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  1. Gold ETF में निवेश एक ही झटके में 78% क्यों लुढ़क गया? यहां समझिए असली कारण

पर्सनल फाइनेंस

Gold ETF में निवेश एक ही झटके में 78% क्यों लुढ़क गया? यहां समझिए असली कारण

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 11, 2026, 15:04 IST

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सारांश

जनवरी में Gold ETF में रिकॉर्ड ₹24040 करोड़ का निवेश आया था, लेकिन फरवरी में यह घटकर ₹5,255 करोड़ रह गया। यानी महीने-दर-महीने आधार पर लगभग 78% की गिरावट दिखी। यह गिरावट उस समय आई जब भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में भी कुछ नरमी देखने को मिली।

Gold ETF

Gold ETF निवेश घटने की एक वजह मुनाफावसूली हो सकती है।

Gold ETF: क्या निवेशकों के बीच गोल्ड में निवेश का जोश खत्म हो चुका है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि फरवरी महीने में गोल्ड ETF में निवेश अचानक 78 फीसदी लुढ़क गया। जिसके बाद अब यह चर्चा हो रही है कि शायद गोल्ड में रैली खत्म हो गई है, जिसके चलते इसमें निवेशकों की दिलचस्पी भी कम हो रही है। आइए जानते हैं क्या है गोल्ड ETF में निवेश घटने के मायने।
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Gold ETF में 78 फीसदी घटा निवेश

जनवरी में गोल्ड ETF में रिकॉर्ड ₹24040 करोड़ का निवेश आया था, लेकिन फरवरी में यह घटकर ₹5,255 करोड़ रह गया। यानी महीने-दर-महीने आधार पर लगभग 78% की गिरावट दिखी। यह गिरावट उस समय आई जब भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में भी कुछ नरमी देखने को मिली।

गोल्ड में अचानक क्यों गिरा निवेश

गोल्ड ETF में निवेश घटने की एक वजह मुनाफावसूली हो सकती है। सोने ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिया है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से इसमें सुस्ती नजर आ रही है। ऐसे में कई निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। सेंटीमेंट बिगड़ने के चलते गोल्ड ETF में भी दबाव देखने को मिल रहा है।

बता दें कि साल की शुरुआत में MCX पर सोने की कीमत करीब ₹1.9 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि आज यह 162312 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर ट्रेड कर रहा था।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जनवरी में जो भारी निवेश आया था, वह असामान्य था। साल की शुरुआत में निवेशक अक्सर अपने पोर्टफोलियो को दोबारा बैलेंस करते हैं और उस समय सोने की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर थीं, इसलिए गोल्ड ETF में ज्यादा पैसा आया। फरवरी में जो गिरावट दिखी, वह असल में उसी असाधारण उछाल के बाद सामान्य स्थिति में वापसी है।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि फरवरी की गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशक अब सोने से दूर जा रहे हैं। जनवरी का आंकड़ा बहुत असाधारण था, इसलिए फरवरी का आंकड़ा तुलना में कमजोर दिख रहा है। असल में फरवरी में निवेश एक सामान्य और स्थिर स्तर पर वापस आया है।

एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि साल की शुरुआत में निवेशक अपने निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास में बांटते हैं, इसलिए उस समय गोल्ड ETF में ज्यादा पैसा आया और फरवरी के आंकड़े तुलना में कमजोर दिखाई दिए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोना अभी भी निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है। बाजार में अनिश्चितता, जियो-पॉलिटिकल तनाव और उतार-चढ़ाव के समय सोना अक्सर सुरक्षा देने वाला एसेट माना जाता है। गोल्ड ETF की खास बात यह है कि इसमें निवेश करना आसान होता है, इसमें लिक्विडिटी रहती है और कीमतें पारदर्शी होती हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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