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4 min read | अपडेटेड March 23, 2026, 15:40 IST
सारांश
चीन ने फरवरी में करीब 470 टन चांदी खरीदी है, जो एक नया रिकॉर्ड है। इंडस्ट्रियल जरूरतों और निवेश के लिए चांदी की मांग बढ़ने से ग्लोबल मार्केट में सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है। अगर चीन की यह खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले समय में चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है।

चीन के चांदी इंपोर्ट में आई भारी तेजी से ग्लोबल मार्केट में सप्लाई पर दबाव बढ़ा।
ग्लोबल मार्केट में इन दिनों चांदी को लेकर एक बड़ी हलचल मची हुई है और इस हलचल के केंद्र में चीन है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के निवेशकों को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की शुरुआत में ही चीन ने चांदी की खरीदारी के मामले में पिछले 8 साल के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सिर्फ जनवरी और फरवरी के दो महीनों में ही चीन ने 790 टन से ज्यादा चांदी का आयात कर लिया है। अकेले फरवरी के महीने में करीब 470 टन चांदी खरीदी गई है, जो इस महीने के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। चीन की इस आक्रामक खरीदारी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मचा दी है और सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
चीन में चांदी की इस बेतहाशा मांग के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ी वजह वहां का तेजी से बढ़ता इंडस्ट्रियल सेक्टर है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चांदी का इस्तेमाल पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है। ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ते कदमों की वजह से सोलर पैनल की मैन्युफैक्चरिंग में चांदी की भारी खपत हो रही है। इसके अलावा, सोने की आसमान छूती कीमतों की वजह से निवेशक अब चांदी को एक सस्ते और बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। चीन के लोग अब निवेश के लिए चांदी को एक सुरक्षित जरिया मान रहे हैं, जिससे इसकी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है।
चीन द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में चांदी बटोरने का सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर दिखने लगा है। इंटरनेशनल मार्केट में चांदी की सप्लाई लगातार कम हो रही है क्योंकि एक्सचेंजों के पास पहले से ही स्टॉक काफी सीमित था। अब चीन की इस भारी खरीदारी ने स्टॉक पर और ज्यादा दबाव बना दिया है। यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमतें अब इंटरनेशनल बेंचमार्क से भी ऊपर जाने लगी हैं। अगर डिमांड और सप्लाई का यह अंतर इसी तरह बना रहता है, तो आने वाले समय में चांदी की कीमतों में एक बहुत बड़ा और तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
भारत दुनिया में चांदी का एक बहुत बड़ा उपभोक्ता है, इसलिए चीन की इस चाल का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ेगा। अगर इंटरनेशनल मार्केट में चांदी महंगी होती है, तो भारत में भी इसके दाम तेजी से बढ़ेंगे। इससे न सिर्फ ज्वैलरी महंगी होगी बल्कि इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाली चांदी की लागत भी बढ़ जाएगी। भारतीय निवेशकों के लिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है क्योंकि लॉन्ग टर्म में चांदी का ट्रेंड काफी पॉजिटिव नजर आ रहा है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में मार्केट में उतार-चढ़ाव रहने की पूरी संभावना है, इसलिए निवेश करने से पहले रिस्क को समझना बहुत जरूरी है। भारत में चांदी की बढ़ती कीमतें मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को भी प्रभावित कर सकती हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी अब सिर्फ एक साधारण मेटल नहीं रह गई है, बल्कि यह एक स्ट्रैटेजिक एसेट बनती जा रही है। जिस तरह से चीन अपनी जरूरतों के लिए चांदी का भंडार जमा कर रहा है, उससे साफ है कि आने वाले समय में इसकी अहमियत और बढ़ने वाली है। ग्रीन एनर्जी और टेक सेक्टर की बढ़ती जरूरतों ने चांदी को एक कीमती एसेट बना दिया है। अगर चीन इसी रफ्तार से खरीदारी जारी रखता है, तो दुनिया भर में चांदी की किल्लत हो सकती है, जिससे कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।
**(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।) **
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