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Credit Card यूजर्स के लिए 5 इनकम-टैक्स नियम, 1 अप्रैल 2026 से हो सकते हैं लागू

rajeev-kumar

3 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 18:34 IST

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सारांश

Credit Card: पहला नियम यह है कि बड़े अमाउंट वाले क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट की जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल कैश के अलावा किसी भी तरीके से (जैसे UPI, बैंक ट्रांसफर, चेक आदि) चुकाता है, तो बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी इसकी रिपोर्ट करेगी।

Credit Card

Credit Card: ड्राफ्ट नियमों में क्रेडिट कार्ड यूजर्स से जुड़े कम से कम 5 अहम बदलाव बताए गए हैं।

Credit Card: आयकर विभाग ने हाल ही में Income-tax Department द्वारा ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 जारी किए हैं। इन नियमों पर अलग-अलग पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे और अंतिम मंजूरी के बाद ये 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकते हैं। इसके बाद पुराने इनकम टैक्स रूल्स 1962 की जगह नए नियम लागू होंगे। इन ड्राफ्ट नियमों में क्रेडिट कार्ड यूजर्स से जुड़े कम से कम 5 अहम बदलाव बताए गए हैं, जो अप्रैल 2026 से लागू हो सकते हैं।
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पहला नियम

पहला नियम यह है कि बड़े अमाउंट वाले क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट की जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल कैश के अलावा किसी भी तरीके से (जैसे UPI, बैंक ट्रांसफर, चेक आदि) चुकाता है, तो बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी इसकी रिपोर्ट करेगी।

इसके अलावा, अगर ₹1 लाख या उससे ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल कैश में चुकाया जाता है, तो उसकी जानकारी भी रिपोर्ट होगी। हालांकि यह पूरी तरह नया नियम नहीं है, क्योंकि ऐसा प्रावधान पहले से इनकम टैक्स रूल्स 1962 में मौजूद है।

दूसरा नियम

दूसरे नियम के तहत अब क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को एड्रेस प्रूफ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक अगर क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट तीन महीने से पुराना नहीं है, तो उसे PAN कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए पते के प्रमाण के रूप में मान्य किया जाएगा।

तीसरा नियम

तीसरा अहम बदलाव यह है कि अब इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग को आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के तौर पर अनुमति दी गई है। यानी टैक्स भरने के लिए डिजिटल पेमेंट के विकल्प और आसान हो जाएंगे।

चौथा नियम

चौथा नियम उन कर्मचारियों से जुड़ा है जिन्हें कंपनी की तरफ से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है। अगर कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य उस कार्ड से खर्च करते हैं और वह खर्च कंपनी द्वारा चुकाया या रिइम्बर्स किया जाता है, तो उसे परक्विजिट (Perquisite) माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि टैक्स की गणना करते समय उस लाभ की कुल कीमत में से वह रकम घटा दी जाएगी, जो कर्मचारी ने खुद पहले ही चुका दी हो।

लेकिन अगर वही खर्च पूरी तरह ऑफिस के काम के लिए किया गया है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, बशर्ते दो शर्तें पूरी हों। पहली, नियोक्ता उस खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखे, जैसे खर्च की तारीख और किस काम के लिए किया गया। दूसरी, नियोक्ता यह प्रमाण-पत्र दे कि खर्च सिर्फ और सिर्फ सरकारी या ऑफिस के काम के लिए हुआ था।

पांचवां नियम

पांचवां और आखिरी बड़ा बदलाव यह है कि अब क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय PAN नंबर देना अनिवार्य होगा। चाहे बैंक हो या कोई दूसरी क्रेडिट कार्ड कंपनी, बिना PAN के क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेगा।

इन प्रस्तावित नियमों का मकसद लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना, बड़े खर्चों पर नजर रखना और टैक्स सिस्टम को ज्यादा मजबूत बनाना है। अगर ये नियम मंजूर हो जाते हैं, तो 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर सीधा असर पड़ेगा।

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लेखकों के बारे में

rajeev-kumar
Rajeev Kumar Upstox में डेप्युटी एडिटर हैं और पर्सनल फाइनेंस की स्टोरीज कवर करते हैं। पत्रकार के तौर पर 11 साल के करियर में उन्होंने इनकम टैक्स, म्यूचुअल फंड्स, क्रेडिट कार्ड्स, बीमा, बचत और पेंशन जैसे विषयों पर 2,000 से ज्यादा आर्टिकल लिखे हैं। वह 1% क्लब, द फाइनेंशल एक्सप्रेस, जी बिजेनस और हिंदुस्तान टाइम्स में काम कर चुके हैं। अपने काम के अलावा उन्हें लोगों से उनके पर्सनल फाइनेंस के सफर के बारे में बात करना और उनके सवालों के जवाब देना पसंद है।

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