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अमेरिका की नई ट्रेड इनवेस्टिगेशन: भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ का खतरा

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 12, 2026, 10:57 IST

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सारांश

US trade investigation: अगर जांच में यह साबित होता है कि कुछ देश अनुचित तरीके से व्यापार कर रहे हैं, तो अमेरिका उनके सामान पर नए टैरिफ लगा सकता है। अमेरिकी सरकार का लक्ष्य है कि गर्मियों तक इस जांच के आधार पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।

Donald trump

अमेरिका एक और जांच भी शुरू करने वाला है, जो जबरन मजदूरी से बने सामान पर होगी।

भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए टैरिफ का टेंशन फिर से लौट सकता है। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार ने 16 देशों के खिलाफ एक नई ट्रेड इनवेस्टिगेशन शुरू की है। इस लिस्ट में भारत भी शामिल है। अमेरिका का कहना है कि कुछ देश जरूरत से ज्यादा औद्योगिक उत्पादन कर रहे हैं और सस्ता सामान दुनिया के बाजार में भेज रहे हैं। इससे अमेरिकी उद्योग को नुकसान हो रहा है। इसलिए अमेरिका यह जांच कर रहा है कि क्या इन देशों पर नए टैरिफ लगाए जाएं।

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यह जांच अमेरिका के कानून Section 301 of the Trade Act of 1974 के तहत हो रही है। अगर जांच में यह साबित होता है कि कुछ देश अनुचित तरीके से व्यापार कर रहे हैं, तो अमेरिका उनके सामान पर नए टैरिफ लगा सकता है। अमेरिकी सरकार का लक्ष्य है कि गर्मियों तक इस जांच के आधार पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।

जांच में ये 16 देश हैं शामिल

इस जांच में कुल 16 बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स शामिल हैं। इनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, साउथ कोरिया और मेक्सिको जैसे बड़े देश शामिल हैं। इसके अलावा ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी जांच के दायरे में हैं। अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर कनाडा इस लिस्ट में शामिल नहीं है।

अमेरिका के ट्रेड प्रतिनिधि Jamieson Greer ने कहा कि जांच में यह देखा जाएगा कि कहीं कुछ देशों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन तो नहीं हो रहा। इसके लिए अमेरिका कई चीजें देखेगा, जैसे किसी देश का बहुत ज्यादा ट्रेड सरप्लस होना, सरकार द्वारा उद्योगों को सब्सिडी देना, मजदूरी कम रखना या सरकारी कंपनियों को फायदा पहुंचाना।

60 से ज्यादा देशों पर होगी एक और जांच

अमेरिका एक और जांच भी शुरू करने वाला है, जो जबरन मजदूरी से बने सामान पर होगी। यह जांच 60 से ज्यादा देशों को कवर कर सकती है। अमेरिका पहले भी चीन के शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े उत्पादों पर प्रतिबंध लगा चुका है, जो Uyghur Forced Labor Protection Act के तहत लागू किया गया था।

यह पूरी प्रक्रिया इसलिए शुरू की गई है क्योंकि हाल ही में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को अवैध बता दिया था। उसके बाद सरकार ने अस्थायी तौर पर 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लगा दिया था, जो जुलाई में खत्म होने वाला है।

अब नई जांच का मकसद यह है कि अमेरिका के पास टैरिफ लगाने का एक मजबूत कानूनी आधार हो। ट्रंप का मानना है कि टैरिफ लगाकर अमेरिका अपना ट्रेड घाटा कम कर सकता है और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बचा सकता है। इस जांच पर जनता और कंपनियों से 15 अप्रैल तक सुझाव मांगे जाएंगे और लगभग 5 मई के आसपास एक सार्वजनिक सुनवाई भी होगी।

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