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  1. Income Tax Notices: सैलरी पाने वालों को थमाए जा सकते हैं ये 7 तरह के इनकम टैक्स नोटिस, समझें इससे बचने के तरीके

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Income Tax Notices: सैलरी पाने वालों को थमाए जा सकते हैं ये 7 तरह के इनकम टैक्स नोटिस, समझें इससे बचने के तरीके

Upstox

3 min read | अपडेटेड November 24, 2025, 12:47 IST

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सारांश

Income Tax Notices: अक्सर सैलरीड लोग सोचते हैं कि कंपनी ने टीडीएस काट लिया तो उनकी जिम्मेदारी खत्म, लेकिन ऐसा नहीं है। गलत आईटीआर भरने, आय छुपाने या कैलकुलेशन में गलती होने पर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है। इस खबर में जानिए उन 7 प्रमुख नोटिसों के बारे में जो एक वेतनभोगी व्यक्ति को मिल सकते हैं और उनका सही जवाब कैसे देना है।

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इनकम टैक्स का नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं, समझदारी से दें जवाब।

Income Tax Notices: नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह गलतफहमी रहती है कि उनकी सैलरी से टीडीएस (TDS) कट गया है, तो अब इनकम टैक्स विभाग से उनका कोई वास्ता नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि एक छोटी सी गलती भी आपको आयकर विभाग की रडार पर ला सकती है। विभाग अलग-अलग कारणों से टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजता है। अगर आप भी सैलरीड क्लास से हैं, तो आपको इन 7 तरह के नोटिसों के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि समय रहते सही कदम उठाया जा सके।

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1. सेक्शन 143(1): इंटीमेशन नोटिस यह नोटिस सबसे आम है। जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते हैं और विभाग उसे प्रोसेस करता है, तो सेक्शन 143(1) के तहत एक सूचना भेजी जाती है। इसमें बताया जाता है कि आपका भरा हुआ टैक्स सही है या नहीं। अगर आपके द्वारा कैलकुलेट किए गए टैक्स और विभाग के कैलकुलेशन में कोई अंतर होता है, तो यह नोटिस आता है। इसका जवाब 30 दिनों के भीतर देना होता है।
2. सेक्शन 139(9): दोषपूर्ण रिटर्न (Defective ITR) अगर आपने आईटीआर भरते समय गलत फॉर्म चुन लिया है या कोई जरुरी जानकारी अधूरी छोड़ दी है, तो विभाग इसे 'डिफेक्टिव रिटर्न' मानता है और धारा 139(9) के तहत नोटिस भेजता है। इसे सुधारने के लिए आपको आमतौर पर 15 दिन का समय मिलता है। अगर आप जवाब नहीं देते, तो आपका रिटर्न खारिज हो सकता है।
3. सेक्शन 142(1): रिटर्न न भरने पर पूछताछ अगर आपकी आय टैक्सेबल लिमिट से ऊपर है और आपने रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो विभाग सेक्शन 142(1) के तहत नोटिस भेजकर पूछ सकता है कि आपने रिटर्न क्यों नहीं भरा। इसके अलावा, अगर विभाग को आपके द्वारा दी गई जानकारी के समर्थन में कुछ और दस्तावेज चाहिए, तो भी यह नोटिस भेजा जा सकता है।
4. सेक्शन 143(2): स्क्रूटनी नोटिस यह थोड़ा गंभीर नोटिस होता है। अगर इनकम टैक्स अधिकारी को लगता है कि आपने अपनी आय कम दिखाई है या खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया है, तो वह आपके रिटर्न की गहन जांच (Scrutiny) के लिए सेक्शन 143(2) के तहत नोटिस भेज सकता है। इसमें आपको अपने दावों को साबित करने के लिए सबूत पेश करने होते हैं।
5. सेक्शन 148: आय छुपाने पर (Income Escaping Assessment) अगर विभाग के पास पुख्ता जानकारी है कि आपने कोई ऐसी आय कमाई है जिस पर टैक्स नहीं दिया गया या उसे रिटर्न में नहीं दिखाया गया, तो सेक्शन 148 के तहत नोटिस जारी किया जाता है। यह नोटिस पिछले सालों के रिटर्न की दोबारा जांच के लिए भेजा जाता है।
6. सेक्शन 156: डिमांड नोटिस जब स्क्रूटनी या किसी अन्य जांच के बाद यह तय हो जाता है कि आप पर कुछ टैक्स, पेनल्टी या ब्याज बकाया है, तो विभाग सेक्शन 156 के तहत 'डिमांड नोटिस' भेजता है। इसमें साफ लिखा होता है कि आपको कितनी राशि जमा करनी है और इसके लिए कितना समय (आमतौर पर 30 दिन) दिया गया है।
7. सेक्शन 245: रिफंड के बदले पुराना बकाया अगर आप इस साल टैक्स रिफंड की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन पिछले किसी साल का टैक्स बकाया है, तो विभाग सेक्शन 245 के तहत नोटिस भेजकर सूचित करता है कि वह आपके रिफंड को उस पुराने बकाये के साथ एडजस्ट कर रहा है। अगर आपको लगता है कि पुराना बकाया गलत है, तो आप इसका विरोध कर सकते हैं।
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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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