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  1. Cheque Bounce Rules: चेक बाउंस होने पर क्या है कानून, सजा से ट्रायल तक जानिए पूरे नियम

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Cheque Bounce Rules: चेक बाउंस होने पर क्या है कानून, सजा से ट्रायल तक जानिए पूरे नियम

Upstox

4 min read | अपडेटेड February 12, 2026, 18:26 IST

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सारांश

अगर कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते से किसी कर्ज या देनदारी के पूरे या आंशिक भुगतान के लिए चेक जारी करता है और वह चेक खाते में पर्याप्त धन न होने या बैंक से तय सीमा से अधिक राशि होने के कारण बाउंस हो जाता है, तो यह आपराधिक अपराध माना जाता है।

Cheque Bounce

बैंक से चेक बाउंस की सूचना मिलने के तीस दिनों के भीतर भुगतान की मांग करते हुए लिखित नोटिस भेजना होता है।

भारत में चेक से भुगतान करना आज भी आम बात है। लेकिन अगर खाते में पर्याप्त पैसा न हो तो चेक बाउंस हो सकता है। ऐसे मामलों में अक्सर कानूनी विवाद होते हैं। चेक बाउंस से जुड़े नियम Negotiable Instruments Act, 1881 में दिए गए हैं। खासतौर पर धारा 138 से 143A तक यह बताया गया है कि अपराध कब माना जाएगा, शिकायत कैसे होगी, किसकी जिम्मेदारी होगी और सजा क्या है।

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1. चेक बाउंस एक आपराधिक अपराध है (धारा 138)

अगर कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते से किसी कर्ज या देनदारी के पूरे या आंशिक भुगतान के लिए चेक जारी करता है और वह चेक खाते में पर्याप्त धन न होने या बैंक से तय सीमा से अधिक राशि होने के कारण बाउंस हो जाता है, तो यह आपराधिक अपराध माना जाता है। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें जरूरी हैं। चेक को जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर या उसकी वैधता अवधि के भीतर, जो भी पहले हो, बैंक में पेश करना जरूरी है।

बैंक से चेक बाउंस की सूचना मिलने के तीस दिनों के भीतर भुगतान की मांग करते हुए लिखित नोटिस भेजना होता है। नोटिस मिलने के पंद्रह दिनों के अंदर अगर चेक जारी करने वाला भुगतान नहीं करता, तभी मामला अपराध बनता है। दोष साबित होने पर अधिकतम दो साल की जेल या चेक राशि के दोगुने तक जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।

2. कानून चेक पाने वाले के पक्ष में मानता है (धारा 139, 146 और 140)

कानून यह मानकर चलता है कि चेक पाने वाले व्यक्ति ने वह चेक किसी कर्ज या देनदारी के बदले ही लिया है, जब तक कि आरोपी इसके विपरीत साबित न कर दे। बैंक की ओर से जारी किया गया चेक बाउंस का स्लिप या मेमो, बाउंस होने का प्राथमिक सबूत माना जाता है।

धारा 140 के अनुसार, यह बचाव नहीं माना जाएगा कि चेक जारी करने वाले को यह भरोसा था कि चेक बाउंस नहीं होगा। इसका मतलब है कि आरोपी पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह साबित करे कि वह दोषी नहीं है।

3. कंपनी के मामले में जिम्मेदारी (धारा 141)

अगर किसी कंपनी ने चेक जारी किया है और वह बाउंस हो जाता है, तो कंपनी के साथ-साथ उस समय कंपनी के कामकाज की जिम्मेदारी संभाल रहे सभी अधिकारी भी दोषी माने जाएंगे।

कोई व्यक्ति तभी जिम्मेदारी से बच सकता है अगर वह साबित कर दे कि यह अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ, या उसने इसे रोकने के लिए पूरी सावधानी बरती थी। यहां “कंपनी” में फर्म और अन्य संस्थाएं भी शामिल हैं। "डायरेक्टर” में फर्म के पार्टनर भी आते हैं। सरकार द्वारा नामित पब्लिक कंपनी के डायरेक्टर इस जिम्मेदारी से मुक्त होते हैं।

4. शिकायत दर्ज करना और अदालत की प्रक्रिया (धारा 142 और 142A)

धारा 138 के तहत मामला तभी चलेगा जब चेक पाने वाला व्यक्ति लिखित शिकायत दर्ज करे। शिकायत आमतौर पर उस तारीख से एक महीने के भीतर करनी होती है, जब 15 दिन की भुगतान अवधि खत्म हो जाती है। अगर देरी हो जाए और उचित कारण हो, तो अदालत देरी माफ कर सकती है। इन मामलों की सुनवाई केवल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ही कर सकते हैं। धारा 142A के तहत, एक ही व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर चल रहे मामलों को एक ही अदालत में ट्रांसफर किया जा सकता है, ताकि फैसलों में एकरूपता बनी रहे।

5. ट्रायल की प्रक्रिया और अंतरिम मुआवजा (धारा 143 और 143A)

चेक बाउंस मामलों की सुनवाई आमतौर पर समरी ट्रायल से होती है, ताकि मामले जल्दी निपटें। कोशिश रहती है कि मामला 6 महीने के भीतर खत्म हो जाए। समरी ट्रायल में सजा अधिकतम 1 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है। लेकिन जरूरत पड़ने पर मजिस्ट्रेट इसे सामान्य ट्रायल में बदल सकते हैं।

अदालत आरोपी को चेक राशि का 20% तक अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दे सकती है। यह राशि 60 दिनों के भीतर देनी होती है, जिसे उचित कारण पर 30 दिन और बढ़ाया जा सकता है। अगर आरोपी बाद में बरी हो जाता है, तो शिकायतकर्ता को वह अंतरिम मुआवजा ब्याज सहित (RBI बैंक रेट के अनुसार) वापस करना होगा। यह राशि वसूली के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 421 के तहत जुर्माने की तरह वसूली जा सकती है।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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