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मार्केट न्यूज़

वो 5 फैक्टर्स जिससे बाजार में आई भारी गिरावट, मिनटों में डूब गए 8 लाख करोड़ रुपये

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड April 13, 2026, 10:35 IST

सारांश

पिछले हफ्ते की शानदार तेजी के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2 पर्सेंट तक टूट गए हैं। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत फेल होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से निवेशकों के करीब 8 लाख करोड़ रुपये मिनटों में डूब गए हैं।

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शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद लाल निशान में डूबे इंडेक्स।

पिछले हफ्ते करीब 6 पर्सेंट की शानदार बढ़त बनाने के बाद भारतीय शेयर बाजार के लिए 13 अप्रैल की सुबह किसी झटके से कम नहीं रही। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट का शिकार हो गया और चारों तरफ बिकवाली का माहौल दिखने लगा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बेंचमार्क इंडेक्स सुबह के कारोबार में 2 पर्सेंट से ज्यादा टूट गए। इस गिरावट ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि पिछले कई दिनों से बाजार में मजबूती बनी हुई थी।

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सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

आंकड़ों की बात करें तो सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 1,700 पॉइंट यानी 2 पर्सेंट से ज्यादा लुढ़ककर 75,868 के निचले लेवल पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 500 पॉइंट की गोता लगाकर 23,556 के लेवल पर आ गया। बाजार की यह मार सिर्फ बड़े शेयरों तक ही सीमित नहीं रही बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2-2 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट देखी गई। इस बिकवाली के चलते निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो पिछले सेशन में 451 लाख करोड़ रुपये था, वह सोमवार सुबह 9:20 बजे तक गिरकर 443 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यानी महज कुछ ही मिनटों में निवेशकों की दौलत में 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल

बाजार में आई इस तबाही के पीछे सबसे पहला और बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है। पिछले वीकेंड पर दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने को लेकर हुई बातचीत का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका। इससे निवेशकों की वो उम्मीदें टूट गईं कि यह संकट जल्द खत्म हो जाएगा। इसके अलावा अमेरिका ने हॉर्मुज की नाकेबंदी करने का प्लान बनाया है, जिससे दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई ठप होने का खतरा बढ़ गया है। बाजार को डर है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा तो ग्लोबल इकोनॉमी को गहरा धक्का लगेगा और साल 2026 में मार्केट का परफॉर्मेंस काफी खराब रह सकता है।

चीन पर ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी

गिरावट की दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन को लेकर दिया गया बयान है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने एक बार फिर चीन के खिलाफ कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने रविवार को कहा कि अगर चीन ने ईरान को हथियारों की सप्लाई की, तो उस पर 50 पर्सेंट का भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान से ट्रेड वॉर और ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। निवेशकों को लगता है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा तो इसका सीधा असर ग्लोबल ट्रेड और शेयर बाजारों पर पड़ेगा, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाएगी।

कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

बाजार के गिरने का तीसरा अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी है। अमेरिका-ईरान के बीच समझौता न होने और हॉर्मुज की नाकेबंदी की खबरों से ब्रेंट क्रूड और डब्लूटीआई क्रूड के दाम 8 पर्सेंट से ज्यादा उछल गए हैं। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर और डब्लूटीआई 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। जानकारों का मानना है कि अगर क्रूड की कीमतें अगले 2 महीनों तक इसी ऊंचे लेवल पर रहीं तो यह भारतीय इकोनॉमी के लिए बहुत बुरा साबित होगा।

ग्लोबल मार्केट और रुपये की कमजोरी

बाजार में गिरावट के चौथे और पांचवें कारण की बात करें तो ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों और रुपये की गिरावट ने भी बड़ा रोल निभाया है। जापान का निक्केई और कोरिया का कोस्पी जैसे एशियाई बाजार 1-1 पर्सेंट से ज्यादा टूटकर बंद हुए। वहीं भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 70 पैसे गिरकर 93.43 के रिकॉर्ड निचले लेवल पर पहुंच गया। डॉलर के मजबूत होने और रुपये के कमजोर होने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल सकते हैं। इन सभी 5 फैक्टर्स ने मिलकर आज बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया है और फिलहाल एक्सपर्ट्स निवेशकों को 'वेट एंड वॉच' की सलाह दे रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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