पर्सनल फाइनेंस
.png)
3 min read | अपडेटेड January 08, 2026, 12:27 IST
सारांश
केंद्र सरकार के बाद असम ने भी 8वें वेतन आयोग की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 1 जनवरी को इस पैनल के गठन और इसके अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया। यह आयोग अगले 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके आधार पर राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन किया जाएगा।

असम ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
असम सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही अपने कर्मचारियों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि असम देश का पहला राज्य है जिसने 8वें वेतन आयोग के गठन करने का निर्णय लिया है। यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा अपने नए वेतन पैनल के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के ठीक बाद आया है। असम सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और रिटायर पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलने वाला है। मुख्यमंत्री ने न केवल आयोग के गठन का ऐलान किया, बल्कि इसके नेतृत्व के लिए अध्यक्ष के नाम पर भी मुहर लगा दी है।
असम के 8वें वेतन आयोग की कमान राज्य के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष दास को सौंपी गई है। यह तीन सदस्यीय पैनल राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, पेंशन, विभिन्न भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। केंद्र सरकार ने भी पहले ही न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में अपना पैनल गठित कर दिया है, जिसे भी 18 महीने की समय सीमा दी गई है। असम का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर राज्य सरकारें केंद्र के फैसलों के बहुत बाद में अपना वेतन आयोग बनाती हैं।
8वें वेतन आयोग का गठन जनवरी 2026 में किया गया है, ऐसे में संशोधित वेतनमान और पेंशन के सिफारिशों को लागू होने में थोड़ा समय लग सकता है। जानकारों का मानना है कि नई वेतन दरें साल 2027 के उत्तरार्ध या 2028 की शुरुआत में धरातल पर उतर सकती हैं। कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर यह है कि उन्हें बढ़े हुए वेतन का एरियर यानी बकाया राशि 1 जनवरी 2026 से मिलने की पूरी संभावना है। हालांकि अभी तक इसपर सरकार के तरफ से कोई बयान नहीं आया है। बता दें कि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, जिसके बाद अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है।
असम सरकार ने वेतन आयोग की प्रक्रिया में काफी तेजी दिखाई है। केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन की बात कही थी, लेकिन उसके सदस्यों की नियुक्ति और कार्यक्षेत्र तय करने में करीब 10 महीने लग गए। इसके विपरीत, असम के मुख्यमंत्री ने घोषणा के साथ ही अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। इसके बावजूद, यह कहना मुश्किल है कि असम केंद्र से पहले सिफारिशों को लागू कर पाएगा। अतीत के उदाहरण बताते हैं कि केंद्र सरकार हमेशा पहले वेतन आयोग लागू करती है और राज्य सरकारें उसके कुछ समय बाद इसे अपनाती हैं।
बता दें कि असम में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी हुई थीं, लेकिन गणना के लिए तारीख 1 जनवरी 2016 ही रखी गई थी, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए थी। आमतौर पर वेतन आयोगों का कार्यकाल 10 साल का होता है। अब जबकि 8वें वेतन आयोग का काम शुरू हो गया है, तो कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार वेतन में अच्छी बढ़ोतरी होगी। आयोग न केवल मूल वेतन बल्कि महंगाई भत्ते और एचआरए जैसे अन्य भत्तों पर भी विचार करेगा। असम सरकार का यह फैसला आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जिससे वे अपने कर्मचारियों के हितों में जल्द निर्णय ले सकें।
संबंधित समाचार
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।