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5 min read | अपडेटेड January 14, 2026, 14:37 IST
सारांश
Budget 2026: आने वाले साल 2026 और बजट FY27 को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियां करीब दो साल बाद मोबाइल टैरिफ में लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे FY27 में सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ दोगुनी से ज्यादा हो सकती है।

Budget 2026: बजट को लेकर इंडस्ट्री बॉडी COAI ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रखी है।
Starlink की एंट्री से प्रीमियम सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, जहां अभी Reliance Jio और Bharti Airtel का दबदबा है। सरकार Vodafone Idea (VIL) और BSNL को सपोर्ट देने की कोशिश भी कर रही है, ताकि टेलीकॉम मार्केट सिर्फ दो कंपनियों तक सीमित न रह जाए और प्रतिस्पर्धा बनी रहे। इसका मकसद कंज्यूमर के हितों की रक्षा करना है।
इंडस्ट्री बॉडी Cellular Operators' Association of India (COAI) के डायरेक्टर जनरल एसपी कोचर के मुताबिक, 2025 में सेक्टर में मजबूती और आत्मनिर्भरता पर खास फोकस रहा। Make in India और PLI स्कीम के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला, जिससे टेलीकॉम प्रोडक्ट्स में करीब 60 फीसदी तक इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन संभव हुआ। पिछले 5 साल में भारत से टेलीकॉम एक्सपोर्ट 72 फीसदी बढ़कर FY21 के ₹10,000 करोड़ से FY25 में ₹18,406 करोड़ तक पहुंच गया।
HFCL के मैनेजिंग डायरेक्टर महेंद्र नाहटा ने कहा कि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां नेटवर्क की कैपेसिटी, डेंसिटी और तेजी से डिप्लॉयमेंट ही कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त तय करेगी। भारत में 5 लाख से ज्यादा 5G बेस स्टेशन लगाए जा चुके हैं, जिससे 85 फीसदी आबादी कवर हो चुकी है। वहीं, 2025 की दूसरी तिमाही में वायरलेस डेटा यूसेज 65,009 पेटाबाइट तक पहुंच गया, जिससे फाइबराइजेशन अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है।
HFCL भारत की पहली कंपनी बन गई है जिसने गीगा-स्पीड वायरलेस ब्रॉडबैंड के लिए 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस इक्विपमेंट को डिजाइन, डेवलप और मैन्युफैक्चर किया है। GX Group के CEO पारितोष प्रजापति के मुताबिक, 2025 में डिमांड की मजबूती, पॉलिसी कंटिन्युटी और मैन्युफैक्चरिंग स्केल ने इंडस्ट्री की उम्मीदों को पूरा किया।
आने वाले साल 2026 और बजट FY27 को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियां करीब दो साल बाद मोबाइल टैरिफ में लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे FY27 में सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ दोगुनी से ज्यादा हो सकती है। Jefferies की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में Reliance Jio का संभावित IPO सेक्टर की वैल्यूएशन को सपोर्ट कर सकता है और टैरिफ बढ़ोतरी का रास्ता आसान बना सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2026 में करीब 15 फीसदी टैरिफ हाइक की संभावना है, जिससे FY27 में ARPU यानी प्रति यूजर औसत कमाई में करीब 14 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, टैरिफ बढ़ने की वजह से नए सब्सक्राइबर जुड़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है। Jio की तरफ से 10 से 20 फीसदी तक टैरिफ बढ़ाने से उसकी वैल्यूएशन Bharti Airtel के करीब आ सकती है।
बजट को लेकर इंडस्ट्री बॉडी COAI ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रखी है। COAI ने लाइसेंस फीस को मौजूदा 3 फीसदी से घटाकर 0.5 से 1 फीसदी करने की मांग की है, ताकि टेलीकॉम कंपनियों पर वित्तीय बोझ कम हो सके। इसके अलावा Digital Bharat Nidhi में योगदान को तब तक रोकने की मांग की गई है, जब तक मौजूदा फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं हो जाता।
COAI का कहना है कि लाइसेंस फीस और Digital Bharat Nidhi में योगदान मिलकर AGR का बड़ा हिस्सा ले लेते हैं, जो टेलीकॉम कंपनियों के लिए भारी बोझ बन चुका है। संगठन का मानना है कि फीस में कटौती से सेक्टर को विस्तार और अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी को तेजी से रोलआउट करने में मदद मिलेगी, जिससे ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
GST से जुड़े मुद्दों पर भी COAI ने राहत की मांग की है। संगठन ने लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज और स्पेक्ट्रम पेमेंट पर GST से छूट या फिर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत GST की दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने का सुझाव दिया है। इससे सरकार के रेवेन्यू पर असर डाले बिना टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
इसके साथ ही COAI ने यह भी मांग की है कि मौजूदा इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का इस्तेमाल रिवर्स चार्ज के तहत GST भुगतान के लिए करने की अनुमति दी जाए, ताकि कंपनियों की कैश आउटफ्लो कम हो और जमा ITC का सही इस्तेमाल हो सके।
COAI का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर अब सिर्फ एक अलग इंडस्ट्री नहीं, बल्कि बाकी सभी सेक्टर्स के लिए एक ‘हॉरिजॉन्टल वैल्यू-एडेड एनेबलर’ बन चुका है। ऐसे में स्पेक्ट्रम की कीमत और उसके आवंटन के मॉडल में भी नए सिरे से बदलाव करने की जरूरत है।
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