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  1. SIP: 60 की उम्र में चाहिए ₹10 करोड़ का फंड, तो हर महीने कितना एसआईपी करना होगा? समझिए कैलकुलेशन

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SIP: 60 की उम्र में चाहिए ₹10 करोड़ का फंड, तो हर महीने कितना एसआईपी करना होगा? समझिए कैलकुलेशन

Upstox

4 min read | अपडेटेड November 24, 2025, 17:56 IST

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सारांश

SIP: अगर 12% सालाना औसत रिटर्न मानें और 60 साल की उम्र तक 10 करोड़ रुपयों का लक्ष्य तय करें, तो जरूरी SIP आपकी उम्र पर निर्भर करती है। अगर आप 25 साल की उम्र में SIP शुरू करते हैं तो आपको केवल ₹15,000 प्रति माह निवेश करना होगा।

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SIP: जितना जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम पैसा लगाकर आप बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

SIP: बहुत से लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट पर 10 करोड़ रुपये का फंड बनाना बहुत मुश्किल है, लेकिन यह सच नहीं है। अगर समय पर निवेश शुरू किया जाए और नियमित रूप से SIP चलाते रहें, तो कंपाउंडिंग की ताकत से इतना बड़ा फंड आसानी से बन सकता है। इस प्रक्रिया में सबसे अहम चीज यह नहीं है कि आपकी कमाई कितनी है, बल्कि यह है कि आप निवेश कब शुरू करते हैं। जितना जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम पैसा लगाकर आप बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। आज यहां हम समझने वाले हैं कि अलग-अलग उम्र के लोग अपने रिटायरमेंट के लिए किस तरह 10 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं।
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10 करोड़ रुपये के लिए 12% रिटर्न के हिसाब से कैलकुलेशन

अगर 12% सालाना औसत रिटर्न मानें और 60 साल की उम्र तक 10 करोड़ रुपयों का लक्ष्य तय करें, तो जरूरी SIP आपकी उम्र पर निर्भर करती है। अगर आप 25 साल की उम्र में SIP शुरू करते हैं तो आपको केवल ₹15,000 प्रति माह निवेश करना होगा। लेकिन यदि आप 30 साल की उम्र में शुरू करेंगे, तो वही फंड बनाने के लिए SIP लगभग दो गुना बढ़कर ₹28,000 प्रति माह हो जाएगी। और यदि आप 40 साल की उम्र में शुरुआत करेंगे, तो SIP बहुत ज्यादा बढ़कर ₹1,00,000 प्रति माह करनी पड़ेगी। यानी जितनी देर से शुरू करेंगे, हर महीने का बोझ उतना बढ़ेगा।

कंपाउंडिंग का कमाल ऐसे समझिए

कंपाउंडिंग की ताकत समझने के लिए यह उदाहरण बहुत प्रभावी है। अगर आप 20 साल की उम्र में केवल ₹1 लाख एकबारगी निवेश कर दें और वह पैसा 12% सालाना दर से बढ़ता रहे, तो यह 60 साल की उम्र तक ₹93 लाख बन सकता है। यानी सिर्फ 1 लाख से 93 लाख!

लेकिन अगर यही निवेश 25 साल की उम्र में किया जाए, तो राशि घटकर ₹52 लाख रह जाती है। 30 साल की उम्र में यह ₹29 लाख बनता है। और 40 साल की उम्र में वही पैसा केवल ₹9 लाख बनता है। साफ है कि लाभ समय से आता है। देर से शुरू करने पर कंपाउंडिंग का असर घट जाता है, चाहे निवेश की रकम बढ़ा भी दें।

कंपाउंडिंग क्या होती है और यह क्यों जरूरी है?

कंपाउंडिंग का मतलब है- ब्याज पर ब्याज मिलना। आपको आपके मूल निवेश पर ब्याज मिलता है, फिर अगले साल उस निवेश + ब्याज, दोनों पर ब्याज मिलता रहता है। यह चक्र लगातार चलता है और आपका पैसा तेजी से बढ़ता जाता है।

जल्दी निवेश करने से बड़ा फायदा

अगर आप कम उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो आपको हर महीने बहुत कम पैसा लगाना पड़ता है और फिर भी आप बड़ा फंड बना सकते हैं। साथ ही, आपको कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। जैसे कि जरूरत पड़ने पर SIP रोक सकना, आय बढ़ने पर SIP बढ़ा सकना, और कभी-कभी लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो जाना। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में ₹5000 प्रतिमाह की SIP शुरू करे और हर साल उसमें 10% की बढ़ोतरी करे, तो वह रिटायरमेंट से पहले ही 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड बना सकता है।

अगर देर से शुरू किया, तो भी है मौका

अगर आप 40 या 50 की उम्र में भी निवेश शुरू करते हैं, तब भी लक्ष्य पूरा हो सकता है। हां, SIP राशि थोड़ी ज्यादा रखनी होगी, लेकिन निरंतरता से आप 10 करोड़ का फंड बना सकते हैं। इसके लिए बोनस, वेतन वृद्धि, टैक्स बचत वाले ELSS फंड और अन्य निवेश साधन काफी मददगार हो सकते हैं। यानी देर से शुरू करना खराब नहीं है, बिना शुरू किए रहना खराब है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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