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  1. अगर आपने भी इस साल गोल्ड-सिल्वर के म्यूचुअल फंड से कमाया है पैसा? तो जान लीजिए कितना देना पड़ेगा टैक्स

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अगर आपने भी इस साल गोल्ड-सिल्वर के म्यूचुअल फंड से कमाया है पैसा? तो जान लीजिए कितना देना पड़ेगा टैक्स

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 20, 2026, 15:24 IST

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सारांश

सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी के बाद बहुत से निवेशकों ने म्यूचुअल फंड के जरिए अच्छा प्रॉफिट कमाया है। लेकिन यह मुनाफा पूरी तरह आपका नहीं है, इसमें टैक्स का हिस्सा भी शामिल है। आज इसी के बारे में डीटेल में जानने वाले हैं।

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गोल्ड और सिल्वर म्यूचुअल फंड पर लगने वाले टैक्स की बारीकियों को समझना निवेशकों के लिए जरूरी है।

सोना और चांदी हमेशा से भारतीय निवेशकों के पसंदीदा रहे हैं। पिछले कुछ समय में जिस तरह से इन धातुओं की कीमतों में उछाल आया है, उससे म्यूचुअल फंड और ETF के जरिए निवेश करने वालों की चांदी हो गई है। लेकिन जब बात इस मुनाफे को अपनी जेब में रखने की आती है, तो इनकम टैक्स विभाग का नियम सामने आ जाता है। बहुत से निवेशकों को लगता है कि गोल्ड म्यूचुअल फंड पर भी इक्विटी यानी शेयर वाले म्यूचुअल फंड की तरह ही टैक्स लगता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसके नियम थोड़े अलग हैं और साल 2024 के बजट के बाद इसमें कई बड़े बदलाव हुए हैं जो साल 2026 में भी लागू हैं।

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शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और टैक्स स्लैब का चक्कर

अगर आपने गोल्ड या सिल्वर के म्यूचुअल फंड खरीदे हैं और उन्हें आप एक तय समय से पहले बेच देते हैं, तो उससे होने वाली कमाई को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन यानी STCG माना जाता है। जिसमें 20% के टैक्स का प्रावधान है। गोल्ड और सिल्वर ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के मामले में यह समय सीमा 12 महीने की है, जबकि म्यूचुअल फंड यानी फंड ऑफ फंड्स के लिए यह सीमा 24 महीने की है। अगर आप इस समय के अंदर अपना निवेश बेचकर मुनाफा कमाते हैं, तो वह पैसा आपकी कुल सालाना इनकम में जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद आपकी जो भी टैक्स स्लैब होगी, उसी हिसाब से आपको टैक्स देना पड़ेगा।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में कितना लगेगा टैक्स

जब आप अपने गोल्ड या सिल्वर म्यूचुअल फंड को 24 महीने (2 साल) से ज्यादा समय तक होल्ड करके रखते हैं, तो वह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG के दायरे में आता है। गोल्ड ETF के लिए यह सीमा सिर्फ 12 महीने की है। अच्छी बात यह है कि लॉन्ग टर्म होने पर आपको अपनी भारी-भरकम टैक्स स्लैब से राहत मिल जाती है। नए नियमों के मुताबिक, गोल्ड और सिल्वर फंड से होने वाले लॉन्ग टर्म मुनाफे पर फ्लैट 12.5 पर्सेंट की दर से टैक्स लगता है। हालांकि, पहले इसमें इंडेक्सेशन का फायदा मिलता था जिससे महंगाई के हिसाब से निवेश की वैल्यू बढ़ाकर टैक्स कम हो जाता था, लेकिन अब वह सुविधा खत्म कर दी गई है। अब आपको सीधे मुनाफे पर 12.5 पर्सेंट टैक्स देना होगा।

क्या कोई ऐसी लिमिट है जिस पर टैक्स नहीं देना होगा

इक्विटी म्यूचुअल फंड में साल भर में 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं देना होता, लेकिन गोल्ड और सिल्वर फंड के मामले में ऐसी कोई छूट की लिमिट नहीं है। यहां आपको पहले रुपये के मुनाफे से ही टैक्स देना शुरू करना होता है। हालांकि, अगर आपकी कुल सालाना इनकम (म्यूचुअल फंड के मुनाफे को मिलाकर) टैक्स छूट की बेसिक लिमिट से कम है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर न्यू टैक्स रिजीम में आपकी कुल कमाई साल भर में 12 लाख रुपये से कम बैठ रही है, तो आप टैक्स से बच सकते हैं। निवेश के फैसले लेते वक्त इन तारीखों और नियमों का ध्यान रखना आपके नेट प्रॉफिट को बढ़ाने में मदद कर सकता है। टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना भी आपको फायदा करा सकता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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