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NPS vs Mutual Fund: आसान भाषा में समझिए, दोनों के फायदे और नुकसान

Upstox

4 min read | अपडेटेड November 26, 2025, 18:42 IST

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सारांश

NPS vs Mutual Fund: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में साल 2025 में हुए तीन बड़े बदलावों ने इसे म्यूचुअल फंड का तगड़ा प्रतिद्वंद्वी बना दिया है। अब टियर-2 खाते में 100 फीसदी इक्विटी निवेश, बेहद कम खर्च और आसान निकासी नियमों के कारण यह सिर्फ टैक्स बचाने का नहीं, बल्कि वेल्थ क्रिएशन का जरिया बन गया है।

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NPS के नए नियम अब इसे म्यूचुअल फंड से ज्यादा आकर्षक और किफायती बना रहे हैं। | Image source: Shutterstock

NPS vs Mutual Fund: जब भी निवेश की बात आती है तो आज की युवा पीढ़ी की जुबान पर सबसे पहला नाम 'म्यूचुअल फंड' का होता है। वहीं, नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS को लोग एक सरकारी, सुस्त और बुढ़ापे वाली स्कीम मानकर इग्नोर कर देते थे। लोगों को लगता था कि इसमें पैसा फंस जाता है और रिटर्न भी औसत मिलता है। लेकिन साल 2025 में हुए कुछ बड़े बदलावों ने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया है। अब NPS केवल टैक्स बचाने या पेंशन पाने की स्कीम नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधे तौर पर म्यूचुअल फंड्स को चुनौती देने वाला एक मॉडर्न निवेश विकल्प बन गया है। आइए विस्तार से समझते हैं उन तीन नियमों के बारे में जिन्होंने NPS का पूरा गेम बदल दिया है।
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टियर-2 खाते में 100% इक्विटी का धमाका

सबसे बड़ा और अहम बदलाव NPS के टियर-2 अकाउंट को लेकर हुआ है। पहले लोग शिकायत करते थे कि NPS में वो अपनी मर्जी से ज्यादा पैसा शेयर बाजार (इक्विटी) में नहीं लगा सकते, वहां एक सीमा तय थी। लेकिन अब यह बंदिश हट गई है। नए नियमों के मुताबिक, टियर-2 खाते में अब आप 100 फीसदी तक पैसा इक्विटी में निवेश कर सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि आप NPS के जरिए ठीक वैसे ही पोर्टफोलियो बना सकते हैं जैसा आप किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में बनाते हैं। टियर-2 खाते में कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता, यानी आप जब चाहें पैसा निकाल सकते हैं और जब चाहें डाल सकते हैं। इस फ्लेक्सिबिलिटी ने इसे म्यूचुअल फंड के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है।

खर्च के मामले में म्यूचुअल फंड से कोसों आगे

निवेश करते समय हम अक्सर 'एक्सपेंस रेश्यो' यानी फंड मैनेजमेंट के खर्च को नजरअंदाज कर देते हैं, जो लंबी अवधि में हमारे मुनाफे का बड़ा हिस्सा खा जाता है। म्यूचुअल फंड्स, खासकर रेगुलर प्लान में यह खर्च 0.5 फीसदी से लेकर 1.5 फीसदी तक होता है। वहीं दूसरी तरफ, NPS का फंड मैनेजमेंट चार्ज बेहद कम है, जो करीब 0.03 फीसदी से 0.09 फीसदी के बीच रहता है। सुनने में यह अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन जब आप 10-20 साल के लिए निवेश करते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत से यह अंतर लाखों रुपये का फायदा या नुकसान करा सकता है। कम लागत के मामले में NPS अब किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम से कहीं ज्यादा किफायती साबित हो रहा है।

पैसा फंसने का डर हुआ खत्म

NPS से दूरी बनाने की एक बड़ी वजह यह थी कि लोगों को लगता था उनका पैसा इसमें 'लॉक' हो जाएगा। टियर-1 खाते में रिटायरमेंट तक पैसा लॉक रहने की शर्त कुछ लोगों को खटकती थी। लेकिन अब निकासी यानी विड्रॉल के नियमों को बेहद सरल और व्यावहारिक बना दिया गया है। टियर-1 में भी बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की सुविधा को पूरी तरह डिजिटल और तेज कर दिया गया है। वहीं, टियर-2 खाता तो पहले से ही लॉक-इन फ्री था, लेकिन अब इक्विटी की आजादी मिलने के बाद यह शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म, दोनों तरह के निवेशकों के लिए एक बेहतरीन लिक्विड विकल्प बन गया है।

क्या बदल जाएगी निवेश की रणनीति?

इन तीन बड़े बदलावों, 100 फीसदी इक्विटी, न के बराबर लागत और आसान निकासी ने NPS को एक नए अवतार में पेश किया है। अब निवेशक इसे केवल 50,000 रुपये का अतिरिक्त टैक्स बचाने वाले टूल के रूप में नहीं देख रहे। जो समझदार निवेशक 'डायरेक्ट इक्विटी' या 'म्यूचुअल फंड' के जरिए वेल्थ बनाना चाहते थे, उनके लिए NPS का टियर-2 खाता एक शानदार विकल्प बनकर उभरा है। इसमें आपको फंड मैनेजर की विशेषज्ञता मिलती है, वो भी म्यूचुअल फंड के मुकाबले बेहद कम कीमत पर। तो अगर आप भी 2025 में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो पुराने ख्यालात छोड़कर NPS के इस नए रूप पर गौर जरूर करें।

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लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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