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Textile stocks: Gokaldas Exports से Trident तक, India-US ट्रेड डील की खबर आते ही रॉकेट बने शेयर

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड February 03, 2026, 11:29 IST

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सारांश

Textile stocks: भारत–अमेरिका ट्रेड डील की खबर के आते ही निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ा और टेक्सटाइल कंपनियों के शेयर उड़ान भरने लगे। पहले ये शेयर इसलिए टूटे थे क्योंकि अमेरिका के साथ ट्रेड टेंशन और ज्यादा टैरिफ की वजह से सेक्टर पर दबाव था।

शेयर सूची

Textile stocks

Textile stocks: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में “मेगा टेक्सटाइल पार्क” बनाने की घोषणा की है।

Textile stocks: आज 3 फरवरी को टेक्सटाइल सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी नजर आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत–अमेरिका ट्रेड डील है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है। यह जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद दी। इस खबर का असर कई सेक्टर्स के शेयरों पर दिख रहा है, जिनमें एक है टेक्सटाइल सेक्टर।
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टेक्सटाइल स्टॉक्स में जबरदस्त रैली

भारत–अमेरिका ट्रेड डील की खबर के आते ही निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ा और टेक्सटाइल कंपनियों के शेयर उड़ान भरने लगे। पहले ये शेयर इसलिए टूटे थे क्योंकि अमेरिका के साथ ट्रेड टेंशन और ज्यादा टैरिफ की वजह से सेक्टर पर दबाव था। खास बात यह है कि टेक्सटाइल कंपनियों की कुल कमाई का करीब 50% से 70% हिस्सा अमेरिका से आता है, इसलिए वहां का कोई भी फैसला सीधे इन कंपनियों को प्रभावित करता है।

इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा रैली

Gokaldas Exports का शेयर NSE पर 20% अपर सर्किट लगकर ₹694.05 पर पहुंच गया। इसके अलावा Vardhman Textiles करीब 12% चढ़कर ₹510.90 पर ट्रेड कर रहा था। Welspun Living लगभग 18% ऊपर ₹144.20 पर पहुंच गया, जबकि Trident के शेयर 12% से ज्यादा बढ़कर ₹28.98 हो गए। Indo Count Industries भी 20% अपर सर्किट के साथ ₹286.33 पर ट्रेड कर रहा था।

बजट में भी टेक्सटाइल सेक्टर को सपोर्ट

टेक्सटाइल शेयरों को सपोर्ट देने वाली दूसरी बड़ी खबर बजट से आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में “मेगा टेक्सटाइल पार्क” बनाने की घोषणा की है। ये पार्क “चैलेंज मोड” में बनाए जाएंगे, जहां पूरी इंडस्ट्री के लिए एक साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, वैल्यू एडिशन और मैन्युफैक्चरिंग की सुविधा होगी।

इन नए मेगा टेक्सटाइल पार्कों से निवेश बढ़ेगा, क्वालिटी कंट्रोल बेहतर होगा, ट्रेसबिलिटी आसान बनेगी और बड़े एक्सपोर्ट हब तैयार होंगे। इससे टेक्सटाइल सेक्टर को स्केल मिलेगा और भारत की निर्यात क्षमता मजबूत होगी। साथ ही टेक्निकल टेक्सटाइल्स को भी बढ़ावा मिलेगा, जिसका इस्तेमाल इंडस्ट्री, मेडिकल, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में होता है।

खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए सरकार “महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल” शुरू करेगी। इसका मकसद है ग्लोबल मार्केट से जोड़ना, ब्रांडिंग करना, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट, क्वालिटी सुधार और प्रोसेस को मॉडर्न बनाना। इससे बुनकरों, ग्रामीण उद्योगों और गांव के युवाओं को फायदा मिलेगा और “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” योजना को भी सपोर्ट मिलेगा।

टेक्सटाइल, लेदर और मरीन प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट को बढ़ावा

सरकार ने टेक्सटाइल, लेदर और मरीन प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक और अहम फैसला लिया है। अब ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट किए गए कच्चे माल से बने कपड़ों, लेदर गारमेंट्स और फुटवियर के एक्सपोर्ट के लिए समय सीमा 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। इससे एक्सपोर्टर्स को ज्यादा समय मिलेगा, नियमों का पालन आसान होगा और वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम होगा।

यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका, जो भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, वहां पहले भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लग गया था, जिससे एक्सपोर्टर्स काफी परेशान थे। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि श्रम-प्रधान टेक्सटाइल सेक्टर के लिए सरकार एक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम लेकर आ रही है, जिसमें 5 हिस्से होंगे। इनमें “नेशनल फाइबर स्कीम” भी शामिल है, जिसका मकसद सिल्क, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मैन-मेड फाइबर और नए जमाने के फाइबर में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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