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  1. आज फिर क्यों टूटा बाजार? ईरान युद्ध, क्रूड ऑयल, महंगाई और FIIs सेलिंग, ये हैं बड़े कारण

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आज फिर क्यों टूटा बाजार? ईरान युद्ध, क्रूड ऑयल, महंगाई और FIIs सेलिंग, ये हैं बड़े कारण

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड March 13, 2026, 09:38 IST

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सारांश

भारतीय शेयर बाजार आज भारी गिरावट के साथ खुला है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही करीब 0.75 पर्सेंट से ज्यादा टूट चुके हैं। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार का माहौल खराब कर दिया है।

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वो फैक्टर्स जिससे सेंसेक्स-निफ्टी में आई बिकवाली।

शेयर बाजार के लिए आज का दिन काफी निराशाजनक रहा है। जैसे ही सुबह बाजार खुला, चारों तरफ बिकवाली का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स करीब 589 पॉइंट गिरकर 75,445 के लेवल पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 180 पॉइंट की कमजोरी के साथ 23,458 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों के करोड़ों रुपये डुबो दिए हैं। अगर हम अलग-अलग सेक्टर की बात करें तो निफ्टी आईटी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी जा रही है। बाजार में छाई इस मायूसी के पीछे कई बड़े ग्लोबल और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं जिनका असर सीधे तौर पर निवेशकों की जेब पर पड़ रहा है।

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हफ्ते भर में बाजार हुआ लहूलुहान

शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता पिछले एक साल में सबसे बुरा साबित हो रहा है। इस हफ्ते अब तक मुख्य इंडेक्स में 4 पर्सेंट से ज्यादा की बड़ी गिरावट आ चुकी है। अगर गिरावट का यही दौर जारी रहा तो यह दिसंबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होगी। दरअसल, जब से 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के युद्ध की खबरें आई हैं, तब से मार्केट करीब 6.1 पर्सेंट तक नीचे गिर चुका है। युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है और बड़े निवेशक अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं जिससे भारतीय बाजारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

विदेशी निवेशकों ने निकाला भारी पैसा

बाजार के गिरने की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई की तरफ से हो रही ताबड़तोड़ बिकवाली है। मार्च के महीने में अब तक विदेशी फंड्स ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 49 अरब डॉलर के शेयर बेच दिए हैं। यह जनवरी 2025 के बाद का सबसे बड़ा आउटफ्लो होने की संभावना है। जब विदेशी निवेशक इतनी बड़ी मात्रा में बिकवाली करते हैं, तो मार्केट में नकदी यानी लिक्विडिटी की कमी हो जाती है और शेयरों के भाव तेजी से नीचे आने लगते हैं।

युद्ध और कच्चे तेल का डबल अटैक

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। निवेशकों को डर है कि युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण सप्लाई रूट बंद हो सकते हैं जिससे दुनिया भर में तेल की कमी हो जाएगी। हालांकि अमेरिका ने रूस के फंसे हुए तेल को खरीदने के लिए कुछ छूट दी है जिससे कीमतों में थोड़ी स्थिरता आई है, लेकिन भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति अब भी चिंताजनक है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगवाता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का रेवेन्यू और आर्थिक गणित बिगड़ जाता है।

महंगाई की मार और आर्थिक चिंताएं

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत की महंगाई दर पर पड़ रहा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 पर्सेंट हो गई है। खाने-पीने की चीजों, पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स और सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से महंगाई ऊपर गई है। हालांकि यह अभी भी रिजर्व बैंक के 4 पर्सेंट के टारगेट के नीचे है, लेकिन महंगाई बढ़ने से फ्यूचर में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो जाती है।

**(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।) **

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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