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4 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 14:53 IST
सारांश
Ola Electric ने FY26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के अपने नतीजे जारी किए। कंपनी ने 13 फरवरी को 470 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बताया। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर के इसी पीरियड में रिपोर्ट किए गए 1,045 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से 55 परसेंट सालाना गिरावट है।
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Ola Electric ने FY26 की दिसंबर तिमाही में कमजोर नतीजे जारी किए हैं।
ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने FY26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के अपने नतीजे जारी किए। कंपनी ने 13 फरवरी को 470 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बताया। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर के इसी पीरियड में रिपोर्ट किए गए 1,045 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से 55 परसेंट सालाना गिरावट है।
हालांकि, इस तिमाही में नेट लॉस कम होकर 487 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले इसी पीरियड में यह 564 करोड़ रुपये था। Q3 FY26 में डिलीवरी YoY 61 परसेंट घटकर 32680 यूनिट रह गई, जबकि एक साल पहले यह 84,029 यूनिट थी। एडजस्टेड ऑपरेटिंग EBITDA लॉस 34.6 परसेंट कम होकर Rs 323 करोड़ हो गया।
बेंगलुरु की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी Ola Electric Mobility ने कहा है कि वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) कंपनी के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। कंपनी के मुताबिक यह तिमाही एक “structural reset” है, जिसमें उसने अपने पूरे बिजनेस को नए सिरे से संतुलित किया है। EV सेक्टर में मांग की रफ्तार धीमी रहने और सर्विस से जुड़ी दिक्कतों को देखते हुए कंपनी ने अपने रिटेल नेटवर्क, खर्चों की संरचना और काम करने के तरीके को ज्यादा टिकाऊ स्तर पर लाने का फैसला किया।
कंपनी ने बताया कि इस तिमाही में उसने अब तक का सबसे ऊंचा कंसॉलिडेटेड ग्रॉस मार्जिन हासिल किया है, जो 34.3 प्रतिशत रहा। यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 15.7 प्रतिशत ज्यादा है और पिछली तिमाही की तुलना में 3.4 प्रतिशत की बढ़त दिखाता है। कंपनी का कहना है कि इसका मुख्य कारण उसका वर्टिकली इंटीग्रेटेड मॉडल है, जिसमें बैटरी से लेकर व्हीकल तक ज्यादातर काम खुद किया जाता है। इसके अलावा Gen 3 प्लेटफॉर्म की बेहतर लागत संरचना और अनुशासित क्रियान्वयन ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि Q3 FY26 में Ola Electric ने मुनाफे के पीछे भागने से पहले अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने बताया कि कंपनी ने सर्विस से जुड़ी कमियों को दूर किया, खर्चों को दोबारा संतुलित किया और वर्टिकल इंटीग्रेशन को और गहरा किया। इसका नतीजा यह निकला कि कंपनी का ऑपरेटिंग मॉडल अब ज्यादा हल्का और मजबूत हो गया है, ब्रेक-ईवन का स्तर काफी नीचे आ गया है और ग्रॉस मार्जिन इंडस्ट्री में सबसे बेहतर स्तर पर पहुँच गया है।
कंपनी के अनुसार अब सर्विस से जुड़े आंकड़े स्थिर हो रहे हैं और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट धीरे-धीरे कमर्शियल स्केल पर काम करने लगा है। इससे Ola Electric अगली ग्रोथ फेज में जाने के लिए बेहतर स्थिति में आ गई है। कंपनी का मानना है कि अब उसके ऑपरेशंस में पहले के मुकाबले ज्यादा ऑपरेटिंग लेवरेज मिलेगा, यानी बिक्री बढ़ने पर मुनाफा तेजी से बढ़ सकेगा।
Ola Electric ने यह भी बताया कि उसने अपने स्टोर और सर्विस नेटवर्क को ऑप्टिमाइज़ किया है और कई प्रक्रियाओं में AI आधारित ऑटोमेशन लागू किया है। इन बदलावों का असर आने वाली कुछ तिमाहियों में दिखने की उम्मीद है। कंपनी का अनुमान है कि इससे उसका तिमाही कंसॉलिडेटेड ऑपरेशनल खर्च घटकर 250 से 300 करोड़ रुपये के दायरे में आ जाएगा। इसके साथ ही EBITDA ब्रेक-ईवन करीब 15,000 यूनिट प्रति महीने पर आ सकता है।
ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का शेयर अभी अपने IPO प्राइस 76 रुपये प्रति शेयर से करीब 62 परसेंट से ज्यादा नीचे है। वहीं अपने ऑल-टाइम हाई 157.40 रुपये प्रति शेयर से शेयर लगभग 82 परसेंट नीचे आ चुका है।
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