पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 08, 2026, 17:37 IST
सारांश
NPS Vatsalya को सरकार ने FY2024-25 के बजट में पेश किया था। इसका मकसद यह है कि माता-पिता या अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों के लिए लंबे समय की पेंशन बचत कर सकें। इस योजना में बच्चा खुद सब्सक्राइबर होता है, लेकिन खाता माता-पिता या कानूनी अभिभावक द्वारा ऑपरेट किया जाता है।

NPS Vatsalya Scheme में निवेश और योगदान के नियम काफी आसान रखे गए हैं।
NPS Vatsalya Scheme पर पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने 7 जनवरी 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है। ये गाइडलाइंस पहले जारी नियमों की जगह लेंगी और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत नाबालिगों के लिए चलाई जा रही NPS Vatsalya योजना के निवेश, निकासी और एग्जिट से जुड़े नियम साफ करती हैं। ये नियम सिस्टम तैयार होने के बाद लागू होंगे। यहां हम समझेंगे कि नई गाइडलाइंस में क्या है।
NPS Vatsalya को सरकार ने FY2024-25 के बजट में पेश किया था। इसका मकसद यह है कि माता-पिता या अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों के लिए लंबे समय की पेंशन बचत कर सकें। इस योजना में बच्चा खुद सब्सक्राइबर होता है, लेकिन खाता माता-पिता या कानूनी अभिभावक द्वारा ऑपरेट किया जाता है।
दरअसल PFRDA ने सितंबर 2024 में इस स्कीम का शुरुआती ढांचा बताया था। अब जनवरी 2026 में जारी सर्कुलर उस पुराने नियम को रद्द करके NPS Vatsalya Scheme Guidelines 2025 को औपचारिक रूप से लागू करने के लिए लाया गया है। इसके साथ ही एग्जिट और विड्रॉल से जुड़े नियमों में भी दिसंबर 2025 में बदलाव किए गए थे।
यह खाता 18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर खोला जा सकता है। बच्चे के माता-पिता या कानूनी अभिभावक यह खाता खोलते हैं और वही इसे चलाते हैं, लेकिन योजना में सब्सक्राइबर बच्चा ही माना जाता है।
इसमें निवेश और योगदान के नियम काफी आसान रखे गए हैं। खाता खोलने और हर साल कम से कम ₹250 का योगदान जरूरी है। इसमें माता-पिता, अभिभावक के अलावा रिश्तेदार और दोस्त भी पैसे डाल सकते हैं, चाहे वह गिफ्ट के रूप में ही क्यों न हो। निवेश PFRDA से रजिस्टर्ड पेंशन फंड्स के जरिए होता है और पैसा सरकारी बॉन्ड, डेट, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स और इक्विटी में लगाया जाता है।
इसमें इक्विटी का हिस्सा 50% से 75% तक हो सकता है। इसके अलावा, सरकारी सिक्योरिटीज और संबंधित निवेश में 15-20%, डेट इंस्ट्रूमेंट्स और संबंधित निवेश में 10–30% और शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स और संबंधित निवेश (मनी मार्केट) में 10% पैसा लगाया जाता है।
पैसे की आंशिक निकासी यानी Partial Withdrawal की सुविधा भी दी गई है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें हैं। खाता खुलने के कम से कम तीन साल बाद ही आंशिक निकासी की जा सकती है। यह निकासी बच्चे की पढ़ाई, गंभीर बीमारी के इलाज या 75% से ज्यादा विकलांगता जैसी जरूरतों के लिए ही मान्य होगी। निकाली जाने वाली रकम कुल जमा योगदान का अधिकतम 25% हो सकती है, उस पर हुए रिटर्न को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा।
निकासी की संख्या पर भी सीमा रखी गई है। 18 साल की उम्र तक बच्चा या अभिभावक अधिकतम दो बार ही आंशिक निकासी कर सकते हैं। इसके बाद 18 से 21 साल की उम्र के बीच, KYC पूरा करने पर दो बार और आंशिक निकासी की अनुमति दी गई है।
जब बच्चा 18 साल का हो जाता है, तब उसके पास तीन विकल्प होते हैं। वह इस स्कीम में तीन साल तक बना रह सकता है, NPS के All Citizen Model में शिफ्ट हो सकता है या फिर स्कीम से बाहर निकल सकता है। इसके लिए KYC पूरा होना जरूरी है।
अगर दुर्भाग्य से सब्सक्राइबर यानी बच्चे की मृत्यु हो जाती है, तो पूरी जमा पेंशन राशि अभिभावक, नॉमिनी या कानूनी वारिस को दे दी जाती है। साथ ही अभिभावक की मृत्यु होने पर नया गार्जियन बदलने के नियम भी तय किए गए हैं।
NPS Vatsalya खाता रजिस्टर्ड Points of Presence, ऑनलाइन सुविधा या eNPS प्लेटफॉर्म के जरिए खोला जा सकता है। खाते की जानकारी और परफॉर्मेंस स्टेटमेंट, ऑनलाइन लॉगिन या मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से देखी जा सकती है।
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