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मार्केट न्यूज़

TCS Q3 Results: दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 14% घटकर ₹10,657 करोड़ पर, एक्सेप्शनल खर्चों ने बिगाड़ा मुनाफे का गणित

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड January 12, 2026, 16:26 IST

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सारांश

TCS Q3 Results: TCS का Q3 रेवेन्यू 67,087 करोड़ रुपये रहा। ये आंकड़े बाजार की उम्मीदों से कम हैं। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजे जारी किए हैं। आज यह स्टॉक BSE पर 0.86 फीसदी बढ़कर 3235.70 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ है।

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TCS Q3

TCS Q3: अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 10657 करोड़ रुपये रहा।

TCS Q3 Results: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने आज 12 जनवरी को FY26 की तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14 फीसदी घटकर 10657 करोड़ रुपये पर आ गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा ₹12,380 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही के मुकाबले भी TCS का नेट प्रॉफिट ₹12,075 करोड़ से 11.75% कम हुआ है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का ऐलान भी किया है।
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TCS का Q3 रेवेन्यू 5 फीसदी बढ़ा

दूसरी तरफ TCS का Q3 रेवेन्यू 5 फीसदी बढ़कर 67,087 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹63,973 करोड़ था। ये आंकड़े बाजार की उम्मीदों से कम हैं। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजे जारी किए हैं। आज यह स्टॉक BSE पर 0.86 फीसदी बढ़कर 3235.70 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ है।

कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 25.2% रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले लगभग सपाट है। कॉन्स्टेंट करेंसी में रेवेन्यू 0.8% की क्रमिक बढ़त के साथ आया। इस दौरान कंपनी ने 9.3 अरब डॉलर का टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू हासिल किया, जो यह दिखाता है कि वैश्विक आईटी खर्च में सतर्कता के बावजूद डिमांड बनी हुई है।

AI बिजनेस का कैसा रहा प्रदर्शन?

AI से जुड़े बिजनेस में भी कंपनी को अच्छी ग्रोथ मिली। TCS ने बताया कि उसकी सालाना AI सर्विसेज रेवेन्यू 1.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। मैनेजमेंट के मुताबिक, क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में AI आधारित प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है।

नेट प्रॉफिट में गिरावट की क्या है वजह?

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने Q3 FY26 में नेट प्रॉफिट में भारी गिरावट दर्ज की। इसका मुख्य कारण रीस्ट्रक्चरिंग, लेबर कानून में बदलाव और अमेरिका में चल रहे लंबे कानूनी विवाद से जुड़े बड़े एक्सेप्शनल खर्च थे। अगर एक्सेप्शनल आइटम्स को हटा दिया जाए तो तस्वीर अलग नजर आती है। इन एकमुश्त खर्चों को छोड़कर TCS का नेट प्रॉफिट 8.5% बढ़कर 13,438 करोड़ रुपये रहा।

एक्सेप्शनल खर्चों ने बिगाड़ा मुनाफे का गणित

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक तिमाही के दौरान कंपनी पर 3 बड़े एक्सेप्शनल चार्ज आए। पहला, जुलाई 2025 में घोषित वर्कफोर्स रेशनलाइजेशन के तहत रीस्ट्रक्चरिंग खर्च, जिसमें कर्मचारियों को दिए गए टर्मिनेशन बेनिफिट शामिल थे। दूसरा, भारत के नए लेबर कोड लागू होने से जुड़ा खर्च, जिसके चलते TCS ने 2,128 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया। इसमें ग्रेच्युटी के लिए 1,816 करोड़ रुपये और लॉन्ग-टर्म लीव जैसी देनदारियों के लिए 312 करोड़ रुपये शामिल हैं।

तीसरा बड़ा झटका अमेरिका में लंबे समय से चल रहे CSC (कंप्यूटर साइंसेज कॉरपोरेशन) केस से जुड़ा रहा। अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद TCS ने 1,010 करोड़ रुपये हर्जाने के तौर पर और 342 करोड़ रुपये ब्याज के लिए प्रावधान किया। कंपनी ने कहा है कि वह इस मामले में आगे भी कानूनी विकल्प अपनाएगी और उसे अपने पक्ष में मजबूत दलीलें होने का भरोसा है।

हर शेयर पर 57 रुपये का डिविडेंड घोषित

TCS ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का ऐलान भी किया है। कंपनी हर शेयर पर 57 रुपये का डिविडेंड जारी करेगी। इसमें अंतरिम डिविडेंड के साथ ही स्पेशल डिविडेंड भी शामिल है। फाइलिंग के मुताबिक शेयरधारकों को 11 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड जारी किया जाएगा। इसके साथ ही इसमें 46 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड भी शामिल है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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