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EPFO का बड़ा फैसला: अब ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट से बदलेगा नाम और जेंडर, जानिए पूरा नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 07, 2026, 17:22 IST

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सारांश

जनवरी 2025 में EPFO ने Joint Declaration Process को आसान बनाने के लिए एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें उन दस्तावेजों की सूची दी गई थी, जिनके जरिए नाम, जेंडर, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, माता-पिता या जीवनसाथी का नाम, वैवाहिक स्थिति, नौकरी जॉइन करने और छोड़ने की तारीख जैसी जानकारियों में बदलाव किया जा सकता है।

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EPFO ने इस संबंध में 26 दिसंबर 2025 को एक आधिकारिक सूचना जारी की है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने ट्रांसजेंडर लोगों के लिए एक अहम और सकारात्मक कदम उठाया है। अब EPFO अपने रिकॉर्ड में नाम और जेंडर बदलने के लिए ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट/कार्ड को वैलिड दस्तावेज के रूप में स्वीकार करेगा। यह सर्टिफिकेट नेशनल पोर्टल फॉर ट्रांसजेंडर पर्संस के जरिए जारी किया जाता है। EPFO ने इस संबंध में 26 दिसंबर 2025 को एक आधिकारिक सूचना जारी की है।

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क्या है नियम

EPFO के मुताबिक, सक्षम प्राधिकारी ने यह फैसला लिया है कि ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट या कार्ड को नाम और जेंडर में बदलाव के लिए वैलिड दस्तावेज माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब ट्रांसजेंडर कर्मचारी अपने EPFO रिकॉर्ड को अपनी पहचान के अनुरूप अपडेट कर सकेंगे, बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के।

जनवरी 2025 में EPFO ने Joint Declaration Process को आसान बनाने के लिए एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें उन दस्तावेजों की सूची दी गई थी, जिनके जरिए नाम, जेंडर, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, माता-पिता या जीवनसाथी का नाम, वैवाहिक स्थिति, नौकरी जॉइन करने और छोड़ने की तारीख जैसी जानकारियों में बदलाव किया जा सकता है। अब ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट को भी इसी सूची में शामिल कर लिया गया है।

ऑनलाइन प्रोफाइल अपडेट हुआ आसान

EPFO ने ऑनलाइन प्रोफाइल अपडेट प्रक्रिया को भी सरल किया है और सदस्यों को तीन कैटेगरी में बांटा है। पहली कैटेगरी में वे सदस्य आते हैं जिनका UAN आधार के जरिए 1 अक्टूबर 2017 के बाद जनरेट हुआ है। दूसरी कैटेगरी में वे सदस्य हैं जिनका UAN 1 अक्टूबर 2017 से पहले बना था, लेकिन जिनका नाम, जन्मतिथि, जेंडर और आधार UIDAI से वेरिफाइड है। तीसरी कैटेगरी में वे सदस्य आते हैं जिनका UAN आधार से वेरिफाइड नहीं है, जिनके पास UAN नहीं है या जो मृत सदस्यों से जुड़े मामले हैं।

EPFO ने यह भी साफ किया है कि किन स्तरों पर किस तरह के बदलाव किए जा सकते हैं। जिन कर्मचारियों का UAN आधार से वेरिफाइड है, वे कई जानकारियां बिना कोई दस्तावेज अपलोड किए खुद ही ऑनलाइन अपडेट कर सकते हैं। इसमें जन्मतिथि, जेंडर, राष्ट्रीयता, माता-पिता का नाम, जीवनसाथी का नाम, नौकरी जॉइन और छोड़ने की तारीख शामिल है। ऐसे मामलों में न तो दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत होती है और न ही नियोक्ता की मंजूरी की।

जिन सदस्यों को दस्तावेज जमा करने की जरूरत पड़ती है, वे अब यह काम DigiLocker के जरिए भी कर सकते हैं। कुल मिलाकर, EPFO का यह कदम न सिर्फ प्रक्रियाओं को आसान बनाता है, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय को उनकी पहचान के साथ सम्मानजनक और सुविधाजनक तरीके से सरकारी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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