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Silver ETF vs FoF: नफा-नुकसान के तराजू पर समझें दोनों में कौन है बेहतर, फिर निवेश होगी समझदारी

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड January 06, 2026, 15:40 IST

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सारांश

अगर आप चांदी को भौतिक रूप में रखने के झंझट से बचना चाहते हैं, तो सिल्वर ईटीएफ और एफओएफ बेहतरीन माध्यम हैं। इसके साथ अच्छी बात ये है कि इसमें निवेश से आपको चांदी में आई तेजी का पूरा फायदा मिलता है।

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चांदी में डिजिटल निवेश के जरिए आप सुरक्षित तरीके से बाजार की तेजी का लाभ उठा सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता और औद्योगिक मांग के कारण चांदी की कीमतों ने पिछले कुछ समय में जो रफ्तार पकड़ी है, उसने बड़े बड़े निवेशकों को हैरान कर दिया है। भारत में भी चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड बना रही हैं। आज भी MCX पर सिल्वर में तेजी देखी गई है। वह अपने ऑल टाइम हाई के करीब ट्रेड कर रहा है। ऐसे में बहुत से लोग अब पारंपरिक चांदी के सिक्कों या गहनों की जगह डिजिटल चांदी में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। डिजिटल निवेश के लिए सिल्वर ईटीएफ और सिल्वर एफओएफ सबसे लोकप्रिय रास्ते हैं। हालांकि इन दोनों का मुख्य लक्ष्य चांदी की कीमतों में होने वाली बढ़त का फायदा उठाना ही है, लेकिन इनके काम करने का तरीका और उनमें होने वाला खर्च काफी अलग होता है।

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सिल्वर ईटीएफ की बारीकियां?

सिल्वर ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड एक ऐसा निवेश है जो सीधे तौर पर चांदी की वास्तविक कीमतों पर नजर रखता है। इसे खरीदने के लिए आपके पास एक डीमैट खाता होना अनिवार्य है। ईटीएफ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे आप स्टॉक एक्सचेंज पर बिल्कुल वैसे ही खरीद और बेच सकते हैं जैसे आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं। इसमें लिक्विडिटी बहुत ज्यादा होती है, यानी आप बाजार के खुले होने के दौरान कभी भी अपनी यूनिट्स बेचकर पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा ईटीएफ का एक्सपेंस रेशियो यानी फंड प्रबंधन का खर्च काफी कम होता है, जो लंबे समय में आपके कुल मुनाफे को बढ़ाने में मदद करता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बाजार की चाल को समझते हैं और जिनके पास डीमैट खाता पहले से मौजूद है।

सिल्वर एफओएफ के फायदे?

सिल्वर एफओएफ यानी फंड ऑफ फंड्स उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जो सीधे शेयर बाजार के लेनदेन में नहीं पड़ना चाहते हैं। यह फंड असल में खुद सीधे चांदी न खरीदकर सिल्वर ईटीएफ में ही पैसा लगाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश करने के लिए आपको किसी डीमैट खाते की कोई जरूरत नहीं होती है। अगर आप हर महीने एक तय राशि निवेश करना चाहते हैं, तो एफओएफ में एसआईपी यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की सुविधा मिलती है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है जो अनुशासित तरीके से थोड़ा थोड़ा करके चांदी का बड़ा फंड बनाना चाहते हैं। हालांकि इसमें आपको थोड़ा ज्यादा एक्सपेंस रेशियो देना पड़ सकता है क्योंकि यह ईटीएफ के ऊपर प्रबंधन की एक और परत होती है।

निवेश के लिहाज से कौन बेहतर?

जब हम निवेश की बात करते हैं, तो लागत एक बहुत बड़ा पैमाना होती है। फिजिकल चांदी खरीदने पर आपको मेकिंग चार्ज और उसे सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर जैसे अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ते हैं। डिजिटल चांदी में ये सभी खर्च पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। ईटीएफ में निवेश करने पर आपको ब्रोकरेज चार्ज देना होता है, जबकि एफओएफ में निवेश करने पर आपको म्यूचुअल फंड की तरह एग्जिट लोड का ध्यान रखना होता है। सुरक्षा के मामले में ये दोनों ही विकल्प बहुत मजबूत हैं क्योंकि इनके पीछे वास्तविक चांदी का भंडार रखा जाता है जिसकी निगरानी सेबी जैसी संस्थाएं करती हैं। आपको चोरी होने या मिलावट होने का कोई डर नहीं रहता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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