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SIP vs Lumpsum: 2026 में निवेश का कौन सा तरीका बन सकता है बेस्ट ऑप्शन? समझें पूरी बात

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड March 18, 2026, 14:04 IST

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सारांश

साल 2026 में निवेश के लिए कौन सा तरीका बेस्ट है, यह आपकी बचत और मार्केट की चाल पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट सचिन जैन के मुताबिक, अगर आपके पास बोनस या विरासत का पैसा है तो लमसम ठीक है, वरना सैलरी वालों के लिए SIP ही सबसे अच्छा विकल्प है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में भी जबरदस्त बढ़त देखी जा रही है।

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सही इन्वेस्टमेंट प्लानिंग ही लंबे समय में बड़ी वेल्थ बनाने का सबसे आसान रास्ता है।

इन्वेस्टमेंट की दुनिया में हमेशा एक बहस चलती है कि लमसम यानी एकमुश्त पैसा लगाना बेहतर है या एसआईपी (SIP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना। साल 2026 में भी यह सवाल निवेशकों के मन में बना हुआ है। स्क्रिप्टबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन का कहना है कि यह फैसला सिर्फ रिटर्न के आधार पर नहीं लिया जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके पास पैसा किस तरह आ रहा है, आपके फाइनेंशियल गोल्स क्या हैं और आप कितना रिस्क ले सकते हैं। असल में लमसम और एसआईपी दो अलग-अलग टूल्स हैं जो अलग-अलग स्थितियों में काम आते हैं।

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क्या है लमसम और एसआईपी का असली अंतर?

लमसम इन्वेस्टमेंट का मतलब है कि आपके पास एक बड़ी रकम है और आपने उसे एक ही बार में मार्केट में लगा दिया। यह तब मुमकिन है जब आपको कहीं से बोनस मिला हो या कोई प्रॉपर्टी बेचकर पैसा आया हो। वहीं दूसरी ओर SIP उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो हर महीने अपनी सैलरी से बचत करते हैं। इसमें आप एक फिक्स्ड अमाउंट जैसे कि 10 हजार रुपये हर महीने एक तय समय के लिए इन्वेस्ट करते हैं। यह आपकी कैश फ्लो की स्थिति पर निर्भर करता है कि आप कौन सा रास्ता चुनते हैं। सैलरी वाले लोगों के लिए एसआईपी अनुशासन के साथ वेल्थ बनाने का एक शानदार तरीका है।

मार्केट की टाइमिंग से ज्यादा जरूरी है समय

अक्सर निवेशक सोचते हैं कि जब मार्केट नीचे आएगा तब वे लमसम पैसा लगाएंगे। लेकिन ऐतिहासिक डेटा बताता है कि मार्केट की टाइमिंग पकड़ना बहुत मुश्किल है। इक्विटी मार्केट शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है और कई बार एक साल के पीरियड में यह सुरक्षित एसेट्स से कम रिटर्न भी दे सकता है। लेकिन जैसे ही आप 10 से 15 साल का समय देखते हैं, तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। लंबी अवधि में इक्विटी ने हमेशा बेहतर प्रदर्शन किया है। इसलिए यह याद रखना जरूरी है कि मार्केट में सही समय पर घुसने से ज्यादा जरूरी मार्केट में लंबे समय तक टिके रहना है।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने 2026 में नई ऊंचाइयों को छुआ है। फ्रेंकलिन टेम्पलटन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एयूएम यानी कुल एसेट्स बढ़कर 82.03 लाख करोड़ रुपये हो गए हैं। यह पिछले साल के मुकाबले 27.1 पर्सेंट की बड़ी बढ़त है। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह इक्विटी स्कीम्स में आने वाला पैसा और एसआईपी में लोगों की बढ़ती भागीदारी है। डेटा बताता है कि इक्विटी फंड्स का एयूएम 29.2 पर्सेंट बढ़कर 35.44 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं हाइब्रिड फंड्स में 30 पर्सेंट और पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में 41.3 पर्सेंट का इजाफा देखा गया है।

वोलेटिलिटी से निपटने का सबसे कारगर तरीका

मार्केट में 10 से 20 पर्सेंट की गिरावट आना बहुत सामान्य बात है। पिछले तीन दशकों में भारतीय बाजारों ने कई बार 30 पर्सेंट तक की बड़ी गिरावट देखी है, लेकिन फिर भी इन्होंने करीब 11 से 12 पर्सेंट का सालाना रिटर्न दिया है। एसआईपी इस उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने में मदद करती है। जब मार्केट गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बढ़ता है तो कम, जिसे रुपये-कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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