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  1. देश में ही बनेगा EV से डिफेंस तक इस्तेमाल होने वाला रेयर अर्थ मैग्नेट, ₹7280 करोड़ की योजना को मंजूरी

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देश में ही बनेगा EV से डिफेंस तक इस्तेमाल होने वाला रेयर अर्थ मैग्नेट, ₹7280 करोड़ की योजना को मंजूरी

Upstox

3 min read | अपडेटेड November 26, 2025, 19:07 IST

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सारांश

Rare Earth Permanent Magnets: अभी भारत REPM की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। लेकिन भारत में EVs, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग के कारण 2025 से 2030 के बीच REPM के इस्तेमाल के दोगुना होने की उम्मीद है।

Ashwini Vaishnaw

सरकार का कहना है कि इससे भारत आत्मनिर्भर बनेगा और दुनिया के REPM बाजार में अहम जगह हासिल करेगा।

केंद्र सरकार ने 7280 करोड़ रुपये की एक नई योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य भारत में सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) का उत्पादन बढ़ाना है। यह ऐसा पहला कार्यक्रम है, जो देश में REPM बनाने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करेगा। सरकार का कहना है कि इससे भारत आत्मनिर्भर बनेगा और दुनिया के REPM बाजार में अहम जगह हासिल करेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "कैबिनेट ने परमानेंट मैग्नेट बनाने में आत्मनिर्भरता पाने के लिए अपनी तरह की पहली रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) स्कीम को मंजूरी दी।"

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  • ₹7,280 Cr इंसेंटिव | 7 साल का समय
  • एंड-टू-एंड वैल्यू चेन: ऑक्साइड → मेटल → एलॉय → तैयार REPMs
  • कुल कैपेसिटी: 6,000 MTPA (हर एक 1,200 MTPA की 5 यूनिट)
  • इम्पोर्ट पर निर्भरता कम होगी और भारत REPM सप्लाई चेन में एक अहम ग्लोबल प्लेयर बनेगा।

क्या है इस योजना का उद्देश्य

सरकार इस योजना के तहत देश में 6,000 MTPA (Metric Tons Per Annum) क्षमता वाली REPM मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करेगी। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में बहुत जरूरी होते हैं। ये दुनिया के सबसे मजबूत मैग्नेट्स में आते हैं और हाई-टेक मशीनों में इनका खास इस्तेमाल होता है।

अभी भारत REPM की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। लेकिन भारत में EVs, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग के कारण 2025 से 2030 के बीच REPM के इस्तेमाल के दोगुना होने की उम्मीद है। ऐसे में यह योजना देश में पहली बार पूरी तरह से इंटीग्रेटेड REPM उत्पादन सुविधाएं स्थापित करेगी, जहां रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर फाइनल मैग्नेट बनाने तक सारी प्रक्रिया देश में ही होगी।

कैसे होगा बजट का इस्तेमाल?

इस योजना का कुल बजट 7280 करोड़ रुपये है। इसमें से 6450 करोड़ रुपये 5 साल तक कंपनियों को बिक्री-आधारित प्रोत्साहन के रूप में दिए जाएंगे, और 750 करोड़ रुपये शुरुआती प्लांट लगाने के लिए कैपिटल सब्सिडी के रूप में। सरकार वैश्विक स्तर पर प्रतियोगी बोली के जरिए कुल 5 कंपनियों को चुनने की योजना बना रही है, जिनमें से हर कंपनी को अधिकतम 1200 MTPA की उत्पादन क्षमता दी जाएगी।

योजना की कुल अवधि 7 साल होगी। पहले दो साल प्लांट सेट करने के लिए और अगले 5 साल उत्पादन और इंसेंटिव के लिए। यह कदम भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने और 2070 तक Net Zero लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है। यह सरकार के Viksit Bharat के विजन को मजबूत करने वाला फैसला है।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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