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4 min read | अपडेटेड August 16, 2025, 10:18 IST
सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान दिवाली तक जीएसटी दरों में काफी कमी किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि इससे आम लोगों और छोटे और मझोले उद्योगों को राहत मिलेगी।

जीएसटी 2.0 में क्या-क्या बदल जाएगा? किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
Goods and Services Tax (GST) यानी कि माल और सेवा कर को लेकर केंद्र सरकार दीवाली से पहले कुछ बड़े बदलाव करने वाली है। केंद्र सरकार ने जीएसटी की संशोधित व्यवस्था में 5% और 18% वाले सिर्फ दो टैक्स रेट्स का ही प्रस्ताव रखा है और उम्मीद की जा रही है कि दीवाली तक इसको लागू भी कर दिया जाएगा। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए गठित राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह को अपना यह प्रस्ताव भेजा है। इसमें 12% और 28% की मौजूदा कर दरों को हटा दिया गया है। वहीं, संशोधित जीएसटी सिस्टम में दो टैक्स स्लैब के अलावा लग्जरी और नुकसान देने वाली चीजों के लिए 40% की एक खास रेट रखने का प्रस्ताव रखा गया है।
अब मंत्रियों का समूह इस प्रस्ताव पर चर्चा करेगा और उसके आधार पर अपनी सिफारिश जीएसटी परिषद के सामने रखेगा। जीएसटी परिषद की बैठक अगले महीने होने की उम्मीद है। फिलहाल जरूरी खाने वाली चीजों पर 0% जीएसटी लगाया जाता है, जबकि रोजमर्रा में इस्तेमाल की जाने वाली चीजों पर 5%, स्टैंडर्ड चीजों पर 12%, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर 18% और लग्जरी और नुकसान देने वाली चीजों पर 28% जीएसटी लगाया जाता है। सूत्रों ने बताया कि इस साल दिवाली तक मौजूदा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था (इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम) की जगह लेने के लिए तैयार इस संशोधित फॉर्मेट में 5% और 18% के दो टैक्स रेट्स ही प्रस्तावित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान दिवाली तक जीएसटी दरों में काफी कमी किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि इससे आम लोगों और छोटे और मझोले उद्योगों को राहत मिलेगी। जीएसटी से संबंधित मामलों में फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था जीएसटी परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मौजूदा 12% टैक्स स्लैब में शामिल 99% चीजें 5% टैक्स स्लैब में आ जाएंगी।
इसी तरह, फिलहाल 28% कर के दायरे में आने वालीं लगभग 90% चीजें और सर्विसेज नई व्यवस्था के तहत 18% टैक्स रेट्स में ट्रांसफर हो जाएंगी। सूत्रों ने बताया कि 40% टैक्स की विशेष दर केवल सात वस्तुओं पर लगाई जाएगी। तंबाकू प्रोडक्ट्स भी इसी दर के अंतर्गत रखे जाएंगे लेकिन टैक्सेशन की कुल दर मौजूदा 88% पर बनी रहेगी। ऑनलाइन गेमिंग को भी एक नुकसान देने वाला प्रोडक्ट मानते हुए उसे 40% टैक्स के दायरे में ही रखने का प्रस्ताव है। केंद्र के प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी रेट में बदलाव से आठ सेक्टर्स- कपड़ा, उर्वरक, नवीकरणीय ऊर्जा, मोटर वाहन, हस्तशिल्प, कृषि, स्वास्थ्य एवं बीमा को सबसे अधिक फायदा होगा।
एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि संशोधित जीएसटी से खपत को काफी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है और ऐसा होने पर रेट संशोधन से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई हो जाएगी। सूत्र ने तीसरी तिमाही की शुरुआत में इसके लागू हो जाने की उम्मीद जताते हुए कहा, ‘टैक्स रेट्स में बदलाव से राजस्व में फर्क आएगा लेकिन उसकी भरपाई अगले कुछ महीनों में हो जाएगी।’ 1 जुलाई, 2017 से लागू मौजूदा जीएसटी ढांचे में केंद्रीय एवं राज्य शुल्कों को मिला दिया गया था। इस इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम के तहत सबसे अधिक 65% टैक्स कलेक्शन 18% टैक्स से होता है। लग्जरी और नुकसानदेह वस्तुओं पर लागू 28 प्रतिशत की हाइएस्ट टैक्स रेट जीएसटी रेवेन्यू में 11% का योगदान देती है, जबकि 12% की दर रेवेन्यू में केवल 5% का योगदान देती है।
दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं पर सबसे कम 5% टैक्स लगता है, जिसका कुल जीएसटी संग्रह में 7% का योगदान है। सूत्रों ने कहा कि हीरे और कीमती पत्थरों जैसे हाई लेबर-इंटेंसिव और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टरों पर मौजूदा दरों के हिसाब से ही टैक्स लगाया जाता रहेगा। जीएसटी अधिनियम के तहत किसी भी वस्तु या सेवा पर अधिकतम 40% टैक्स ही लगाया जा सकता है।
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