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  1. बैंक लॉकर में चोरी या नुकसान पर कितना मिलेगा पैसा? निर्मला सीतारमण ने संसद में दी बड़ी जानकारी

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बैंक लॉकर में चोरी या नुकसान पर कितना मिलेगा पैसा? निर्मला सीतारमण ने संसद में दी बड़ी जानकारी

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 30, 2026, 16:10 IST

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सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बैंक लॉकर के नुकसान पर मुआवजे को लेकर स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि लॉकर में रखे सामान के नुकसान की स्थिति में बैंक सालाना किराये का 100 गुना मुआवजा देंगे।

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बैंक लॉकर के सुरक्षा नियमों और मुआवजे को लेकर वित्त मंत्री ने संसद में अहम जानकारी दी है।

बैंक लॉकर में रखे अपने गहनों और कीमती सामान की सुरक्षा को लेकर अक्सर लोगों के मन में चिंता रहती है। इसी चिंता को दूर करने और नियमों को स्पष्ट करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक बड़ी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अगर किसी वजह से बैंक लॉकर में रखे सामान का नुकसान होता है, तो बैंक की जिम्मेदारी कितनी होगी और ग्राहकों को कितना मुआवजा मिलेगा। सरकार ने इसके लिए एक खास फार्मूला तैयार किया है जो बैंक और ग्राहक दोनों के हितों की रक्षा करता है।

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मुआवजे का क्या है फार्मूला?

संसद में बोलते हुए वित्त मंत्री ने साफ किया कि बैंक लॉकर के नुकसान की स्थिति में मुआवजा सालाना किराये का 100 गुना तय किया गया है। इसका मतलब है कि अगर आप अपने लॉकर के लिए साल में 3,000 रुपये किराया देते हैं, तो नुकसान होने पर बैंक आपको 3 लाख रुपये तक का मुआवजा देने के लिए बाध्य होगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि नुकसान की भरपाई के लिए एक पारदर्शी और तय व्यवस्था बनी रहे। इससे ग्राहकों को यह पता रहता है कि रिस्क की स्थिति में उन्हें कितनी राशि वापस मिल सकती है। यह पूरी व्यवस्था आरबीआई के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत काम करती है।

गोपनीयता का रखा गया है पूरा ध्यान?

अक्सर लोग सवाल उठाते हैं कि क्या बैंक लॉकर में रखे हर सामान का बीमा नहीं हो सकता। इस पर वित्त मंत्री ने बहुत ही तार्किक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग नियमों के अनुसार, बैंक को यह जानने का हक नहीं है कि ग्राहक ने लॉकर के अंदर क्या रखा है। यह पूरी तरह से बैंकिंग गोपनीयता यानी कॉन्फिडेंशियल नियमों का हिस्सा है। अगर बैंक ग्राहकों से उनके कीमती सामान की लिस्ट या उसकी कीमत पूछने लगेंगे, तो यह उनकी प्राइवेसी में दखल देना होगा। यही वजह है कि बैंक सामान का असेसमेंट नहीं करते हैं और न ही उन्हें इसकी जानकारी होती है।

इंश्योरेंस और वैल्यूएशन की चुनौतियां

निर्मला सीतारमण ने यह भी समझाया कि हर आइटम का अलग-अलग वैल्यूएशन करना और उसका इंश्योरेंस करवाना फिलहाल मुमकिन नहीं है। अगर कोई ग्राहक चाहता है कि उसे उसके सामान की पूरी कीमत के बराबर कवर मिले, तो इसके लिए उसे बैंक को बताना होगा कि लॉकर में क्या-क्या रखा है। लेकिन मौजूदा बैंकिंग कानून इसकी इजाजत नहीं देते हैं। इसलिए सरकार ने एक स्टैंडर्ड मुआवजा ढांचा लागू किया है, जो सामान की कीमत के बजाय लॉकर के किराये पर आधारित है। यह व्यवस्था देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में एक समान रूप से लागू होती है, जिससे किसी भी तरह के भेदभाव की गुंजाइश नहीं रहती।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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