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  1. Gold और Silver ETF के लिए नया नियम, अब घरेलू स्पॉट प्राइस से तय होगी कीमत

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Gold और Silver ETF के लिए नया नियम, अब घरेलू स्पॉट प्राइस से तय होगी कीमत

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड February 27, 2026, 14:08 IST

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सारांश

यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसके तहत अब म्यूचुअल फंड स्कीम्स में रखे गए फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की वैल्यू तय करने का तरीका बदल जाएगा। आइए समझते हैं यह निया नियम क्या है।

गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ

Gold और Silver ETF के लिए नया नियम

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने Gold और Silver ETF से जुड़े निवेशकों के लिए एक नया नियम जारी किया है। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसके तहत अब म्यूचुअल फंड स्कीम्स में रखे गए फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की वैल्यू तय करने का तरीका बदल जाएगा। आइए समझते हैं यह निया नियम क्या है।

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क्या है नया नियम

SEBI ने कहा है कि अब गोल्ड और सिल्वर की कीमत तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क की जगह भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा जारी किए गए स्पॉट प्राइस का इस्तेमाल किया जाएगा। ये वही स्पॉट कीमतें होंगी, जो फिजिकल डिलीवरी वाले गोल्ड और सिल्वर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट के लिए उपयोग होती हैं। यह फैसला गुरुवार, 26 फरवरी को जारी एक सर्कुलर में बताया गया।

नियामक ने यह भी साफ किया कि जो स्पॉट प्राइस इस्तेमाल की जाएगी, वह SEBI द्वारा तय किए गए स्पॉट पोलिंग गाइडलाइंस के अनुसार ही होनी चाहिए। यह फैसला म्यूचुअल फंड एडवाइजरी कमेटी के साथ चर्चा और बाजार के दूसरे हितधारकों से सार्वजनिक सलाह लेने के बाद किया गया है।

SEBI के अनुसार, चूंकि स्टॉक एक्सचेंज कड़े नियमों, पारदर्शिता और निगरानी के तहत काम करते हैं, इसलिए उनके द्वारा जारी की गई स्पॉट कीमतें घरेलू बाजार की सही स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाती हैं। इससे गोल्ड और सिल्वर की वैल्यू तय करने में एकरूपता आएगी और अलग-अलग फंड्स में कीमत तय करने के तरीके एक जैसे होंगे।

पहले कैसे तय होती थी गोल्ड और सिल्वर की कीमत

अभी तक गोल्ड और सिल्वर ETF में रखे गए फिजिकल मेटल की वैल्यू London Bullion Market Association (LBMA) की AM फिक्सिंग कीमतों के आधार पर तय की जाती है। इन अंतरराष्ट्रीय कीमतों को भारत के हिसाब से बदलने के लिए करेंसी कन्वर्जन, मेट्रिक कन्वर्जन, ट्रांसपोर्टेशन लागत, कस्टम ड्यूटी, टैक्स और अन्य शुल्क जोड़े जाते हैं। इसके अलावा एक अनुमानित प्रीमियम या डिस्काउंट भी शामिल किया जाता है।

नए नियम के तहत यह पूरी प्रक्रिया बदलेगी और सीधे घरेलू एक्सचेंज स्पॉट प्राइस के आधार पर वैल्यू तय होगी। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और यह नए SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026 के लागू होने के साथ जुड़ा हुआ है, जिन्हें इस साल की शुरुआत में अधिसूचित किया गया था।

नए नियम का क्या होगा असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर गोल्ड और सिल्वर ETF निवेशकों पर पड़ेगा। अब इन ETF की वैल्यू अंतरराष्ट्रीय कीमतों की बजाय घरेलू एक्सचेंज प्राइस पर आधारित होगी। इससे निवेशकों को NAV यानी नेट एसेट वैल्यू में ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी और अलग-अलग ETF स्कीम्स की तुलना करना आसान होगा।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही गोल्ड और सिल्वर ETF मेटल की कीमत को ट्रैक करते हैं, लेकिन वैल्यू तय करने के तरीके, ट्रैकिंग एफिशिएंसी और लिक्विडिटी के कारण अलग-अलग स्कीम्स के रिटर्न में थोड़ा फर्क आ सकता है। एक समान स्पॉट-आधारित वैल्यूएशन सिस्टम से इन फर्कों को कम करने में मदद मिलेगी। इस नए नियम को लागू करने की जिम्मेदारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की होगी।

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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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