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Income Tax Refund: 2026 में भी नहीं मिला इनकम टैक्स रिफंड? क्या हो सकती है वजह? एक्सपर्ट्स की ये है राय

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 09, 2026, 17:30 IST

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सारांश

Income Tax Refund: एक्सपर्ट्स के अनुसार रिफंड अटकने की सबसे आम वजह ITR में दिखाई गई इनकम और Form 26AS या AIS में मौजूद इनकम का मेल न खाना होता है। इसके अलावा कई बार बैंक अकाउंट की डिटेल गलत होती है या अकाउंट वेरिफाई नहीं होता, जिसकी वजह से रिफंड क्रेडिट नहीं हो पाता।

Income Tax Refund

Income Tax Refund: आमतौर पर ITR फाइल और ई-वेरिफाई करने के बाद चार से छह हफ्तों के भीतर रिफंड मिल जाता है।

Income Tax Refund: आयकर विभाग ने पहले ही बताया था कि ज्यादातर इनकम टैक्स रिफंड दिसंबर 2025 तक प्रोसेस कर दिए जाएंगे। कई टैक्सपेयर्स ऐसे हैं, जिन्हें रिफंड मिल भी चुका है। इसके बावजूद 2026 में भी कुछ लोगों का रिफंड अटका हुआ है, जिससे वे परेशान हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर बार रिफंड में देरी का मतलब कोई बड़ी समस्या होना नहीं होता, कई बार यह सामान्य प्रोसेस का हिस्सा होता है।
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क्या है एक्सपर्ट्स की राय

Tax2win के CEO और को-फाउंडर अभिषेक सोनी के मुताबिक, अगर ITR में किसी तरह का मिसमैच या गड़बड़ी होती है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजता है और उनसे जवाब या स्पष्टीकरण मांगा जाता है। जैसे ही टैक्सपेयर उस नोटिस का सही तरीके से जवाब दे देता है और मामला क्लियर हो जाता है, रिफंड जारी कर दिया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि जिन मामलों में कोई गड़बड़ी नहीं होती, वहां रिफंड अक्सर प्रोसेसिंग टाइमलाइन की वजह से लेट होता है और अगली प्रोसेसिंग बैच में अपने-आप क्लियर हो जाता है।

क्या हो सकती है रिफंड अटकने की वजहें

एक्सपर्ट्स के अनुसार रिफंड अटकने की सबसे आम वजह ITR में दिखाई गई इनकम और Form 26AS या AIS में मौजूद इनकम का मेल न खाना होता है। इसके अलावा कई बार बैंक अकाउंट की डिटेल गलत होती है या अकाउंट वेरिफाई नहीं होता, जिसकी वजह से रिफंड क्रेडिट नहीं हो पाता। कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स ऐसी छूट या डिडक्शन क्लेम कर लेते हैं, जिनके वे पात्र नहीं होते, जिससे रिफंड रोका जा सकता है।

रिफंड में देरी की एक और बड़ी वजह ITR का ई-वेरिफिकेशन पेंडिंग होना है। कई लोग रिटर्न फाइल तो कर देते हैं, लेकिन ई-वेरिफिकेशन करना भूल जाते हैं। इसके अलावा बड़े या हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस होने पर रिटर्न को रिस्क असेसमेंट के लिए चुना जा सकता है, जिससे प्रोसेसिंग में समय लग जाता है। कई बार तकनीकी या डिपार्टमेंट के बैकएंड सिस्टम में देरी भी रिफंड लेट होने का कारण बनती है।

चार से छह हफ्तों के भीतर मिल जाता है रिफंड

ध्यान देने वाली बात यह है कि आमतौर पर ITR फाइल और ई-वेरिफाई करने के बाद चार से छह हफ्तों के भीतर रिफंड मिल जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इसमें महीनों भी लग सकते हैं। कानून के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को वित्त वर्ष खत्म होने के बाद नौ महीने तक का समय मिलता है। यानी इस केस में विभाग के पास दिसंबर 2026 तक रिफंड प्रोसेस करने का वैध समय है।

अगर टैक्सपेयर को कोई नोटिस नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है और तुरंत कोई कार्रवाई करने की भी जरूरत नहीं होती। जैसे ही विभाग की तरफ से वेरिफिकेशन और आंतरिक जांच पूरी हो जाएगी, रिफंड अपने-आप प्रोसेस होकर खाते में जमा कर दिया जाएगा।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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