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EEE, EET और ETE क्या है? समझ लें क्योंकि गलत टैक्स प्लानिंग आपकी जेब पर पड़ सकता है भारी

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड December 29, 2025, 19:07 IST

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सारांश

EEE vs EET vs ETE: EEE सबसे फायदेमंद कैटेगरी मानी जाती है। इसमें निवेश, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा सब टैक्स फ्री होता है। इसके तहत आने वाले इनवेस्टमेंट ऑप्शंस यहां बताए गए हैं।

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अगर आप इन नियमों को समझ लेते हैं, तो भविष्य में टैक्स का झटका नहीं लगेगा।

EEE vs EET vs ETE: टैक्स बचाना सिर्फ साल के आखिर में पैसा बचाने की बात नहीं है, बल्कि सही निवेश चुनने की समझ भी है। भारत में जितने भी टैक्स-सेविंग निवेश विकल्प हैं, वे तीन कैटेगरी में आते हैं – EEE, EET और ETE। ये नाम थोड़े मुश्किल लगते हैं, लेकिन असल में ये बताते हैं कि निवेश करते समय, रिटर्न कमाते समय और पैसा निकालते समय टैक्स लगेगा या नहीं। अगर आप इन नियमों को समझ लेते हैं, तो भविष्य में टैक्स का झटका नहीं लगेगा और आपकी सेविंग बेहतर होगी। चलिए समझते हैं क्या हैं इसके मायने।
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EEE (Exempt–Exempt–Exempt)

EEE सबसे फायदेमंद कैटेगरी मानी जाती है। इसमें निवेश, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा सब टैक्स फ्री होता है। इसके तहत आने वाले इनवेस्टमेंट ऑप्शंस यहां बताए गए हैं।

Public Provident Fund (PPF)

PPF में आप सालाना ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकते हैं, जिस पर 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। अभी इसमें करीब 7.1% ब्याज मिल रहा है और यह ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री है। 15 साल बाद मिलने वाला पूरा पैसा (मूलधन + ब्याज) भी टैक्स फ्री होता है। यानी अगर आप 15 साल तक हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं, तो करीब ₹40 लाख का फंड बन सकता है, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

Employees’ Provident Fund (EPF)

EPF में कर्मचारी का योगदान (₹1.5 लाख तक) टैक्स छूट के दायरे में आता है। ब्याज भी टैक्स फ्री होता है, बशर्ते सालाना योगदान ₹2.5 लाख से ज्यादा न हो। 5 साल की नौकरी पूरी होने के बाद EPF से पैसा निकालने पर भी टैक्स नहीं लगता।

Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)

बेटी के नाम पर इस स्कीम में सालाना ₹1.5 लाख तक निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। इसमें करीब 8.2% ब्याज मिलता है, जो पूरी तरह टैक्स फ्री है। मैच्योरिटी या शादी के समय मिलने वाला पूरा पैसा भी टैक्स फ्री होता है। EEE कैटेगरी में किसी भी स्टेज पर टैक्स नहीं लगता। यह लंबे समय के लिए सुरक्षित और सबसे बेहतर टैक्स-सेविंग विकल्प है।

EET (Exempt–Exempt–Taxed)

EET में निवेश और उस पर मिलने वाला रिटर्न टैक्स फ्री होता है, लेकिन जब आप पैसा निकालते हैं, तब टैक्स लगता है। इसके तहत आने वाले इनवेस्टमेंट ऑप्शन ये रहे।

National Pension System (NPS)

NPS में आप 80C के तहत ₹1.5 लाख और अतिरिक्त ₹50,000 (80CCD(1B)) तक टैक्स छूट ले सकते हैं। निवेश के दौरान पैसा टैक्स फ्री बढ़ता है। लेकिन 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट के समय नियम है कि कम से कम 40% रकम से पेंशन खरीदनी होगी, और उस पेंशन पर टैक्स लगेगा। बाकी 60% रकम टैक्स फ्री निकाली जा सकती है। यह रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अच्छा है, लेकिन ध्यान रखें कि कुछ हिस्सा टैक्स के दायरे में आएगा।

ETE (Exempt–Taxed–Exempt)

ETE में निवेश पर टैक्स छूट मिलती है, लेकिन निवेश के दौरान मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है। मैच्योरिटी पर मूलधन टैक्स फ्री होता है।

Tax-Saving Fixed Deposit (FD)

इस FD में ₹1.5 लाख तक निवेश पर 80C की छूट मिलती है। लेकिन हर साल मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम में जुड़ता है और टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। मैच्योरिटी पर सिर्फ मूलधन टैक्स फ्री होता है।

National Savings Certificate (NSC)

NSC में निवेश पर 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। ब्याज हर साल टैक्सेबल होता है, लेकिन पहले के वर्षों का ब्याज दोबारा निवेश माना जाता है और उस पर फिर से 80C की छूट मिल जाती है। आखिरी साल का ब्याज टैक्सेबल होता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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