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4 min read | अपडेटेड March 06, 2026, 09:42 IST
सारांश
शुक्रवार को शेयर बाजार की शुरुआत काफी खराब रही और बाजार खुलते ही सेंसेक्स 525 अंकों से ज्यादा फिसल गया। निफ्टी भी 24,600 के करीब ट्रेड कर रहा है। बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी जा रही है, जबकि आईटी और फार्मा सेक्टर में मामूली तेजी देखने को मिल रही है।

आज फिर से बाजार में बिकवाली हावी हो गई है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार की सुबह काफी निराशाजनक रही। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों को तगड़ा झटका लगा और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों ही बड़े गैप-डाउन के साथ खुले। सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर जैसे ही बाजार की घंटी बजी, स्क्रीन पर लाल निशान हावी हो गया। कल की हल्की रिकवरी के बाद उम्मीद की जा रही थी कि बाजार संभलेगा, लेकिन आज की शुरुआत ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
आज बीएसई सेंसेक्स 79,658.99 के स्तर पर खुला, जो इसके पिछले क्लोज 80,015.90 से काफी नीचे था। लेकिन खुलते ही इसमें बिकवाली और बढ़ गई और यह 525.21 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79,490.69 के स्तर पर ट्रेड करने लगा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 156.85 अंक यानी 0.63 प्रतिशत फिसलकर 24,609.05 पर आ गया है। निफ्टी की शुरुआत भी 24,656.40 पर हुई थी, जो कल के मुकाबले काफी कमजोर है।
बाजार को नीचे खींचने में आज सबसे बड़ा हाथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर का है। निफ्टी बैंक शुरुआती कारोबार में ही 486.70 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 58,569.15 के स्तर पर आ गया है। प्राइवेट और सरकारी दोनों ही बैंकों के शेयरों में कमजोरी दिख रही है। निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.78 प्रतिशत और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा रियल्टी सेक्टर में भी आज जबरदस्त दबाव है और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 0.90 प्रतिशत नीचे गिर गया है। ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयर भी आज लाल निशान में ही कारोबार कर रहे हैं।
गिरावट के इस माहौल में केवल आईटी और फार्मा सेक्टर ही ऐसे हैं, जो थोड़े संभले हुए नजर आ रहे हैं। निफ्टी आईटी इंडेक्स में आज 0.98 प्रतिशत की शानदार बढ़त देखी जा रही है, जो बाजार को और ज्यादा गिरने से बचा रहा है। इसके साथ ही निफ्टी फार्मा भी 0.07 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बना हुआ है।
बाजार गिरने का सबसे बड़ा और पहला कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता युद्ध है। मिडिल ईस्ट में तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। खबर आई है कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास ईरान के एक जंगी जहाज को डुबो दिया है, जिसमें करीब 80 लोग मारे गए हैं। इसके अलावा नाटो ने तुर्की की ओर दागी गई ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल को भी नष्ट कर दिया है। इस युद्ध की खबरों ने पूरी दुनिया के बाजारों को डरा दिया है, जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ा और निवेशकों ने रिस्क लेने के बजाय पैसे निकालना बेहतर समझा।
दूसरा बड़ा कारण सोने और चांदी की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है। युद्ध के हालात में निवेशक हमेशा सुरक्षित निवेश यानी सोने की ओर भागते हैं। आज एमसीएक्स पर सोना 1,62,750 रुपये के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया, जबकि चांदी ने भी 2.74 लाख का लेवल पार कर लिया। जब सोने की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ती हैं, तो अक्सर इक्विटी मार्केट यानी शेयर बाजार से पैसा निकलकर बुलियन मार्केट में जाने लगता है। आज भी यही हुआ, सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने शेयर बाजार की लिक्विडिटी को कम कर दिया और बिकवाली बढ़ गई।
तीसरी बड़ी वजह कॉरपोरेट जगत से जुड़ी है। भारत की बड़ी गैस कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी को उसके सप्लायर कतर एनर्जी से फोर्स मेजर का नोटिस मिला है। इसके बाद पेट्रोनेट ने भी गेल इंडिया, इंडियन ऑयल और बीपीसीएल जैसी कंपनियों को आगे यही नोटिस जारी कर दिया है। फोर्स मेजर का मतलब है कि कंपनी अब गैस की सप्लाई करने की स्थिति में नहीं है। इस खबर ने एनर्जी और तेल कंपनियों के शेयरों पर दबाव डाल दिया। सप्लाई चेन रुकने के डर से इन कंपनियों के प्रति निवेशकों का भरोसा डगमगा गया, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और खराब हो गया।
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