पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 12, 2026, 13:26 IST
सारांश
अगर एनपीएस या एनपीएस लाइट में जमा आपकी राशि आपके प्राण (PRAN) खाते में क्रेडिट नहीं हुई है, तो आप रिफंड के लिए दावा कर सकते हैं। सात साल तक दावा न होने पर यह पैसा पीएफआरडीए के विशेष सुरक्षा खाते में चला जाता है। अब सरकार के नए अभियान के तहत इसे वापस पाना आसान हो गया है।

सब्सक्राइबर्स 25 साल के भीतर अपनी मूल राशि और ब्याज पर दावा कर सकते हैं।
रिटायरमेंट के सुरक्षित भविष्य के लिए लोग नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश करते हैं। लेकिन कई बार तकनीकी कारणों या जानकारी की कमी की वजह से जमा किया गया पैसा सब्सक्राइबर के परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर यानी प्राण (PRAN) खाते में क्रेडिट नहीं हो पाता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है और आपका पैसा कहीं अटक गया है, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने ऐसे लावारिस पड़े पैसे को वापस करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया बनाई है।
जब एनपीएस या एनपीएस लाइट के सब्सक्राइबर्स किसी पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (पीओपी) के पास पैसा जमा करते हैं और वह राशि उनके खाते में नहीं पहुंचती, तो उसे एक खास खाते में रखा जाता है। इस खाते को सब्सक्राइबर्स पेंशन कंट्रीब्यूशन प्रोटेक्शन अकाउंट (एसपीसीपीए) कहा जाता है। यह खाता पूरी तरह से पीएफआरडीए द्वारा मैनेज किया जाता है ताकि ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहे। अक्सर ऐसा तब होता है जब अंशदान जमा करते समय प्राण नंबर उपलब्ध न हो या सब्सक्राइबर का प्राण नंबर जनरेट ही न हुआ हो। ऐसी स्थिति में पैसा बीच में ही अटक जाता है और सालों तक बिना दावे के पड़ा रहता है।
नियमों के अनुसार अगर यह पैसा सात साल से ज्यादा समय तक बिना दावे के पड़ा रहता है या संबंधित पीओपी का रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, तो उस राशि को एसपीसीपीए खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। सब्सक्राइबर्स के पास इस पैसे पर दावा करने के लिए पर्याप्त समय होता है। एक बार पैसा सुरक्षा खाते में ट्रांसफर हो जाने के बाद, सब्सक्राइबर अगले 25 सालों तक रिफंड के लिए आवेदन कर सकता है। यह लंबी अवधि इसलिए दी गई है ताकि कोई भी निवेशक अपने हक की कमाई से वंचित न रहे। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और इसके लिए कोई फीस भी नहीं ली जाती है।
रिफंड पाने के लिए सब्सक्राइबर को पीएफआरडीए की आधिकारिक वेबसाइट से निर्धारित फॉर्म डाउनलोड करना होगा। इस दावे को सीधे पीएफआरडीए के पास या संबंधित पीओपी के माध्यम से जमा किया जा सकता है। आवेदन के साथ जरूरी सहायक दस्तावेज लगाने होते हैं जो यह साबित करें कि आपने पैसा जमा किया था। आवेदन जमा होने के बाद पीएफआरडीए दस्तावेजों की बारीकी से जांच करता है और रिकॉर्ड से मिलान करता है। अगर सभी जानकारियां सही पाई जाती हैं, तो रिफंड को मंजूरी दे दी जाती है। रिफंड की गई राशि सीधे सब्सक्राइबर के उसी बैंक खाते में भेजी जाती है जिसकी जानकारी क्लेम फॉर्म में दी गई होती है।
खास बात यह है कि रिफंड के दौरान आपको केवल मूल राशि ही नहीं मिलती, बल्कि उस पर मिलने वाला लाभ भी दिया जाता है। पीएफआरडीए द्वारा निर्धारित दर पर उस अवधि का ब्याज भी दिया जाता है जितने समय वह पैसा अनक्लेम्ड रहा है। इसके अलावा अगर मध्यस्थ संस्थान की किसी गलती के कारण पैसा अटका था और उससे कोई मुआवजा वसूला गया है, तो वह भी सब्सक्राइबर को दिया जाता है। रिलायंस कैपिटल, एलआईसी ऑफ इंडिया, यूटीआई और इंडिया इंफोलाइन जैसी कई संस्थाओं ने अपना अनक्लेम्ड पैसा एसपीसीपीए को सौंपा है।
केंद्र सरकार ने लोगों की मेहनत की कमाई को वापस दिलाने के लिए 'योर मनी योर राइट' अभियान शुरू किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अक्टूबर 2025 में बताया था कि बैंकों और रेगुलेटर्स के पास करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्ति लावारिस पड़ी है। इस पैसे को असली मालिकों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने उद्गम (UDGAM) और मित्रा (MITRA) जैसे पोर्टल भी बनाए हैं। दिसंबर 2025 तक इस अभियान के तहत करीब 2000 करोड़ रुपये नागरिकों को वापस किए जा चुके हैं। एनपीएस का पैसा वापस दिलाने की यह पहल भी इसी बड़े अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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