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  1. DBT से किसानों को सस्ती खाद, Aadhaar से होगी हर बिक्री की ट्रैकिंग

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DBT से किसानों को सस्ती खाद, Aadhaar से होगी हर बिक्री की ट्रैकिंग

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 20, 2026, 17:48 IST

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सारांश

DBT सिस्टम में सरकार सीधे किसानों को पैसा नहीं देती, बल्कि कंपनियों को सब्सिडी देती है, वो भी तभी जब असली बिक्री होती है। यह पूरी प्रक्रिया आधार से जुड़ी होती है, जिससे गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सब्सिडी किसी जिले या क्षेत्र के हिसाब से नहीं, बल्कि वास्तविक बिक्री के आधार पर दी जाती है।

fertilizer

खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों के लिए सरकार ने सख्त पर्यावरण नियम बनाए हैं।

भारत सरकार ने किसानों को सस्ती दर पर खाद (Fertilizer) उपलब्ध कराने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्टम लागू किया है। इस सिस्टम के तहत सरकार सब्सिडी सीधे कंपनियों को देती है, लेकिन तभी जब किसान को खाद बेची जाती है। यह बिक्री Aadhaar से जुड़े PoS मशीन के जरिए होती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहती है और हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड तुरंत मिल जाता है।

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सब्सिडी देने का तरीका

DBT सिस्टम में सरकार सीधे किसानों को पैसा नहीं देती, बल्कि कंपनियों को सब्सिडी देती है, वो भी तभी जब असली बिक्री होती है। यह पूरी प्रक्रिया आधार से जुड़ी होती है, जिससे गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सब्सिडी किसी जिले या क्षेत्र के हिसाब से नहीं, बल्कि वास्तविक बिक्री के आधार पर दी जाती है।

खाद की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होती है

रसायन और उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में बताया कि हर फसल सीजन से पहले कृषि और किसान कल्याण विभाग और राज्य सरकारें मिलकर यह तय करती हैं कि किस राज्य को कितनी खाद चाहिए। इसके आधार पर डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स राज्यों को हर महीने खाद की सप्लाई प्लान के अनुसार भेजता है और उसकी निगरानी करता है।

पूरे देश में खाद की आवाजाही पर नजर रखने के लिए iFMS (इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम) नाम का ऑनलाइन सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है। राज्य सरकारों को यह भी कहा जाता है कि वे कंपनियों और आयातकों के साथ मिलकर सप्लाई सही तरीके से चलाएं। राज्य के अंदर जिला स्तर पर खाद का वितरण राज्य सरकार ही करती है।

पर्यावरण और सुरक्षा के नियम

खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों के लिए सरकार ने सख्त पर्यावरण नियम बनाए हैं। कानून के तहत खतरनाक केमिकल्स को नियंत्रित किया जाता है। साथ ही फैक्ट्रियों के लिए प्रदूषण और उत्सर्जन के नियम तय किए हैं।

हर फैक्ट्री को State Pollution Control Board से अनुमति लेनी होती है और प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम लगाना जरूरी होता है। Central Pollution Control Board और राज्य बोर्ड लगातार निगरानी करते हैं और नियम तोड़ने पर कार्रवाई करते हैं। इसके लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया गया है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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