या नहीं।
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