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Mutual Fund में Growth या IDCW: कौन सा विकल्प आपके लिए सही और कैसे करें स्विच?

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 25, 2026, 17:09 IST

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सारांश

Mutual Fund: Growth विकल्प में फंड का लाभ फिर से निवेश किया जाता है और कोई भुगतान तुरंत नहीं होता, जिससे संपत्ति लंबी अवधि में बढ़ती है। दूसरी तरफ IDCW विकल्प में फंड आपको नियमित रूप से लाभ का हिस्सा या निवेश की कुछ पूंजी भुगतान के रूप में देता है।

Mutual Fund

Mutual Fund: Growth विकल्प में फंड मैनेजर लाभ को वापस स्कीम में निवेश करता है।

Mutual Fund: जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो हर स्कीम में आपको दो विकल्प चुनने होते हैं। पहला Growth और दूसरा IDCW यानी इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विड्रॉल। कई निवेशक बिना समझे ही किसी एक विकल्प को चुन लेते हैं। हालांकि कोई भी फैसला लेने से पहले आपके लिए इन दोनों को समझना जरूरी है।
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Growth विकल्प में फंड का लाभ फिर से निवेश किया जाता है और कोई भुगतान तुरंत नहीं होता, जिससे संपत्ति लंबी अवधि में बढ़ती है। दूसरी तरफ IDCW विकल्प में फंड आपको नियमित रूप से लाभ का हिस्सा या निवेश की कुछ पूंजी भुगतान के रूप में देता है, जिसे आप अपने खर्च के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।

IDCW

निवेशक अक्सर IDCW को अतिरिक्त आय समझते हैं, जैसे स्टॉक डिविडेंड। लेकिन म्यूचुअल फंड में भुगतान निवेशक की पूंजी और फंड के अर्जित लाभ से आता है, न कि निश्चित मुनाफे से। फंड मैनेजर तय करता है कि कितनी राशि वितरित होगी। पहले इसे डिविडेंड विकल्प कहा जाता था। 1 अप्रैल 2021 से इसे इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विड्रॉल नाम दिया गया।

IDCW से मिलने वाला पैसा कोई अतिरिक्त कमाई नहीं होती। यह पैसा आपकी ही निवेश की हुई पूंजी में से आता है। नाम बदलने का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि यह कोई गारंटीड मुनाफा नहीं है। टैक्स की बात करें तो, 1 अप्रैल 2020 के बाद IDCW भुगतान निवेशक की टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल है। अगर सालाना भुगतान 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो 10% TDS लगेगा। बिना PAN देने पर यह 20% हो जाता है।

यह विकल्प उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जिन्हें नियमित नकदी की जरूरत होती है, जैसे रिटायर लोग। लेकिन अगर निवेश का उद्देश्य फिर से निवेश और संपत्ति बढ़ाना है, तो Growth विकल्प बेहतर है।

Growth विकल्प

Growth विकल्प में फंड मैनेजर लाभ को वापस स्कीम में निवेश करता है। कोई भुगतान तुरंत नहीं होता। इससे निवेश में कम्पाउंडिंग होती है और लंबी अवधि में संपत्ति बढ़ती है। Growth विकल्प का NAV IDCW से ज्यादा होता है।

इस विकल्प में टैक्स केवल रेडेम्प्शन के समय लगता है। अगर आप नियमित नकदी नहीं चाहते और अपने पैसे को लंबी अवधि में बढ़ाना चाहते हैं, तो यह विकल्प उपयुक्त है। यह शिक्षा, घर खरीदने या रिटायरमेंट जैसे लक्ष्य के लिए अच्छा है।

IDCW और Growth के बीच स्विच

निवेशक कभी भी दोनों विकल्पों के बीच स्विच कर सकते हैं। इसके लिए वे वितरक, एजेंट, ब्रोकरेज या ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल कर सकते हैं। स्विच पर एग्जिट लोड और टैक्स लागू हो सकता है। स्विच को रिडेम्प्शन और नई खरीद माना जाता है, क्योंकि दोनों विकल्पों का NAV अलग होता है। IDCW और Growth विकल्प अलग हैं। निवेशक को अपने नकदी की जरूरत, निवेश का लक्ष्य, समय और टैक्स प्रभाव को देखकर विकल्प चुनना चाहिए। सभी के लिए एक ही विकल्प सही नहीं है।

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