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  1. बाजार में आई भारी बिकवाली का SIP में पैसा लगाने वालों के लिए क्या है मायने? एक्सपर्ट ने दूर किया कंफ्यूजन

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बाजार में आई भारी बिकवाली का SIP में पैसा लगाने वालों के लिए क्या है मायने? एक्सपर्ट ने दूर किया कंफ्यूजन

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 02, 2026, 15:05 IST

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सारांश

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और सेंसेक्स में 2,743 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह डरने का नहीं, बल्कि 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा उठाने का समय है। अनुशासन बनाए रखना ही वेल्थ क्रिएशन की चाबी है।

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बाजार की अस्थिरता के बीच अनुशासित निवेश ही लंबी अवधि में मोटा मुनाफा दिलाता है।

आज भारतीय शेयर बाजार में आया बड़ा क्रैश निवेशकों के लिए एक सबक की तरह है। सेंसेक्स 2,743 पॉइंट तक टूट गया और निफ्टी में भी 2 पर्सेंट की भारी गिरावट देखी गई। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर फैला दिया है। ऐसे समय में अक्सर निवेशक घबराकर अपनी एसआईपी (SIP) रोक देते हैं या घाटे में पैसा निकाल लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं।

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रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का असली फायदा

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर श्वेता शास्त्री का कहना है कि जब युद्ध या तनाव के कारण मार्केट गिरता है, तो आपकी फिक्स्ड मंथली एसआईपी की रकम कम एनएवी (NAV) पर म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स खरीदती है। इसे 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' कहा जाता है। जब बाजार वापस पटरी पर लौटता है, तो यही एक्स्ट्रा यूनिट्स आपकी वेल्थ क्रिएशन की रफ्तार को कई गुना बढ़ा देती हैं। उनके मुताबिक, इन कठिन समय में भविष्य की भविष्यवाणी करने के बजाय निवेश में अनुशासन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।

मार्केट की अस्थिरता केवल आपके धैर्य की परीक्षा लेती है। कंपाउंडिंग यानी चक्रवर्ती ब्याज का जादू तभी चलता है जब आप अपने पैसे को बिना रुके लंबे समय तक निवेशित रहने दें। श्वेता शास्त्री बताती हैं कि अगर आप गिरावट के डर से एसआईपी रोक देते हैं, तो आप कंपाउंडिंग की चेन को तोड़ देते हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव अस्थाई होते हैं, लेकिन अनुशासन से मिलने वाला रिटर्न स्थाई होता है। निवेश की लागत कम करने का इससे बेहतर मौका और कोई नहीं हो सकता।

रिस्क प्रोफाइल और एसेट एलोकेशन

निवेश करने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि आप बाजार के कितने उतार-चढ़ाव को बिना घबराए झेल सकते हैं। इसे ही 'रिस्क प्रोफाइल' कहा जाता है। अगर आप ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं झेल सकते, तो आपका पोर्टफोलियो बहुत ज्यादा एग्रेसिव नहीं होना चाहिए। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ-साथ डेट और सोने (Gold) जैसे एसेट्स को भी शामिल करना चाहिए। सोना संकट के समय एक 'हेज' यानी सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है।

वोलेटिलिटी से निपटने के एक्सपर्ट टिप्स

मार्केट की इस हलचल को मैनेज करने के लिए एक्सपर्ट्स ने कुछ खास सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, अपने एसेट एलोकेशन को अपनी रिस्क झेलने की क्षमता के अनुसार ही रखें। पैनिक में आकर कभी भी एसआईपी बंद न करें। दूसरा, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक अलग 'इमरजेंसी फंड' जरूर रखें ताकि आपको अपनी इन्वेस्टमेंट को बीच में न तोड़ना पड़े। याद रखें, जब बाजार स्थिर होगा, तो वही निवेशक फायदे में रहेंगे जिन्होंने अनुशासन बनाए रखा और अपनी रणनीति पर टिके रहे।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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