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4 min read | अपडेटेड September 29, 2026, 19:03 IST
सारांश
नए महीने की शुरुआत के साथ ही 1 अक्टूबर 2026 से 6 महत्वपूर्ण रूल्स बदलने वाले हैं। LPG सब्सिडी का फायदा पाने के लिए बायोमेट्रिक आधार जरूरी कर दिया गया है। इसके अलावा बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट पर अब 125 रुपये फीस लगेगी।

1 अक्टूबर 2026 से LPG सब्सिडी, बैंक एफडी और यूपीआई से जुड़े 6 अहम नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं।
हर महीने की पहली तारीख की तरह इस बार भी 1 अक्टूबर 2026 से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, बैंक खातों और रसोई के बजट से जुड़े 6 अहम रूल्स में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर आपकी जेब, परिवार से जुड़े कामों और बैंकिंग लेनदेन पर पड़ने वाला है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने अलग अलग सेक्टर्स में ट्रांसपेरेंसी लाने और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ये नए निर्देश दिए हैं। इनमें LPG बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन, बैंक FD के नियम, जन्म मृत्यु रजिस्ट्रेशन, यूपीआई पेमेंट्स, बच्चों के आधार अपडेट और एनआरआई प्रॉपर्टी टीडीएस से जुड़े रूल्स शामिल हैं।
1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर का फायदा लेने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन यानी बीएए कराना जरूरी हो जाएगा। जिन ग्राहकों ने अभी तक यह प्रोसेस पूरा नहीं किया है, उन्हें इसे जल्द से जल्द कराना होगा। अगर कोई ग्राहक यह ऑथेंटिकेशन नहीं कराता है, तो उसके सिलेंडर की सप्लाई बंद नहीं की जाएगी, लेकिन उसे सिलेंडर मौजूदा बाजार भाव पर खरीदना पड़ेगा। यानी उसे सब्सिडी का फायदा नहीं मिल सकेगा। सरकार का मकसद घरेलू LPG के गलत इस्तेमाल को रोकना और सही परिवारों तक सब्सिडी पहुंचाना है। 19 सितंबर 2026 तक लगभग 89.9% एक्टिव LPG ग्राहक यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बल्क डिपॉजिट को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो 1 अक्टूबर से लागू हो रहे हैं। अब बैंकों में 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा, जबकि पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बैंक अपनी जरूरत के हिसाब से बल्क एफडी पर अलग ब्याज दर तय कर सकेंगे। इसके साथ ही बैंकों को हर वर्किंग डे सुबह 10 बजे तक अपनी नई ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी। आरबीआई ने इसके लिए 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया है, जिसका मतलब है कि सुबह 10:10 बजे तक नई दरें वेबसाइट पर दिखना अनिवार्य होगा।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम 2026 के प्रावधान भी 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो रहे हैं। अब जन्म या मृत्यु का देर से रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया काफी सख्त हो जाएगी। अगर रजिस्ट्रेशन में 2 साल से ज्यादा की देरी होती है, तो प्रथम कैटेगरी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना जरूरी होगा। वहीं 1 से 2 साल के अंदर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी पड़ेगी। अधिकारी जानकारी की जांच करने के बाद तय फीस जमा होने पर ही रजिस्ट्रेशन की इजाजत देंगे। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने गजट नोटिफिकेशन के जरिए यह जानकारी दी है।
15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ कारोबारी यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि इस शुल्क का बोझ सीधे आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा और कारोबारियों से इसकी वसूली की अनुमति नहीं होगी। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P पेमेंट और 2,000 रुपये तक के कई P2M लेनदेन को इस दायरे से बाहर रखा गया है। इसका मुख्य असर कारोबारियों की लागत पर पड़ सकता है, लेकिन आम यूपीआई यूजर्स को कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा।
इसके अलावा बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक आधार अपडेट की मुफ्त सुविधा 30 सितंबर को खत्म हो रही है। 1 अक्टूबर से बच्चों के फिंगरप्रिंट और फोटो अपडेट कराने के लिए 125 रुपये की फीस देनी होगी। अगर आपके घर में भी किसी बच्चे का बायोमेट्रिक अपडेट बाकी है, तो उसे 30 सितंबर से पहले ही मुफ्त में पूरा करा लेना समझदारी होगी।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी ने एनआरआई से घर, जमीन या दूसरी प्रॉपर्टी खरीदने पर टीडीएस के नियमों में बदलाव किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। अब किसी निवासी व्यक्ति या HUF को एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर अलग से टैन यानी टीएएन लेने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जगह पैन कार्ड के आधार पर चालान सह विवरण के जरिए TDS की जानकारी जमा की जा सकेगी। हालांकि टैक्स काटने की जिम्मेदारी पहले की तरह बनी रहेगी।
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