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7 min read | अपडेटेड March 06, 2026, 16:38 IST
सारांश
सरकार का मानना है कि अगर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो परिवार मजबूत होगा, समाज मजबूत होगा और देश भी तेजी से आगे बढ़ेगा। इसी सोच के साथ “नारी शक्ति” को विकास की सबसे बड़ी ताकत माना गया है और 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

महिलाओं के लिए वरदान बनीं सरकार की ये 10 योजनाएं
Govt Schemes for Women: पिछले लगभग 10 सालों में भारत में महिलाओं की आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार का मानना है कि अगर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो परिवार मजबूत होगा, समाज मजबूत होगा और देश भी तेजी से आगे बढ़ेगा। इसी सोच के साथ “नारी शक्ति” को विकास की सबसे बड़ी ताकत माना गया है और 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
सुकन्या समृद्धि योजना 22 जनवरी 2015 को “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत शुरू हुई थी। इसमें माता-पिता या अभिभावक अपनी बेटी के नाम से एक सेविंग अकाउंट खोल सकते हैं और उसमें हर साल पैसा जमा कर सकते हैं। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें सालाना लगभग 8.2% ब्याज मिलता है, जो बैंक की कई योजनाओं से ज्यादा होता है।
इसमें कम से कम 250 रुपये से अकाउंट शुरू किया जा सकता है और साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। इसमें 15 साल तक पैसा जमा करना होता है और अकाउंट 21 साल बाद मैच्योर होता है। इस योजना में टैक्स छूट भी मिलती है क्योंकि यह आयकर की धारा 80C के तहत आती है। जब लड़की 18 साल की हो जाती है तो उसकी पढ़ाई या शादी के लिए जमा पैसे का 50% तक निकाला जा सकता है।
ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को जोड़कर उन्हें बिजनेस और रोजगार से जोड़ने के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना – नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (DAY-NRLM) चलाया जा रहा है। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रमुख योजना है। इसमें गांव की महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप यानी SHG में जोड़ा जाता है। इन समूहों में महिलाएं मिलकर बचत करती हैं, छोटे-छोटे लोन लेती हैं और मिलकर बिजनेस शुरू करती हैं।
इस मिशन की एक बड़ी उपलब्धि यह है कि अब तक 10 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को 90 लाख से ज्यादा SHG समूहों में जोड़ा जा चुका है। इन समूहों का लोन चुकाने का रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा है, लगभग 98% लोन समय पर चुकाए जाते हैं। इसके अलावा 4.6 करोड़ महिला किसानों को बेहतर खेती की ट्रेनिंग भी दी गई है और 5.88 लाख से ज्यादा छोटे बिजनेस शुरू करने में मदद मिली है।
अब खेती में नई तकनीक लाने के लिए नमो ड्रोन दीदी योजना भी शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। इसमें महिला SHG समूहों को ड्रोन दिया जाता है जिससे वे किसानों के खेतों में खाद और कीटनाशक छिड़काव की सेवा दे सकें। इससे खेती ज्यादा सटीक और तेज हो जाती है और किसानों की लागत भी कम होती है।
इस योजना में ड्रोन खरीदने के लिए सरकार 80% तक वित्तीय सहायता देती है, जो अधिकतम 8 लाख रुपये तक हो सकती है। साथ ही इसमें ट्रेनिंग भी दी जाती है। एक महिला को 15 दिन की ट्रेनिंग देकर ड्रोन पायलट बनाया जाता है और दूसरी महिला को 5 दिन की ट्रेनिंग देकर ड्रोन असिस्टेंट बनाया जाता है जो मरम्मत और तकनीकी काम संभालती है। इससे महिलाओं को खेती से जुड़े नए रोजगार मिलते हैं और गांवों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बढ़ता है।
सरकार द्वारा लखपति दीदी योजना पर जोर दिया जा रहा है। इस योजना का लक्ष्य यह है कि ग्रामीण SHG समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय इतनी बढ़े कि उनके परिवार की सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये हो जाए। ऐसी महिलाओं को “लखपति दीदी” कहा जाता है। इसका मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं है बल्कि महिलाओं को बिजनेस की समझ, वित्तीय साक्षरता और नेतृत्व की क्षमता देना भी है।
सरकार का लक्ष्य है कि देश में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाई जाएं। इसी लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए जनवरी 2026 में एक राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत 50 हजार कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के जरिए 50 लाख SHG महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस योजना की निगरानी के लिए LokOS ऐप और डिजिटल आजीविका रजिस्टर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाए गए हैं ताकि महिलाओं की आय को रियल टाइम में ट्रैक किया जा सके।
महिलाओं को बाजार से जोड़ने के लिए बजट 2026-27 में SHE-Mart नाम की नई योजना भी लाई गई है। इसके तहत हर जिले में ऐसे रिटेल स्टोर बनाए जाएंगे जो पूरी तरह SHG समूहों द्वारा चलाए जाएंगे। इन स्टोरों में गांवों की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प, डेयरी उत्पाद और कृषि से जुड़े सामान बेचे जाएंगे। इससे महिलाओं को सीधे बाजार मिलेगा और वे सिर्फ छोटे स्तर पर काम करने के बजाय असली उद्यमी बन सकेंगी।
सरकार ने महिलाओं को सरकारी खरीद यानी गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट में शामिल करने के लिए वोमनिया इनिशिएटिव भी शुरू किया है। यह Government e-Marketplace यानी GeM प्लेटफॉर्म से जुड़ा कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले छोटे व्यवसायों और SHG समूहों को सरकारी विभागों को सामान और सेवाएँ बेचने का मौका देना है।
इसके लिए कई संगठनों के साथ समझौते किए गए हैं, जैसे SEWA भारत, उषा सिलाई स्कूल, UN Women और Women’s Collective Forum। इन साझेदारियों का उद्देश्य महिलाओं को ट्रेनिंग देना, उन्हें GeM प्लेटफॉर्म पर लाना और उन्हें सरकारी खरीद की प्रक्रिया समझाना है। इस पहल का असर यह हुआ कि जनवरी 2026 तक 2 लाख से ज्यादा महिला-नेतृत्व वाले छोटे व्यवसाय GeM पर रजिस्टर हो चुके हैं और उन्हें 80,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर मिल चुके हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2015 में शुरू हुई थी और इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को बिना गारंटी के लोन देना है। इसके तहत 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक कर दिया गया है, खासकर “तरुण प्लस” श्रेणी के लिए। इस योजना का खास फोकस महिलाओं पर भी है और बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना के जरिए अपना छोटा बिजनेस शुरू कर रही हैं।
एक और बड़ी योजना है प्रधानमंत्री जन धन योजना, जिसे 2014 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के हर व्यक्ति को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना था, खासकर गरीब और ग्रामीण लोगों को। इस योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोला जा सकता है। इसके साथ रुपे डेबिट कार्ड मिलता है और 2 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा भी मिलता है।
जरूरत पड़ने पर 10,000 रुपये तक का ओवरड्राफ्ट भी मिल सकता है। महिलाओं के लिए यह योजना बहुत अहम रही क्योंकि पहले बहुत सी महिलाओं का अपना बैंक अकाउंट नहीं होता था और उन्हें वित्तीय मामलों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब उनके पास अपना बैंक अकाउंट है जिसमें सीधे सरकारी योजनाओं का पैसा आता है।
शहरी क्षेत्रों में छोटे व्यापार करने वालों के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना भी काफी अहम है। यह योजना 2020 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी लगाने वाले छोटे विक्रेताओं को बिना गारंटी के लोन देना है। इसमें शुरुआत में 15,000 रुपये तक का लोन मिलता है और समय पर चुकाने पर आगे 25,000 और फिर 50,000 रुपये तक का लोन मिल सकता है। इसमें 7% ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है और डिजिटल पेमेंट करने पर कैशबैक भी मिलता है। इस योजना को 2030 तक बढ़ा दिया गया है और इसका कुल बजट 7,332 करोड़ रुपये रखा गया है। दिसंबर 2025 तक इसमें 1.46 करोड़ से ज्यादा लोन दिए जा चुके हैं।
इसी तरह स्टैंड-अप इंडिया योजना भी महिलाओं को बड़ा बिजनेस शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसमें महिलाओं और SC/ST समुदाय के लोगों को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाता है ताकि वे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, ट्रेडिंग या एग्री-एलाइड सेक्टर में बिजनेस शुरू कर सकें। इस लोन को चुकाने के लिए 7 साल तक का समय दिया जाता है और हर बैंक शाखा को कम से कम एक महिला उद्यमी को लोन देने का लक्ष्य दिया गया है। इसके साथ ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन, ट्रेनिंग और मेंटरशिप की सुविधा भी दी जाती है।
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