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4 min read | अपडेटेड July 08, 2026, 15:13 IST
सारांश
फ्रांस में भीषण गर्मी और लू के चलते एयर कंडीशनर (AC) की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है। बरसों से एसी का विरोध करने वाले इस देश में लोग अब इसे खरीदने के लिए दुकानों के बाहर लंबी लाइनें लगा रहे हैं और कई जगहों पर मारपीट की नौबत आ गई है।

फ्रांस के पेरिस में गर्मी से बचने के लिए दुकानों पर एसी खरीदने पहुंचे लोग।
यूरोप के खूबसूरत देश फ्रांस में इन दिनों भीषण गर्मी और भयंकर लू ने लोगों का जीना बेहाल कर दिया है। इस जानलेवा गर्मी के कारण फ्रांस के लोगों की सोच में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो देश बरसों से एयर कंडीशनर यानी AC का विरोध करता आ रहा था, वहां अब लोग अपने फ्यूचर को इस भीषण गर्मी से बचाने के लिए AC खरीदने को मजबूर हैं और बाजारों में भारी अफरा-तफरी मची हुई है। बढ़ते तापमान के चलते स्कूलों को बंद करना पड़ रहा है और घरों में कूलिंग सिस्टम न होने के कारण लोगों की जान पर बन आई है। कभी सांस्कृतिक बहस का हिस्सा रहा AC अब फ्रांस में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है और दुकानों के बाहर इसे खरीदने के लिए लोग आपस में भिड़ रहे हैं।
फ्रांस के पेरिस इलाके में स्थित लिडल स्टोर्स के बाहर लोग सुबह से ही लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं ताकि स्टॉक खत्म होने से पहले वे अपने लिए एक AC खरीद सकें। पेरिस के एक बाहरी इलाके ओबेरविलीयर्स में तो हालात इतने खराब हो गए कि AC खरीदने आई भीड़ के दबाव से दुकान के दरवाजे टूट गए और ग्राहकों के बीच आपस में मारपीट शुरू हो गई। वहां मौजूद एक ग्राहक ने स्थानीय अखबार को बताया कि उसने लोगों को एक-दूसरे के पैरों तले कुचले जाते देखा। भीषण गर्मी की इस नई लहर ने लोगों को इस कदर परेशान कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर AC घर ले जाना चाहते हैं।
फ्रांस के इतिहास में AC को कभी भी अच्छा नहीं माना गया। दशकों से यहां के लोग AC को शोर करने वाला, दिखने में बदसूरत और सबसे बढ़कर एक अमेरिकी दिखावा मानते आए हैं। लोगों के बीच यह पुरानी धारणा भी रही है कि AC की हवा में सांस लेने से लोग बीमार पड़ जाते हैं। इसी वजह से फ्रांस की इमारतों को पारंपरिक रूप से मोटी पत्थर की दीवारों और बंद होने वाली खिड़कियों के साथ बनाया जाता था, जो ठंडी गर्मियों में घरों को ठंडा रखने का काम करती थीं। इसके अलावा पेरिस की उन्नीसवीं सदी की ऐतिहासिक इमारतों पर AC लगाने के नियम बहुत कड़े हैं, जिसके लिए पूरी सोसायटी की मंजूरी लेनी पड़ती है। वर्तमान में फ्रांस के केवल 24% घरों में ही AC लगा है, जो दो साल पहले 18% था। यह आंकड़ा पड़ोसी देश इटली से बहुत कम है, जहां 50% घरों में AC है। फ्रांस के केवल 7% स्कूलों में AC है, जिसके कारण पिछले हफ्ते तापमान असहनीय होने पर हजारों स्कूलों को बंद करना पड़ा था। जून की गर्मी के दौरान छह दिनों में दो हजार से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं।
फ्रांस में साल 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले AC का मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। मरीन ले पेन की दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी ने हर स्कूल और अस्पताल में AC लगाने के लिए एक नेशनल 'प्लान क्लाइम' का प्रस्ताव रखा है। इस पार्टी ने 30 से 40 मिलियन परिवारों को बिना ब्याज के 23 अरब डॉलर का सरकारी लोन देने की भी मांग की है ताकि लोग अपने घरों में AC लगवा सकें। दूसरी तरफ वामपंथी पार्टियां इस पर बंटी हुई हैं। ग्रीन पार्टी की नेता मरीन टोंडेलियर ने माना है कि अब कुछ स्कूलों और अस्पतालों में कूलिंग की जरूरत है। हालांकि हार्ड-लेफ्ट नेता जीन-ल्यूक मेलेनचोन ने बड़े पैमाने पर AC लगाने का विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि हर जगह AC लगाने से पर्यावरण को और अधिक नुकसान पहुंचेगा। सरकार ने इस बीच अस्पतालों के लिए इमरजेंसी AC को मंजूरी दी है, लेकिन उनका मुख्य फोकस घरों के इंसुलेशन और बेहतर डिजाइन पर है।
AC का विरोध करने वालों का तर्क है कि इससे बिजली की खपत बढ़ेगी जिससे क्लाइमेट चेंज को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन समर्थकों का कहना है कि फ्रांस का बिजली सिस्टम दुनिया में सबसे साफ है, क्योंकि यहां की 95 पर्सेंट बिजली लो-कार्बन सोर्सेज से आती है, जिसमें दो-तिहाई हिस्सा न्यूक्लियर पावर का है। इसका मतलब है कि फ्रांस में AC चलाने से पोलैंड या जर्मनी जैसे देशों के मुकाबले बहुत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। हालांकि एक्सपर्ट्स ने यह भी चेतावनी दी है कि AC से निकलने वाली गर्म हवा शहरों के तापमान को और बढ़ा सकती है, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौड़ी हो जाएगी। लेकिन आम जनता के लिए अब AC कोई फैशन नहीं बल्कि एक जरूरत बन चुका है।
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