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4 min read | अपडेटेड February 19, 2026, 17:13 IST
सारांश
DGCA के प्रस्तावित नियमों के तहत हल्के मामलों में यात्रियों पर 3 महीने तक का बैन लगाया जा सकता है। शारीरिक दुर्व्यवहार के मामलों में यह बैन 6 महीने तक हो सकता है। वहीं, गंभीर हिंसा या कॉकपिट में घुसपैठ जैसे मामलों में कम से कम 2 साल या उससे भी ज्यादा समय के लिए, बिना किसी ऊपरी सीमा के, उड़ान पर रोक लगाई जा सकती है।

DGCA: इन नियमों के तहत गंभीर मामलों में यात्रियों के उड़ान पर लाइफटाइम बैन तक लगाया जा सकता है।
भारत के विमानन नियामक डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने हवाई यात्रियों के अनुशासनहीन व्यवहार पर लगाम लगाने के लिए कड़े नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इन नियमों के तहत गंभीर मामलों में यात्रियों के उड़ान पर लाइफटाइम बैन तक लगाया जा सकता है। DGCA ने साफ कहा है कि विमान और एयरपोर्ट पर हंगामे को लेकर अब “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।
DGCA के मुताबिक किसी एक भी अनुशासनहीन यात्री की वजह से उड़ान की सुरक्षा और संचालन खतरे में पड़ सकता है। ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है कि विमान, यात्रियों और संपत्ति की सुरक्षा के साथ-साथ विमान में अनुशासन बनाए रखने के लिए यह सख्ती जरूरी है।
नए नियमों के अनुसार अनुशासनहीन यात्री वह माना जाएगा जो क्रू मेंबर्स या एयरपोर्ट स्टाफ के निर्देशों का पालन नहीं करता, विमान या एयरपोर्ट परिसर में व्यवस्था और अनुशासन भंग करता है। DGCA ने सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के तहत यात्रियों की बदसलूकी को चार स्तरों में बांटा है।
प्रस्तावित नियमों के तहत हल्के मामलों में यात्रियों पर 3 महीने तक का बैन लगाया जा सकता है। शारीरिक दुर्व्यवहार के मामलों में यह बैन 6 महीने तक हो सकता है। वहीं, गंभीर हिंसा या कॉकपिट में घुसपैठ जैसे मामलों में कम से कम 2 साल या उससे भी ज्यादा समय के लिए, बिना किसी ऊपरी सीमा के, उड़ान पर रोक लगाई जा सकती है।
एयरलाइंस को यह अधिकार भी दिया जाएगा कि वे कुछ मामलों में तुरंत 30 दिन तक का बैन लगा सकें। इनमें विमान के अंदर धूम्रपान करना, क्रू द्वारा न परोसी गई शराब पीना, इमरजेंसी उपकरणों का गलत इस्तेमाल, नशे में हंगामा करना या बार-बार दूसरे यात्रियों को परेशान करना शामिल है। ऐसे मामलों में एयरलाइन को स्वतंत्र समिति के पास मामला भेजने की जरूरत नहीं होगी।
गंभीर मामलों की जांच के लिए एयरलाइंस को एक स्वतंत्र समिति बनानी होगी। इस समिति की अध्यक्षता एक रिटायर्ड जज करेंगे और इसमें दूसरी एयरलाइन का प्रतिनिधि और किसी उपभोक्ता या यात्री संगठन का सदस्य शामिल होगा। समिति को 45 दिनों के भीतर यह तय करना होगा कि यात्री दोषी है या नहीं और बैन कितने समय के लिए लगाया जाए। इस दौरान एयरलाइन अस्थायी तौर पर यात्री को उड़ान से रोक सकती है।
DGCA एक राष्ट्रीय स्तर की केंद्रीकृत “नो-फ्लाई लिस्ट” बनाने की भी योजना बना रहा है। इस लिस्ट में यात्री की पहचान, घटना का रिकॉर्ड और बैन की अवधि दर्ज होगी। यह जानकारी सभी एयरलाइंस के साथ साझा की जाएगी और एक बार नाम जुड़ने के बाद सभी एयरलाइंस उस यात्री पर बैन लागू करेंगी। हालांकि, यह सूची सार्वजनिक नहीं होगी।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने वाले यात्रियों पर पहले से लगे बैन की अवधि से दोगुना जुर्माना यानी लंबा प्रतिबंध लगाया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में Ministry of Home Affairs सीधे ऐसे लोगों की सूची दे सकता है, जिन्हें उड़ान भरने से रोका जाना है। ऐसे यात्री तब तक उड़ान नहीं भर पाएंगे, जब तक उन्हें सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता रहेगा।
लंबे समय के बैन के खिलाफ यात्री Ministry of Civil Aviation द्वारा गठित एक अपीलीय समिति में अपील कर सकते हैं। इस समिति की अध्यक्षता एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज करेंगे और उसका फैसला अंतिम होगा। इसके बाद केवल अदालत में ही जाने का विकल्प रहेगा।
इन नियमों में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस को अपने फ्लाइट क्रू, ग्राउंड स्टाफ और एयरपोर्ट कर्मियों को विशेष ट्रेनिंग देनी होगी, ताकि वे आक्रामक व्यवहार के शुरुआती संकेत पहचान सकें और हालात को बिगड़ने से पहले संभाल सकें। खासतौर पर उड़ान में देरी, ओवरबुकिंग या कैंसिलेशन के दौरान सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा, एयरलाइंस को चेक-इन, लाउंज और बोर्डिंग गेट पर संभावित परेशानी पैदा करने वाले यात्रियों की पहचान के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाना होगा और जरूरत पड़ने पर ऐसे यात्रियों को बोर्डिंग से रोकना भी अनिवार्य होगा। कुल मिलाकर, DGCA का यह प्रस्ताव हवाई यात्रा को ज्यादा सुरक्षित, अनुशासित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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