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  1. क्या है ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना, कितना है इसके लिए बजट, कैसे गांव की महिलाओं को मिल रही मदद?

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क्या है ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना, कितना है इसके लिए बजट, कैसे गांव की महिलाओं को मिल रही मदद?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड March 25, 2026, 16:21 IST

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सारांश

Namo Drone Didi Scheme: कुल मिलाकर, ड्रोन के उपयोग से एसएचजी गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

नमो ड्रोन दीदी स्कीम

'नमो ड्रोन दीदी’ योजना से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगी नई उड़ान

‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना क्या है और इस पर अभी तक क्या अपडेट है, इसको लेकर लोकसभा में मंगलवार को ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस योजना को केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी है और इसका प्रोजेक्ट पीरियड 2023-24 से 2025-26 तक है, जबकि इसका बजट 1261 करोड़ रुपये है, ताकि सिलेक्टेड महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups, SHGs) को ड्रोन दिए जा सकें जो किसानों को कृषि उद्देश्यों (उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग) के लिए किराये की सर्विसेज दें।

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योजना से जुड़ी हर डीटेल यहां

ड्रोन और सहायक प्रभारों की लागत का 80% तक अधिकतम 8 लाख रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन खरीदने के लिए दी जाती है। एसएचजी के क्लस्टर स्तरीय संघ (Cluster Level Federations, CLFs) 3% की ब्याज छूट के साथ नैशनल कृषि अवसंरचना वित्तपोषण सुविधा (Agriculture Infra Financing Facility, AIF) के तहत ऋण के रूप में बाकी राशि (खरीद की कुल लागत में से सब्सिडी को छोड़कर) जुटा सकते हैं। उन्होंने जानकरी दी कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत, ड्रोन एक पैकेज के रूप में दिए जाते हैं, जिसमें तरल उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए स्प्रे असेंबली वाला बुनियादी ड्रोन शामिल है। पैकेज में अतिरिक्त 4 स्पेयर बैटरी सेट, एक स्पेयर प्रोपेलर सेट, नोजल सेट, डुअल चैनल फास्ट बैटरी चार्जर, बैटरी चार्जर हब, ड्रोन पायलट के लिए 15 दिन की ट्रेनिंग, ड्रोन सहायक ट्रेनिंग, एक साल का व्यापक बीमा, 2 साल का वार्षिक रखरखाव अनुबंध और लागू जीएसटी शामिल हैं।

अभी तक दिए गए हैं 500 ड्रोन

15 दिन का ड्रोन पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम में ड्रोन पायलट लाइसेंस सुरक्षित करने के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग, उड़ान की तैयारी, छोटे मरम्मत और रखरखाव, और कीटनाशक और तरल उर्वरक के छिड़काव के लिए ड्रोन हैंडलिंग का व्यावहारिक अभ्यास शामिल है। उर्वरक विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, मुख्य उर्वरक कंपनियों (एलएफसी) ने 2023-24 में एसएचजी की ड्रोन दीदियों को नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 500 ड्रोन वितरित किए हैं।

ग्रामीण महिलाओं के बढ़ेंगे आय के अवसर

इन सभी ड्रोन दीदियों को डीजीसीए द्वारा अधिकृत रिमोट पायलट संगठनों (आरपीटीओ) में ट्रेनिंग दी गई है। कृषि विकास और ग्रामीण परिवर्तन केंद्र (एडीआरटीसी), बैंगलोर ने नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत एलएफसी द्वारा दिए गए इन 500 ड्रोन पर ड्रोन संचालन की आर्थिक और व्यवसायिक व्यवहार्यता पर एक स्टडी की है। स्टडी से संकेत मिलता है कि एसएचजी पहले मुख्य रूप से कृषि और संबद्ध गतिविधियों में नियोजित थे और उन्हें दिए गए ड्रोन ने ड्रोन प्रौद्योगिकी के जरिए उनकी दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि करते हुए कृषि की विशिष्टता को आधुनिक कृषि पद्धतियों तक विस्तार किया है। कुल मिलाकर, ड्रोन के उपयोग से एसएचजी गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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