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मार्केट न्यूज़

Wipro के शेयरों में आई तेजी, क्या 16000 करोड़ का बायबैक बदलेगा निवेशकों की किस्मत?

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड April 10, 2026, 11:15 IST

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सारांश

आईटी दिग्गज विप्रो के शेयरों में आज करीब 3 पर्सेंट की तेजी देखी गई। अभी भी हरे निशान में स्टॉक ट्रेड कर रहा है। कंपनी के बोर्ड ने 16 अप्रैल को बायबैक पर विचार करने का फैसला किया है, जिससे निवेशकों में उत्साह है।

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विप्रो के शेयरों में बायबैक की खबर के बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ी।

विप्रो के निवेशकों के लिए आज का दिन काफी शानदार नजर आ रहा है। आईटी सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी के शेयरों में शुरुआती कारोबार में ही 2.87 पर्सेंट तक की तेजी देखी गई और यह एनएसई पर 208.70 रुपये के भाव तक पहुंच गया। शेयर की कीमतों में आई इस उछाल की सबसे बड़ी वजह कंपनी द्वारा बायबैक यानी शेयरों को वापस खरीदने की योजना का ऐलान है।

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बायबैक की खबर से बाजार में उत्साह

विप्रो ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि 15 और 16 अप्रैल 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग में बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। यह खबर सामने आते ही निवेशकों ने शेयर में जमकर खरीदारी शुरू कर दी। अगर बोर्ड इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है, तो यह विप्रो के शेयरधारकों के लिए एक बड़ा तोहफा होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी ब्रोकरेज फर्म इन्वेस्टेक का मानना है कि इस बार बायबैक का साइज करीब 16,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। इससे पहले साल 2023 में कंपनी ने 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था, जिसमें शेयरों को 445 रुपये के भाव पर खरीदा गया था। कंपनी का पुराना रिकॉर्ड बताता है कि वह समय-समय पर बायबैक के जरिए निवेशकों को फायदा पहुंचाती रही है।

चौथी तिमाही के नतीजों का इंतजार

बायबैक के साथ ही विप्रो इसी बोर्ड मीटिंग में 31 मार्च 2026 को खत्म हुई चौथी तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के ऑडिटेड कंसोलिडेटेड नतीजों को भी मंजूरी देगी। कंपनी ने पहले ही बता दिया है कि 16 अप्रैल को नतीजे जारी किए जाएंगे। नतीजों के ऐलान से पहले कंपनी ने नियमों के मुताबिक 16 मार्च से ही ट्रेडिंग विंडो बंद कर दी है, जो 18 अप्रैल तक बंद रहेगी। इसका मतलब है कि इस दौरान कंपनी से जुड़े लोग और अधिकारी शेयरों में किसी तरह का लेन-देन नहीं कर पाएंगे। बाजार को उम्मीद है कि इस बार कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस में सुधार देखने को मिल सकता है।

तीसरी तिमाही का प्रदर्शन कैसा था?

अगर हम विप्रो की तीसरी तिमाही प्रदर्शन को देखें, तो कंपनी के नेट प्रॉफिट में 7 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई थी और यह 3,119 करोड़ रुपये रहा था। मुनाफे में आई इस गिरावट की मुख्य वजह नए लेबर कोड का लागू होना था, जिससे कंपनी पर 302.8 करोड़ रुपये का एकमुश्त बोझ पड़ा था। हालांकि, कंपनी के ऑपरेशन से मिलने वाले रेवेन्यू में 5.5 पर्सेंट की बढ़त देखी गई थी और यह 23,555.8 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। तिमाही आधार पर रेवेन्यू में 3.7 पर्सेंट का इजाफा हुआ था। कंपनी ने मुश्किल समय में भी अपनी कमाई को स्थिर रखने की कोशिश की थी।

सेक्टर की अन्य कंपनियों पर असर

सिर्फ विप्रो ही नहीं, बल्कि टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी बड़ी आईटी कंपनियों पर भी नए लेबर कोड का असर पड़ा था। टीसीएस को इसकी वजह से 2,128 करोड़ रुपये और इंफोसिस को 1,289 करोड़ रुपये का असर झेलना पड़ा था। इसके बावजूद विप्रो के सीईओ और एमडी श्रीनी पल्लिया का कहना है कि कंपनी की ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती डिमांड से कंपनी को फ्यूचर में काफी फायदा मिलने की उम्मीद है। कंपनी अब अपने एआई प्लेटफॉर्म और विंग्स जैसे समाधानों पर ज्यादा फोकस कर रही है। अब निवेशकों की नजरें 16 अप्रैल को होने वाले बड़े फैसलों पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेंगे कि विप्रो के शेयर की दिशा आने वाले समय में कैसी रहेगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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