पर्सनल फाइनेंस

3 min read | अपडेटेड January 02, 2026, 11:56 IST
सारांश
पीएफआरडीए को उम्मीद है कि इन नीतिगत सुधारों से ग्राहकों और हितधारकों को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और लचीले एनपीएस इकोसिस्टम तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट परिणामों में सुधार होगा और वृद्धावस्था आय सुरक्षा में वृद्धि होगी।

पीएफआरडीए ने एनपीएस के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधार पेश किए
पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory and Development Authority, PFRDA) के बोर्ड ने पेंशन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एनपीएस का प्रबंधन करने के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks, SCBs) को स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति देने के लिए एक रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों के हितों की रक्षा होगी। प्रस्तावित ढांचे में वर्त्तमान नियामकीय बाधाओं को दूर करने की कोशिश की गई है। इनमें अब तक बैंकों की भागीदारी सीमित थी। भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों के अनुरूप नेट वर्थ, मार्केट कैप और विवेकपूर्ण सुदृढ़ता के आधार पर एक स्पष्ट रूप से परिभाषित पात्रता मानदंड शुरू करके, यह सुनिश्चित करेगा कि केवल अच्छी तरह से पूंजीकृत और सिस्टमैटिकली मजबूत बैंकों को पेंशन फंड स्पॉन्सर करने की अनुमति है। विस्तृत मानदंड अलग से अधिसूचित किए जाएंगे और नए और मौजूदा दोनों पेंशन फंडों पर लागू होंगे।
पीएफआरडीए ने एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति पीएफआरडीए द्वारा शुरू किए गए सिलेक्शन प्रोसेस के हिसाब से की है। पीएफआरडीए के बोर्ड के नए ट्रस्टी कुछ इस तरह हैं -
श्री दिनेश कुमार खारा, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय स्टेट बैंक
सुश्री स्वाति अनिल कुलकर्णी, पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष, यूटीआई एएमसी - ट्रस्टी
डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक और प्रमुख और सिडबी द्वारा प्रबंधित फंड ऑफ फंड्स स्कीम के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यम पूंजी निवेश समिति के सदस्य डॉ. अरविंद गुप्ता।
श्री दिनेश कुमार खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी नामित किया गया है।
उभरती वास्तविकताओं, जनता की आकांक्षाओं, इंटरनेशनल बेंचमार्क और कॉर्पोरेट, रिटेल और गिग-इकोनॉमी क्षेत्रों में कवरेज का विस्तार करने के उद्देश्य के साथ तालमेल बिठाने के लिए, पीएफआरडीए ने 1 अप्रैल 2026 से ग्राहक हितों की रक्षा के लिए पेंशन फंड के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) संरचना को संशोधित किया है। संशोधित स्लैब-आधारित आईएमएफ सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए अलग-अलग दरें पेश करता है। यह मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) के अंतर्गत योजनाओं पर भी लागू होंगी। इसमें एमएसएफ कॉर्पस को अलग-अलग गिना जाएगा। कंपोजिट स्कीम के अंतर्गत सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों या ऑटो चॉइस और एक्टिव चॉइस जी 100 का विकल्प चुनने वालों के लिए आईएमएफ समान रहेगा। गैर-सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत आईएमएफ के लिए निम्नलिखित संरचना होगी-
₹25,000 करोड़ तक के AUM के स्लैब के लिए नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर सब्सक्राइबर्स (NGS) के लिए IMF रेट्स .12%
₹25,000 करोड़ से अधिक और ₹50,000 करोड़ तक के AUM के स्लैब के लिए नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर सब्सक्राइबर्स (NGS) के लिए IMF रेट्स .08%
₹50,000 करोड़ से अधिक और ₹1,50,000 करोड़ तक के AUM के स्लैब के लिए नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर सब्सक्राइबर्स (NGS) के लिए IMF रेट्स .06% ₹1,50,000 करोड़ से ऊपर AUM के स्लैब के लिए नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर सब्सक्राइबर्स (NGS) के लिए IMF रेट्स .04%
पेंशन फंड द्वारा पीएफआरडीए को देय 0.015% का वार्षिक नियामक शुल्क (Annual Regulatory Fee, ARF) नहीं बदलता है। इसमें से पीएफआरडीए के समग्र मार्गदर्शन के अंतर्गत समन्वित जागरूकता, आउटरीच और फाइनेंशियल-लिटरेसी पहल को सपोर्ट करने के लिए AUM का 0.0025% एनपीएस इंटरमीडियरीज एसोसिएशन (एएनआई) को दिया जाएगा। देश के वित्तीय और पेंशन क्षेत्रों में औपचारिकता लगातार बढ़ रही है और प्रत्येक नागरिक की वित्तीय आकांक्षाओं को प्रभावित कर रही है। पीएफआरडीए को उम्मीद है कि इन नीतिगत सुधारों से ग्राहकों और हितधारकों को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और लचीले एनपीएस इकोसिस्टम तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट परिणामों में सुधार होगा और वृद्धावस्था आय सुरक्षा में वृद्धि होगी।
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