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Code on Social Security 2020: काम पर आने या जाने के दौरान हुई दुर्घटना, तो क्या परिवार को मिलेगा मुआवजा? क्या कहते हैं नए नियम

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड November 25, 2025, 13:05 IST

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सारांश

भारत में मौजूद 9 अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी कानूनों को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया गया है, जिसका नाम कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) है। इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर तरह के कामगार चाहे वे संगठित सेक्टर में हों, असंगठित सेक्टर में, या फिर गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर (जैसे Swiggy, Uber, Zomato), सभी को सोशल सिक्योरिटी मिले।

Code on Social Security

Code on Social Security: भारत में मौजूद 9 अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी कानूनों को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया गया है।

Code on Social Security 2020: भारत सरकार ने हाल ही में सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 की घोषणा की है, जिसके तहत कर्मचारियों के लिए कई तरह की सुविधाओं की घोषणा की है। इस नए कानून में यह भी कहा गया है कि अब काम में आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं पर भी सुरक्षा और मुआवजे का अधिकार मिलेगा। पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को भी कानून में “वर्कर” की तरह पहचान दी गई है और उनके लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा।
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बता दें कि भारत में मौजूद 9 अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी कानूनों को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया गया है, जिसका नाम कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) है। इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर तरह के कामगार चाहे वे संगठित सेक्टर में हों, असंगठित सेक्टर में, या फिर गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर (जैसे Swiggy, Uber, Zomato), सभी को सोशल सिक्योरिटी मिले।

नए कानून में क्या कहा गया है?

Social Security Code, 2020 में बड़ा बदलाव किया गया है। अब अगर कर्मचारी को ऑफिस आने या ऑफिस से घर जाते समय कोई दुर्घटना हो जाती है, तो उसे “रोजगार के दौरान हुई दुर्घटना” (in the course of employment) माना जाएगा।

बता दें कि इसके पहले कानून के तहत अगर कोई कर्मचारी घर से ऑफिस जाते समय या ऑफिस से घर लौटते समय किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता था, तो उसे “काम से जुड़ी दुर्घटना” नहीं माना जाता था। इसलिए मुआवजा या ESIC का लाभ नहीं मिलता था। नए कानून के बाद अब ऐसी दुर्घटना होने पर कर्मचारी को मुआवजा मिल सकता है, या उसके परिवार को ESIC के तहत लाभ दिए जाएंगे, जैसे मेडिकल सहायता, पेंशन।

सरकार का मानना है कि यह बदलाव उन लाखों कर्मचारियों को सुरक्षा देगा जो रोजाना लंबे सफर के साथ अपने कार्यस्थल तक पहुंचते हैं। खासकर मेट्रो शहरों में, जहां लंबी दूरी तय कर काम पर जाने की मजबूरी होती है, इस फैसले से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।

ESIC कवरेज का विस्तार

इस कोड के तहत EPFO (PF) और ESIC जैसी सुविधाओं का दायरा पूरे देश में बढ़ा दिया गया है ताकि अधिक से अधिक कर्मचारी इनका लाभ ले सकें। पहले ESIC की सुविधा केवल उन चुनिंदा इलाकों तक सीमित थी जिन्हें सरकार ने नोटिफाइड एरिया घोषित किया था। अब इस सीमा को पूरी तरह हटा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत ESIC कवरेज पूरे भारत में लागू कर दिया गया है।

ESIC का मतलब है Employees' State Insurance Corporation (कर्मचारी राज्य बीमा निगम)। यह भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा (Social Security) स्कीम है, जो कर्मचारियों और उनके परिवारों को कम पैसों में मेडिकल और आर्थिक सुरक्षा देती है।

इसके अलावा, जिन कंपनियों में 10 से कम कर्मचारी हैं, वे पहले ESIC के दायरे में नहीं आती थीं। अब अगर नियोक्ता और कर्मचारी दोनों सहमत हों, तो वे स्वेच्छा से ESIC से जुड़ सकते हैं। इससे छोटे प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा, खतरनाक या जानलेवा कामों के लिए, कम से कम 10 वर्कर की लिमिट हटा दी गई है। ऐसे काम में लगे एक वर्कर के लिए भी अब ESIC कवरेज अनिवार्य होगा। अगर एम्प्लॉयर चाहे तो प्लांटेशन वर्कर को भी ESIC के फायदे दिए जा सकते हैं।

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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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