पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड January 08, 2026, 14:20 IST
सारांश
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को एक सुरक्षित और टैक्स मुक्त निवेश माना जाता है, लेकिन इसके कुछ सख्त नियम हैं। इसमें जॉइंट अकाउंट की सुविधा नहीं मिलती और साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही जमा किए जा सकते हैं।

PPF अकाउंट में आप हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ को देश की सबसे सुरक्षित और टैक्स में छूट दिलाने वाली बेहतरीन निवेश स्कीम माना जाता है। लंबी अवधि में पक्के रिटर्न और टैक्स बचाने की शानदार सुविधा की वजह से करोड़ों लोग इसमें अपना पैसा लगाते हैं। लेकिन अक्सर देखा गया है कि लोग सिर्फ इसके फायदे देखकर पीपीएफ खाता खोल लेते हैं और इसके तकनीकी नियमों को ठीक से नहीं समझते। बाद में जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है या किसी अन्य योजना से बेहतर रिटर्न की उम्मीद होती है, तब उन्हें अपने फैसले पर पछताना पड़ता है। अगर आप भी इस सरकारी बचत योजना में निवेश करने के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं, तो इसके पांच सबसे जरूरी नियमों पर गौर करना आपके लिए बहुत आवश्यक है।
बैंकों की दूसरी कई बचत योजनाओं या सावधि जमा में हमें जॉइंट अकाउंट यानी संयुक्त खाता खोलने की सुविधा आसानी से मिल जाती है, लेकिन पीपीएफ के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं है। पीपीएफ अकाउंट सिर्फ एक ही व्यक्ति के नाम पर यानी सिंगल नाम से खोला जा सकता है। हालांकि सरकार ने इसमें नॉमिनी यानी वारिस बनाने की सुविधा दी है। आप एक से ज्यादा नॉमिनी बना सकते हैं और उनके लिए अलग-अलग हिस्सेदारी भी तय कर सकते हैं। अगर किसी अप्रिय घटना की वजह से खाता धारक की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी को पूरी जमा राशि निकालने का कानूनी अधिकार होता है। लेकिन खाता खोलते समय आप अकेले ही इसके मालिक होंगे और किसी दूसरे के साथ मिलकर इसे नहीं चला सकते।
पीपीएफ के कड़े नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति पूरे देश में अपने नाम पर सिर्फ एक ही पीपीएफ खाता खोल सकता है। अगर अज्ञानता की वजह से या गलती से आपके नाम पर दो पीपीएफ खाते खुल गए हैं, तो दूसरा खाता सरकारी नियमों के अनुसार वैध नहीं माना जाएगा। जब तक आप इन दोनों खातों को आपस में मर्ज यानी एक साथ जोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेते, तब तक आपको दूसरे खाते पर कोई ब्याज भी नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में निवेशक को समय और ब्याज दोनों का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए खाता खोलने से पहले यह पक्का कर लें कि आपका पहले से कोई और एक्टिव अकाउंट तो नहीं चल रहा है।
पीपीएफ की ब्याज दर समय-समय पर सरकार द्वारा तय की जाती है, लेकिन पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखें तो इसमें कोई बड़ा सुधार या बदलाव नहीं हुआ है। अप्रैल 2019 से जून 2019 तक इसकी दर 8 प्रतिशत थी, जिसे बाद में घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया था। जनवरी से मार्च 2020 के बाद से यह दर अब तक 7.1 प्रतिशत पर ही टिकी हुई है। अगर आने वाले समय में महंगाई के मुकाबले यह दर और घटती है, तो बाजार में इससे ज्यादा रिटर्न देने वाले दूसरे विकल्प मौजूद हो सकते हैं। निवेशकों को यह समझना होगा कि यहां रिटर्न की गारंटी तो है, लेकिन यह बाजार के दूसरे आधुनिक विकल्पों जितना ज्यादा नहीं हो सकता।
पीपीएफ में निवेश की एक ऊपरी सीमा भी तय की गई है, जो बड़े निवेशकों के लिए एक रुकावट बन सकती है। आप एक वित्तीय वर्ष में इसमें ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख रुपये ही जमा कर सकते हैं। अगर आपकी आय अधिक है और आप इससे बड़ा अमाउंट सुरक्षित निवेश में डालना चाहते हैं, तो यह संभव नहीं है। ऐसे निवेशकों को टैक्स बचाने और बेहतर रिटर्न पाने के लिए म्यूचुअल फंड, एनपीएस या दूसरी सरकारी योजनाओं की तरफ देखना पड़ता है। पीपीएफ केवल एक निश्चित सीमा तक ही टैक्स बचाने और पूंजी बढ़ाने में मदद कर सकता है, इसलिए इसे अपनी पूरी वित्तीय योजना का एकमात्र हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।
पीपीएफ में पैसा जमा करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसके लॉक-इन पीरियड की होती है क्योंकि इसकी मैच्योरिटी अवधि पूरे 15 साल की है। अगर आपको बीच में अचानक पैसों की सख्त जरूरत पड़ती है, तो आप पूरी जमा पूंजी नहीं निकाल सकते। आंशिक निकासी की सुविधा भी छठे वित्तीय वर्ष के बाद ही मिल पाती है। वहीं, 15 साल की अवधि से पहले खाता बंद करना भी बहुत मुश्किल काम है। यह केवल मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या विदेश में बसने जैसी विशेष स्थितियों में ही संभव है। यदि आप इन शर्तों के तहत मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालते हैं, तो आपको मिलने वाले कुल ब्याज में से एक प्रतिशत की कटौती की जाती है।
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