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  1. 26 हफ्तों के मातृत्व अवकाश से वर्क-फ्रॉम-होम तक, महिलाओं को नए कानून में कई सुविधाएं

पर्सनल फाइनेंस

26 हफ्तों के मातृत्व अवकाश से वर्क-फ्रॉम-होम तक, महिलाओं को नए कानून में कई सुविधाएं

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड November 25, 2025, 19:23 IST

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सारांश

Maternity Benefit: नए कानून के अनुसार अगर किसी महिला ने डिलीवरी से पहले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन काम किया है, तो उसे मातृत्व लाभ का अधिकार मिलेगा। मातृत्व अवकाश के दौरान उसे उसके औसत दैनिक वेतन के बराबर भुगतान दिया जाता है।

Code on Social Security

हाल ही में Code on Social Security 2020 का ऐलान किया गया है, जिसमें महिलाओं को केंद्र में रखकर कई मजबूत प्रावधान किए गए हैं।

Code on Social Security, 2020: भारत सरकार ने महिलाओं के लिए नौकरी और कामकाज आसान बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हाल ही में सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 का ऐलान किया गया है, जिसमें महिलाओं को केंद्र में रखकर कई मजबूत प्रावधान किए गए हैं। इनमें 26 हफ्तों का मातृत्व अवकाश, जरूरत पड़ने पर वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा, और कार्यस्थलों पर क्रेच की अनिवार्य व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य यह है कि महिलाएं मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाते हुए बिना किसी परेशानी के अपनी पेशेवर जिंदगी आगे बढ़ा सकें।
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मातृत्व लाभ (Maternity Benefit)

नए कानून के अनुसार अगर किसी महिला ने डिलीवरी से पहले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन काम किया है, तो उसे मातृत्व लाभ का अधिकार मिलेगा। मातृत्व अवकाश के दौरान उसे उसके औसत दैनिक वेतन के बराबर भुगतान दिया जाता है। कुल मातृत्व अवकाश 26 हफ्तों का है, जिसमें से अधिकतम 8 हफ्ते वह डिलीवरी से पहले ले सकती है। जो महिलाएं 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती हैं या सरोगेसी के माध्यम से मातृत्व प्राप्त करती हैं, उन्हें 12 हफ्तों का भुगतान वाला मातृत्व अवकाश मिलता है।

वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

मातृत्व अवकाश के बाद नौकरी पर लौटने वाली महिलाओं के लिए वर्क-फ्रॉम-होम का विकल्प कानून ने आसान कर दिया है। अगर काम की प्रकृति अनुमति देती है, तो नियोक्ता और कर्मचारी की आपसी सहमति से महिला घर से काम कर सकती है। यह सुविधा महिलाओं को घर और नौकरी दोनों जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करती है।

डिलीवरी के प्रूफ के लिए आसान सर्टिफिकेशन

गर्भावस्था, प्रसव, गर्भपात या संबंधित बीमारी का प्रमाण देने की प्रक्रिया अब सरल हो गई है। अब ये प्रमाणपत्र न सिर्फ रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर, बल्कि आशा वर्कर, प्रशिक्षित नर्स या मिडवाइफ भी जारी कर सकती हैं।

मेडिकल बोनस

अगर नियोक्ता मुफ्त प्री-नेटल और पोस्ट-नेटल मेडिकल सुविधा नहीं देता है, तो महिला कर्मचारी को ₹3500 का मेडिकल बोनस देना आवश्यक है। इस राशि का उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित मेडिकल खर्चों में मदद करना है।

स्तनपान अवकाश (Nursing Breaks)

बच्चे के जन्म के बाद काम पर लौटने वाली महिला को हर दिन दो स्तनपान ब्रेक लेने का अधिकार है। यह सुविधा तब तक मिलती है जब तक बच्चा 15 महीने का नहीं हो जाता।

क्रेच सुविधा

50 या अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में क्रेच सुविधा देना अनिवार्य है। यह पुरुष और महिला दोनों कर्मचारियों के बच्चों के लिए लागू होता है। महिला कर्मचारी को दिन में चार बार क्रेच जाने की अनुमति होगी, जिसमें आराम का समय भी शामिल है। कई संस्थान मिलकर एक साझा क्रेच सुविधा भी बना सकते हैं। अगर नियोक्ता क्रेच सुविधा नहीं देता, तो उसे प्रति बच्चे कम से कम ₹500 प्रति महीने क्रेच भत्ता देना होगा, अधिकतम दो बच्चों तक।

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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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