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  1. AI में होना है खरबों डॉलर का इन्वेस्टमेंट, कैसे करें खुद को AI के साथ कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार?

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AI में होना है खरबों डॉलर का इन्वेस्टमेंट, कैसे करें खुद को AI के साथ कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड March 11, 2026, 19:53 IST

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सारांश

हुआंग ने हाल ही में प्रकाशित एक ब्लॉग में कहा कि एआई अब केवल एक साधारण एप्लिकेशन या एकल मॉडल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसे बिजली और इंटरनेट की तरह एक आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखना चाहिए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

एआई से इतिहास का सबसे बड़ा अवसंरचना निर्माण शुरू, खरबों डॉलर निवेश की जरूरत: जेनसन हुआंग

अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया के फाउंडर एंड चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) जेनसन हुआंग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मानव इतिहास में ‘सबसे बड़े इंफ्रा बिल्डआउट’ को गति दे रही है, जिसके लिए खरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी और कुशल श्रमिकों की भारी मांग पैदा होगी। हुआंग ने हाल ही में प्रकाशित एक ब्लॉग में कहा कि एआई अब केवल एक साधारण एप्लिकेशन या एकल मॉडल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसे बिजली और इंटरनेट की तरह एक आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लिखा, ‘हमने अभी इस निर्माण की शुरुआत ही की है। अब तक इसमें कुछ सौ अरब डॉलर का निवेश हुआ है, जबकि अब भी खरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाना बाकी है। दुनिया भर में अभूतपूर्व स्तर पर चिप कारखाने, कंप्यूटर ‘असेंबल’ संयंत्र और एआई कारखाने बनाए जा रहे हैं। यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा इंफ्रा बिल्डआउट बनता जा रहा है।’

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हुआंग ने एआई का ‘पांच परतों वाले ढांचे’ के रूप जिक्र किया जिसमें एनर्जी, चिप, इंफ्रास्ट्रक्चर, मॉडल और एप्लिकेशन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एनर्जी इसकी आधारभूत परत है और यह इस बात की प्रमुख सीमा तय करती है कि कोई सिस्टम कितनी इंटेलिजेंस पैदा कर सकती है। एनवीडिया प्रमुख ने कहा कि यह विशाल टेक बदलाव पारंपरिक टेक सेक्टर के बाहर भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगा।

उन्होंने कहा, ‘इस निर्माण को समर्थन देने के लिए श्रम की जरूरत बहुत अधिक है। एआई कारखानों को बिजली मिस्त्री, प्लंबर, पाइप फिट करने वाले कारीगर, इस्पात कर्मी, नेटवर्क टेकनीशियन, संयोजन करने वाले कर्मचारी और संचालक चाहिए होंगे। ये सभी कुशल और अच्छे वेतन वाली नौकरियां हैं, जिनकी अभी कमी है। इस बदलाव में भाग लेने के लिए कंप्यूटर साइंस में पीएचडी करने की आवश्यकता नहीं है।’ हुआंग ने बताया कि एआई ने पारंपरिक कंप्यूटिंग मॉडल को बदल दिया है, जो पहले संरचित आंकड़ों और सटीक प्रश्नों पर आधारित था। उन्होंने कहा, ‘अब हर उत्तर नया होता है। हर जवाब आपके संदर्भ पर निर्भर करता है। यह ऐसा सॉफ्टवेयर नहीं है जो केवल स्टोर्ड इंस्ट्रक्शनों को पेश करे बल्कि यह डिमांड के हिसाब से तर्क करके इंटेलिजेंस देता है।’

ब्लॉग में यह भी कहा गया कि पिछले साल एआई ने एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है क्योंकि मॉडल बड़े पैमाने पर अत्यधिक उपयोगी हो गए हैं और दवा खोज, लॉजिस्टिक, कस्टमर सर्विस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और मैनुफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में वास्तविक आर्थिक मूल्य उत्पन्न कर रहे हैं। हुआंग ने मुक्त स्रोत मॉडल, विशेष रूप से डीपसीक-आर1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे एप्लिकेशन लेवल पर अपनाने की स्पीड तेज हुई है जिसके परिणामस्वरूप इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सहित पूरी कंप्यूटिंग सिस्टम में मांग बढ़ रही है।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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