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  1. अमेरिका की टैरिफ धमकी के बाद टूट रहा BRICS? डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर सरकार ने दिया जवाब

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अमेरिका की टैरिफ धमकी के बाद टूट रहा BRICS? डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर सरकार ने दिया जवाब

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 21, 2025, 15:23 IST

सारांश

Tariff Threat to BRICS: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने लोकसभा को दिए जवाब में बताया है कि BRICS देशों का विस्तार संगठन में विश्वास को दिखाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनके 100-150% टैरिफ लगाने के फैसले से BRICS में दरार पड़ने लगी है और डॉलर का विकल्प खोजने की कोशिशें ठंडे बस्ते में चली गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर टैरिफ को लेकर साधते रहे हैं निशाना।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर टैरिफ को लेकर साधते रहे हैं निशाना।

अपने पड़ोसी देशों कनाडा और मेक्सिको के ऊपर 25% टैरिफ जड़ने के बाद यूरोपियन यूनियन से लेकर भारत तक पर जवाबी टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनके फैसले के बाद BRICS देशों में दरार पड़ गई है। इस दावे पर सरकार ने संसद में जवाब दिया है।

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लोक सभा में सरकार से सवाल किया गया कि BRICS देशों का मौजूदा स्टेटस क्या है और क्या यह सच है कि अमेरिका के 150% टैरिफ की धमकी देने से संगठन टूटने लगा है? लोक सभा सांसदों रामप्रीत मंडल और दिनेश चंद्र यादव ने यह सवाल किया था। उन्होंने मौजूदा समय में BRICS देशों की संख्या और अमेरिकी धमकी पर सदस्यों के विचारों के बारे में सवाल किया गया था

‘BRICS का विस्तार भरोसे का संकेत’

इस पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जवाब देते हुए BRICS के सदस्यों के बारे में जानकारी सामने रखी। उन्होंने बताया कि 2006 में बना BRICS सधी हुई रफ्तार से आगे बढ़ा है। सबसे पहले इसमें चार देश- ब्राजील, रूस, भारत और चीन थे और 2010 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हो गया था।

अब इन 5 देशों के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी इसके सदस्य हैं जबकि बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाइलैंड, युगांडा और उजबेकिस्तान इसके पार्टनर देश हैं।

केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि BRICS की सदस्यता में होता विस्तार संगठन में देशों के विश्वास की ओर इशारा करता है।

टैरिफ पर देशों का क्या विचार?

डॉ. जयशंकर ने बताया कि BRICS देश आपस में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव, आतंकवाद से लेकर जैव-विविधिता के संरक्षण, स्पेस नीतियों तक पर चर्चा करते हैं। सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय मुद्दों, जैसे अफगानिस्तान में शांति, गाजा में युद्धविराम, लेबनान, सूडान, हैती के हालात पर भी चर्चा होती है।

विदेश मंत्री ने कहा कि जैसा कि समझा जा सकता है, सदस्य देश विकास और आमदनी के अलग-अलग स्तरों पर हैं, अलग-अलग राष्ट्रहित हैं। ऐसे में BRICS देशों की राय तत्कालीन मुद्दों पर एक बड़ी रेंज में हैं। बैठकें और चर्चा कर सामान्य विचार खोजे जाते हैं और वैश्विक ऑर्डर के लिए साथ काम करने की ओर कदम बढ़ाए जाते हैं।

ट्रंप ने दी थी धमकी

ट्रंप ने कई बार BRICS देशों की ओर से डी-डॉलराइजेशन (डॉलर का विकल्प खोजने) की कोशिश होने पर 100-150% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। हालांकि, उनके इस दावे के बाद, कि उनके फैसले से BRICS देश टूटने लगे हैं, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डिसिल्वा ने कहा कि BRICS देश अमेरिकी डॉलर के असर को खत्म करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।

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