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  1. Advance Tax की अंतिम किस्त 15 मार्च तक भरना जरूरी, वरना देना होगा ब्याज

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Advance Tax की अंतिम किस्त 15 मार्च तक भरना जरूरी, वरना देना होगा ब्याज

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 13, 2026, 17:31 IST

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सारांश

Advance Tax का मतलब है कि आप पूरे साल का इनकम टैक्स एक साथ रिटर्न भरते समय देने के बजाय साल के दौरान ही किस्तों में जमा कर देते हैं। यानी जैसे-जैसे आपकी कमाई होती है, वैसे-वैसे टैक्स भी धीरे-धीरे जमा किया जाता है।

Advance Tax

Advance Tax: कई बार सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को भी एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है।

Advance Tax की चौथी और आखिरी किस्त भरने की डेडलाइन खत्म होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। इसकी आखिरी तारीख 15 मार्च है। अगर किसी व्यक्ति पर अभी भी टैक्स बकाया है, तो उसे इस तारीख तक जमा करना जरूरी है, नहीं तो बाद में अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है। एडवांस टैक्स का मतलब है कि आप पूरे साल का इनकम टैक्स एक साथ रिटर्न भरते समय देने के बजाय साल के दौरान ही किस्तों में जमा कर देते हैं। यानी जैसे-जैसे आपकी कमाई होती है, वैसे-वैसे टैक्स भी धीरे-धीरे जमा किया जाता है।

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एडवांस टैक्स कब देना है जरूरी

एडवांस टैक्स तब देना जरूरी हो जाता है जब पूरे साल की आपकी कुल टैक्स देनदारी 10000 रुपये से ज्यादा हो, और उसमें से TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स), TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) और अन्य टैक्स क्रेडिट घटाने के बाद भी इतना टैक्स बचता हो। ऐसे मामलों में आपको एडवांस टैक्स देना पड़ता है।

यह नियम खास तौर पर उन लोगों पर ज्यादा लागू होता है जिनकी आय पर ऑटोमैटिक टैक्स कटौती नहीं होती। जैसे फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, या अपना बिजनेस और प्रोफेशन चलाने वाले लोग। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को शेयर या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन, किराए से आय, या डिपॉजिट और अन्य निवेश से ब्याज मिलता है और टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ऊपर चली जाती है, तो उन्हें भी एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है।

सैलरीड कर्मचारियों को भी देना पड़ सकता है एडवांस टैक्स

कई बार सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को भी एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसा तब होता है जब उनकी सैलरी के अलावा दूसरी कमाई भी होती है, जिस पर पूरा TDS नहीं कटा हो। जैसे शेयर बाजार से मुनाफा, क्रिप्टो ट्रेडिंग से कमाई, किराए की आय या कोई साइड बिजनेस।

हालांकि एक अहम छूट भी है। 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के रेजिडेंट सीनियर सिटीजन, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स देने की जरूरत नहीं होती।

जो टैक्सपेयर्स प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम चुनते हैं, उनके लिए थोड़ा अलग नियम है। उन्हें साल में चार किस्तों में टैक्स देने की जरूरत नहीं होती। वे पूरा एडवांस टैक्स एक ही बार 15 मार्च तक जमा कर सकते हैं। यह व्यवस्था आमतौर पर छोटे कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के लिए होती है।

एडवांस टैक्स का शेड्यूल

एडवांस टैक्स का एक तय शेड्यूल होता है। 15 जून तक कम से कम 15% टैक्स देना होता है। 15 सितंबर तक कुल 45% टैक्स जमा होना चाहिए। 15 दिसंबर तक यह 75% हो जाना चाहिए। और 15 मार्च तक पूरे साल का 100% टैक्स एडवांस टैक्स के रूप में जमा कर देना होता है।

एडवांस टैक्स नहीं भरने पर क्या होगा?

अगर कोई व्यक्ति समय पर एडवांस टैक्स नहीं भरता है, तो उसे ब्याज देना पड़ सकता है। इनकम टैक्स कानून के तहत सेक्शन 234B और 234C के तहत हर महीने लगभग 1% ब्याज लग सकता है। अगर 15 मार्च तक कुल टैक्स का 90% भी जमा नहीं हुआ है, तो यह ब्याज तब तक लगता रहता है जब तक पूरा टैक्स साफ नहीं हो जाता।

इसलिए जिन लोगों की कमाई के कई सोर्स हैं, उनके लिए बेहतर है कि वे 15 मार्च से पहले अपनी टैक्स देनदारी चेक कर लें। इससे अतिरिक्त ब्याज से बचा जा सकता है और बाद में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना भी आसान हो जाता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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