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4 min read | अपडेटेड March 12, 2026, 18:56 IST
सारांश
PM-RAHAT योजना के तहत हर सड़क दुर्घटना पीड़ित को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का इलाज मुफ्त दिया जाएगा। यह इलाज दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक कवर किया जाएगा। यह सुविधा देश की किसी भी सड़क पर हुई दुर्घटना और मोटर वाहन से हुई दुर्घटना के सभी पीड़ितों के लिए उपलब्ध होगी।

PM-RAHAT: इस योजना को आधिकारिक रूप से 13 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया।
भारत सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को तुरंत और मुफ्त इलाज देने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इसका नाम Prime Minister – Road Accident Victims’ Hospitalisation and Assured Treatment (PM‑RAHAT) Scheme है। इस योजना को आधिकारिक रूप से 13 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सड़क दुर्घटना में घायल किसी भी व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में कैशलेस इलाज मिल सके, ताकि समय की कमी के कारण उसकी जान को खतरा न हो।
योजना के तहत हर सड़क दुर्घटना पीड़ित को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का इलाज मुफ्त दिया जाएगा। यह इलाज दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक कवर किया जाएगा। यह सुविधा देश की किसी भी सड़क पर हुई दुर्घटना और मोटर वाहन से हुई दुर्घटना के सभी पीड़ितों के लिए उपलब्ध होगी।
इसके अलावा योजना में यह भी तय किया गया है कि हर घायल व्यक्ति को अस्पताल में तुरंत स्टेबिलाइजेशन ट्रीटमेंट दिया जाएगा। अगर मामला गंभीर नहीं है तो 24 घंटे तक इलाज, और अगर स्थिति जानलेवा है तो 48 घंटे तक इलाज दिया जाएगा। यह इलाज निर्धारित अस्पतालों में दिया जाएगा और इसके लिए पुलिस की प्रतिक्रिया भी जरूरी होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कानूनी योजना है, इसलिए अगर किसी राज्य या केंद्र की दूसरी योजना से टकराव होता है तो PM-RAHAT योजना को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस योजना को लागू करने के लिए दो डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़ा गया है। पहला है Electronic Detailed Accident Report (eDAR), जिसका उपयोग पुलिस सड़क दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए करती है। दूसरा है Transaction Management System (TMS 2.0), जिसका उपयोग अस्पताल इलाज, क्लेम और भुगतान प्रक्रिया के लिए करते हैं। इन दोनों सिस्टम को जोड़कर पूरी प्रक्रिया डिजिटल बना दी गई है।
अस्पतालों को मिलने वाला पैसा Motor Vehicle Accident Fund (MVAF) से दिया जाएगा। अगर दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित है तो भुगतान इंश्योरेंस कंपनियों के योगदान से किया जाएगा। अगर वाहन बीमित नहीं है या मामला हिट-एंड-रन का है, तो भुगतान सरकारी बजट से किया जाएगा।
इस योजना को 112 Emergency Response Support System (ERSS) से भी जोड़ा गया है। इसका मतलब है कि दुर्घटना के बाद पीड़ित या उसकी मदद करने वाला व्यक्ति (जिसे RAH-VEER या Good Samaritan कहा गया है) 112 पर कॉल करके सबसे नजदीकी अस्पताल की जानकारी या एंबुलेंस मंगवा सकता है।
जैसे ही घायल व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होता है, इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाता है। इलाज National Health Authority (NHA) द्वारा तय किए गए हेल्थ पैकेज के अनुसार होगा। उसी समय पुलिस को भी डिजिटल सिस्टम के जरिए सूचना भेज दी जाती है ताकि दुर्घटना की पुष्टि की जा सके। पुलिस के पास इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए 24 घंटे का समय होगा, और गंभीर मामलों में यह समय 48 घंटे तक हो सकता है।
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड होती है। दुर्घटना की सूचना मिलने से लेकर अस्पताल में भर्ती, इलाज, पुलिस की पुष्टि, क्लेम प्रोसेस और अंतिम भुगतान तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और धोखाधड़ी रोकी जा सके।
अस्पतालों को भुगतान समय पर मिले, इसके लिए भी नियम बनाए गए हैं। जब राज्य की हेल्थ एजेंसी क्लेम को मंजूरी दे देती है, तो 10 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यह भुगतान जिला कलेक्टर या जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के माध्यम से किया जाएगा।
योजना के सही तरीके से लागू होने और लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी प्रणाली भी बनाई गई है। जिला स्तर पर District Road Safety Committee (DRSC) इसकी निगरानी करेगी और एक Grievance Redressal Officer (GRO) नियुक्त किया जाएगा।
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