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Aadhaar: मृत्यु के बाद आधार कार्ड बंद कराना क्यों है जरूरी? यहां समझें इसकी पूरी प्रक्रिया

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 19, 2026, 19:59 IST

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सारांश

Aadhaar: आधार का इस्तेमाल बैंक खातों, सरकारी सब्सिडी, पेंशन, मोबाइल नंबर, और कई वित्तीय सेवाओं में होता है। अगर किसी मृत व्यक्ति का आधार सक्रिय रहता है, तो धोखाधड़ी, फर्जी लेन-देन और पहचान की चोरी का खतरा बना रहता है। इसलिए आधार बंद कराना जरूरी है।

Aadhaar

किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका आधार अपने-आप निष्क्रिय नहीं होता।

Aadhaar: आज के समय में आधार कार्ड हर कोई बनवाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो आधार का क्या होगा? बहुत से लोग नहीं जानते कि मृत्यु के बाद आधार अपने-आप बंद होता है या नहीं। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका आधार अपने-आप निष्क्रिय नहीं होता। परिवार के किसी सदस्य को खुद आगे बढ़कर इसे बंद करवाना पड़ता है, ताकि आधार का कोई गलत इस्तेमाल न हो सके।
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भारत में आधार से जुड़ी सेवाओं को देखने वाली संस्था Unique Identification Authority of India (UIDAI) ने अब यह सुविधा ऑनलाइन कर दी है। यानी अब किसी की मृत्यु की जानकारी देकर आधार को घर बैठे बंद कराया जा सकता है।

आधार बंद कराने की प्रक्रिया

आधार बंद कराने के लिए परिवार के किसी सदस्य को myaadhaar.uidai.gov.in वेबसाइट पर लॉग-इन करना होता है। लॉग-इन के बाद डैशबोर्ड में जाकर “Report death of a family member” का विकल्प चुनना होता है। इसके बाद सबसे पहले उस राज्य (State) का चयन करना होता है, जहां से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुआ है। UIDAI ने साफ किया है कि यह सुविधा फिलहाल कुछ राज्यों में उपलब्ध है और धीरे-धीरे सभी राज्यों में शुरू की जाएगी।

इसके बाद मृत व्यक्ति का आधार नंबर और Death Registration Number (DRN) दर्ज करना होता है। मृत व्यक्ति का नाम बिल्कुल वैसा ही भरना जरूरी है, जैसा मृत्यु प्रमाण पत्र में लिखा है। साथ ही लिंग (Gender), मृत्यु की तारीख और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख भी भरनी होती है।

दस्तावेज अपलोड और घोषणा

इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करना होता है। UIDAI केवल PNG, JPEG या PDF फॉर्मेट में दस्तावेज स्वीकार करता है और फाइल का साइज 2MB से ज्यादा नहीं होना चाहिए। फिर जानकारी देने वाले व्यक्ति को यह बताना होता है कि मृत व्यक्ति से उसका क्या संबंध है। सब कुछ भरने के बाद एक घोषणा करनी होती है कि दी गई सारी जानकारी सही है। इस घोषणा में यह भी साफ लिखा होता है कि अगर जानकारी गलत पाई गई, तो सूचना देने वाले व्यक्ति का खुद का आधार नंबर भी बंद किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

आधार कब बंद होता है?

जब UIDAI द्वारा दी गई जानकारी और दस्तावेजों की जांच पूरी हो जाती है, तब मृत व्यक्ति का आधार नंबर पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाता है।

आधार बंद कराना क्यों जरूरी है?

आधार का इस्तेमाल बैंक खातों, सरकारी सब्सिडी, पेंशन, मोबाइल नंबर, और कई वित्तीय सेवाओं में होता है। अगर किसी मृत व्यक्ति का आधार सक्रिय रहता है, तो धोखाधड़ी, फर्जी लेन-देन और पहचान की चोरी का खतरा बना रहता है। इसलिए आधार बंद कराना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के गलत इस्तेमाल से बचाव हो सके और परिवार को भविष्य में किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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